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उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019: अर्थ और प्रमुख विशेषताएं

उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2019 को भारतीय संसद द्वारा अगस्त 06, 2019 को पारित किया गया और बाद में भारत के राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर करने के बाद यह कानून बन गया है. यह नया अधिनियम पुराने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की जगह लेगा. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की प्रमुख विशेषताओं को जानने के लिए इस लेख को पढ़ें.
Jan 21, 2020 16:56 IST
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Consumer Protection Act, 2019
Consumer Protection Act, 2019

उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2019 को लोकसभा ने 30 जुलाई, 2019 को और राज्यसभा ने 06 अगस्त, 2019 को पारित किया है. यह विधेयक संसद में उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री राम विलास पासवान द्वारा पेश किया गया था.

RAM-VILAS

इस लेख में हमने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अर्थ और विशेषताएं बताई हैं.

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 क्या है (Meaning of Consumer Protection Act, 2019)
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक कानून है. देश भर में उपभोक्ता अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित उपभोक्ता शिकायतों को हल करने के लिए यह अधिनियम बहुत जरूरी है. इसके पास उपभोक्ता शिकायतों को तेजी से हल करने के तरीके और साधन हैं.

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य क्या है (Aim of Consumer Protection Act, 2019)

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का मूल उद्देश्य, उपभोक्ताओं की समस्याओं को समय पर हल करने के लिए प्रभावी प्रशासन और जरूरी प्राधिकरण की स्थापना करना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है.

उपभोक्ता की क्या परिभाषा है (Definition of Consumer)

इस अधिनियम के अनुसार; उस व्यक्ति को उपभोक्ता कहा जाता है जो वस्तुओं और सेवाओं की खरीद और उपभोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए करता है. यहाँ पर यह जानना जरूरी है कि जो व्यक्ति वस्तुओं और सेवाओं को बेचने के लिए या वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए खरीदता है उसे उपभोक्ता नहीं माना गया है.
यह परिभाषा सभी प्रकार के लेन-देन को कवर करती है चाहे वे ऑनलाइन हों या ऑफलाइन.

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की प्रमुख विशेषताएं (Key features of Consumer Protection Act, 2019)

1. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की स्थापना:

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में CCPA की स्थापना का प्रावधान है जो उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने के साथ साथ, उनको बढ़ावा देगा और लागू करेगा. यह प्राधिकरण; अनुचित व्यापार प्रथाओं, भ्रामक विज्ञापनों और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों को भी देखेगा.

CCPA के पास उल्लंघनकर्ताओं पर जुर्माना लगाने और बिके हुए माल को वापस लेने या सेवाओं को वापस लेने के आदेश पारित करना, अनुचित व्यापार प्रथाओं को बंद करने और उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान की गई कीमत को वापिस दिलाने का अधिकार भी होगा.

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के पास उपभोक्ता नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए एक जांच विंग होगा. CCPA का नेतृत्व महानिदेशक करेंगे.

2. उपभोक्ताओं के अधिकार (Rights of consumers):

यह अधिनियम उपभोक्ताओं को 6 अधिकार प्रदान करता है;

i. वस्तुओं या सेवाओं की मात्रा, गुणवत्ता, शुद्धता, क्षमता, कीमत और मानक के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार

Ii. खतरनाक वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षित रहने का अधिकार 

Iii. अनुचित या प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं से संरक्षित रहने का अधिकार 

Iv. प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न प्रकार की वस्तुओं या सेवाओं की उपलब्धता

3. भ्रामक विज्ञापनों पर प्रतिबंध और जुर्माना:

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के पास यह अधिकार होगा कि वह भ्रामक या झूठे विज्ञापन (जैसे लक्ष्मी धन वर्षा यंत्र) बनाने वालों और उनका प्रचार करने वालों पर जुर्माना लगाये और 2 वर्ष तक के कारावास की सजा सुनाये.

यदि कोई व्यक्ति या कंपनी इस अपराध को बार-बार दोहराता/दोहराती है तो उसे 50 लाख रुपये का जुर्माना और 5 साल तक की कैद हो सकती है.

4. उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission)

इस अधिनियम में राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरों पर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों (CDRCs) की स्थापना का प्रावधान है.

CDRC निम्न प्रकार की शिकायतों का निपटारा करेगा;

i. अधिक मूल्य वसूलना या अस्पष्ट कीमत वसूलना 

ii. अनुचित या प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार 

iii. जीवन के लिए खतरनाक वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री 

iv. दोषपूर्ण वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री

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5. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction under the Consumer Protection Act)
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 ने उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (CDRCs) ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला विवाद निवारण आयोग के अधिकार क्षेत्र को तय कर दिया है. 

राष्ट्रीय विवाद निवारण आयोग, 10 करोड़ रुपये से अधिक की शिकायतों को सुनेगा जबकि राज्य विवाद निवारण आयोग, उन शिकायतों की सुनवाई करेगा जो कि 1 करोड़ रुपये से अधिक है लेकिन 10 करोड़ रुपये से कम है. अंत में जिला विवाद निवारण आयोग, उन शिकायतों को सुनेगा जिन मामलों में शिकायत 1 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है.

तो ये थीं नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की प्रमुख विशेषताएं. यह टॉपिक विभिन्न परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, राज्य पीएससी और बैंकिंग आदि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. ऐसे और अधिक लेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें;

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