माइक्रो प्लाज्मा ऑक्सीकरण प्रणाली क्या है?

COVID-19 महामारी के दौरान रोलिंग स्टॉक और स्टेशनों को कीटाणुरहित करने के लिए चेन्नई मेट्रो रेल ने माइक्रो-प्लाज्मा ऑक्सीकरण प्रणाली तकनीक का उपयोग किया और ऐसा करने वाला यह देश में पहला शहर बन गया है. आइये इस लेख के माध्यम से माइक्रो-प्लाज्मा ऑक्सीकरण प्रणाली के बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं.
Created On: Oct 29, 2020 13:47 IST
Modified On: Oct 29, 2020 13:51 IST
Micro Plasma Oxidation System
Micro Plasma Oxidation System

COVID-19 महामारी के दौरान रोलिंग स्टॉक और स्टेशनों को कीटाणुरहित करने के लिए चेन्नई मेट्रो रेल ने माइक्रो-प्लाज्मा ऑक्सीकरण प्रणाली, उच्च अंत रक्षा ( High-End Defence) और चिकित्सा अनुप्रयोगों (Medical Applications) में उपयोग की जाने वाली तकनीक का उपयोग करने वाला देश में पहला शहर बन गया है.

माइक्रो-प्लाज्मा ऑक्सीकरण प्रणाली के बारे में 

सीएमआरएल के अनुसार, माइक्रो प्लाज्मा ऑक्सीकरण प्रणाली, जिसे ईटीए शोधन द्वारा डिजाइन किया गया है, स्वच्छ है, सुरक्षित है और कीटाणुशोधन के लिए स्थायी पानी का उपयोग करती है. 

इसके अलावा, सीएमआरएल ने बताया कि सिस्टम गैर विषैले हैं और बैक्टीरिया, वायरस, इत्यादि के खिलाफ अन्य रसायनों की तुलना में लगभग 10 से 1000 गुना अधिक प्रभावी हैं.

साथ ही आगे यह भी बताया गया है कि सैनिटेशन प्रक्रिया को इस तकनीक के द्वारा कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकता है. 

यह बैक्टीरिया की सेल वाल (Cell Wall) पर क्लोरीन की तुलना में 51 प्रतिशत अधिक शक्तिशाली है और 3000 गुना तेजी से बैक्टीरिया को मारता है. क्लोरीन के विपरीत, यह गैर विषैले हैं और उत्पादों द्वारा कोई कीटाणुशोधन नहीं करता है. यह प्रणाली इनपुट के रूप में केवल साधारण पानी का उपयोग करती है और कोई रसायन नहीं जोड़ा जाता है. 

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यह तकनीक कैसे काम करती है?

प्लाज्मा इलेक्ट्रोलीटिक ऑक्साइड (Plasma Electrolytic Oxide, PEO) कोटिंग्स एल्यूमीनियम, मैग्नीशियम जैसे धातुओं के लिए कठोर, घनी, पहनने के लिए प्रतिरोधी और ऑक्साइड कोटिंग्स हैं. जिस प्रक्रिया से वे ग्रो होते हैं, उसे माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण (Micro-Arc Oxidation, MAO) या स्पार्क डिस्चार्ज एनोडाइजिंग (Spark Discharge Anodizing) भी कहा जा सकता है. 

माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण (MAO) या प्लाज्मा इलेक्ट्रोलाइटिक ऑक्सीकरण (PEO) एक प्लाज्मा-रासायनिक और विद्युत रासायनिक प्रक्रिया है. 

यह प्रक्रिया एक क्षारीय इलेक्ट्रोलाइट में एक उच्च वोल्टेज स्पार्क उपचार के साथ विद्युत रासायनिक ऑक्सीकरण को जोड़ती है, जिसके परिणामस्वरूप धातु की सतह पर शारीरिक रूप से सुरक्षात्मक ऑक्साइड फिल्म का निर्माण होता है ताकि पहनने और संक्षारण प्रतिरोध के साथ-साथ घटक जीवनकाल को बढ़ाया जा सके.

यह एल्यूमीनियम, टाइटेनियम, नाइओबियम, जिरकोनियम, मैग्नीशियम और उनके मिश्र धातुओं की सतह पर ऑक्सीकरण और पिगमेंटेशन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है. 

उपचारित घटकों का उपयोग भवनों, यांत्रिकी, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्रों में किया जाता है. प्रौद्योगिकी सरल और ऊर्जा की बचत है और उच्च थ्रोपुट, कम लागत, उच्च फिल्म गुणवत्ता, कलर पिगमेंटेशन की विस्तृत श्रृंखला के साथ-साथ पर्यावरण को नुक्सान नहीं पहुंचाता है.

इस तकनीक का अनुप्रयोग (Applications)

व्यापक रूप से पहनने, थर्मल, और संक्षारण प्रतिरोध के साथ-साथ रक्षा (defense), एयरोस्पेस (aerospace), कपड़ा, यांत्रिकी, परिवहन, भवन, रसायन और जैव चिकित्सा उद्योग में उपयोग किए जाने वाले औद्योगिक घटकों के दृश्य उपस्थिति को बढ़ाते हैं.

माइक्रो प्लाज़्मा ऑक्सीकरण के निम्नलिखित लाभ हैं:

जीवाणुनाशक (Bactericidal): अत्यधिक प्रभावी, एंडोटॉक्सिन (Endotoxins) को कम करता है और शैवाल को नष्ट करता है.

सभी ज्ञात जल-जनित विषाणुओं (Water-Borne Viruses) और अन्य रोगजनकों (Pathogens) की व्यापक स्पेक्ट्रम कवरेज करता है.

खतरनाक रसायनों के भंडारण और हैंडलिंग से बचाता है.

पर्यावरण के अनुकूल होता है.

तो अब आपको  माइक्रो-प्लाज्मा ऑक्सीकरण प्रणाली के बारे में ज्ञात हो गया होगा.

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