झारखंड का सबसे लंबा पुल कौन-सा है, जानें
भारत में जब भी हिंदी भाषा बोलने और पढ़ने वाले राज्यों की बात होती है, तो इसमें झारखंड का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है, जहां स्थानीय भाषा के साथ-साथ हिंदी भाषा सबसे अधिक बोली जाती है। इसके साथ ही झारखंड विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं का भी घर है, जो कि राज्य के लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त यहां बने पुल भी हैं, जो लोगों तक कनेक्टिविटी प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि झारखंड का सबसे लंबा पुल कौन-सा है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत में जब भी विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं की बात होती है, तो इसमें झारखंड का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। इसके साथ ही झारखंड भारत में हिंदी भाषा बोलने और पढ़ने वाले प्रमुख राज्यों में से एक है, जहां पूरे राज्य में सबसे अधिक हिंदी भाषा बोली जाती है।
यहां की अनूठी परंपराएं और संस्कृति लोगों को आपस में जोड़े हुए है। इसके साथ ही लोगों को जोड़ने का काम करते हैं यहां बने पुल, जो कि एक जिले को दूसरे जिले और कस्बे तक जुड़े हुए हैं।
इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि झारखंड का सबसे लंबा पुल कौन-सा है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम झारखंड के सबसे लंबे पुल के बारे में जानेंगे, जिसका हाल ही में उद्घाटन भी किया गया था।
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झारखंड में कुल कितने पुल हैं
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर झारखंड में कितने पुल हैं, तो आपको बता दें कि प्रत्येक जिले और गांव को मिलाकर यहां छोटे और बड़े कुल पुलों की सूची को मिलाकर 312 पुल बने हुए हैं। यह आंकड़ा सितंबर 2023 तक का है।

कौन-सा है सबसे लंबा पुल
अब सवाल है कि झारखंड का सबसे लंबा पुल कौन-सा है, तो आपको बता दें कि हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा झारखंड के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन किया गया है, जो कि मयूराक्षी नदी के ऊपर बना हुआ है। इस पुल को बनाने में 198.11 करोड़ रुपये की लागत आई है। वहीं, इस पुल की आधारशिला तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 12 फरवरी 2018 को रखी थी।
52 पिलर पर बना हुआ है पुल
इस पुल की कुल लंबाई की बात करें, तो यह 2.34 किलोमीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा है। यह पुल कुल 52 पिलर पर बना हुआ है और प्रत्येक पिलर की लंबाई 45 मीटर है।
किन जिलों को जोड़ता है पुल
झारखंड का यह पुल जामताड़ा और दुमका जिले के तीन ब्लाक क्षेत्र की दूरी को काम करता है, जो कि रामेश्वर, मसलिया और नाला है। इसके अलावा यह दुमका और पश्चिम बंगाल के बीर भूमि जिले की दूरी को भी काम करता है, जिसमें सूरी और आसनसोल भी शामिल है।
किस नाम से जाना जाता है यह पुल
झारखंड का यह पुल स्थानीय तौर पर सेल्फी पुल के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां आस-पास रहने वाले लोग अक्सर पुल की खूबसूरती और नदी के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ सेल्फी लेने के लिए पहुंचते हैं। यही वजह है कि इस पुल को सेल्फी पुल के नाम से भी जाना जाता है।
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