Lok Sabha Speaker 2024: कोटा में जन्मे ओम बिड़ला चुने गए लोकसभा अध्यक्ष, स्पीकर की शक्तियों और कार्यों को जानें
ओम बिड़ला को एक बार फिर लोकसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया है. बता दें कि नई मोदी सरकार के लिए पहले शक्ति परीक्षण में, विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए एनडीए उम्मीदवार ओम बिड़ला के खिलाफ अपने उम्मीदवार के सुरेश को मैदान में उतारा था. ओम बिड़ला दूसरी बार लोकसभा के स्पीकर चुने गए है. वह दूसरी बार अध्यक्ष चुने जाने वाले छठे स्पीकर है. स्पीकर की शक्तियों और कार्यों को जानें.
Lok Sabha Speaker Om Birla: ओम बिड़ला को एक बार फिर लोकसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया है, इस बार विपक्ष ने भी उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारा था लोक सभा में ध्वनि मत से उनका चुनाव किया गया है. पीएम मोदी ने उन्हें जीत पर बधाई दी है. यह उनका दूसरा कार्यकाल होगा. इस अवसर पर पीएम मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ओम बिड़ला को लोकसभा के आसन तक लेकर गए.
बता दें कि नई मोदी सरकार के लिए पहले शक्ति परीक्षण में, विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए एनडीए उम्मीदवार ओम बिड़ला के खिलाफ अपने उम्मीदवार के सुरेश को मैदान में उतारा था. ओम बिड़लाको दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई देने के बाद, कांग्रेस नेता राउल गांधी ने कहा कि भले ही सरकार के पास राजनीतिक शक्ति हो लेकिन विपक्ष भी लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है.
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दो बार के निर्वाचित स्पीकर:
ओम बिड़ला दूसरी बार लोकसभा के स्पीकर चुने गए है. वह दूसरी बार अध्यक्ष चुने जाने वाले छठे स्पीकर है. इससे पहले जीएम बालयोगी, बलराम जाखड़ जैसे स्पीकर दो बार चुने जा चुके है. बता दें कि ओम बिड़ला कोटा से तीसरी बार लोक सभा के लिए चुने गए थे. साथ ही वह दो बार पूर्ण कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले दूसरे स्पीकर है.
इससे पहले भारतीय राजनीति के इतिहास में केवल तीन बार 1952, 1967 और 1976 में ही लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव हुआ था. परंपरागत रूप से, लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आम सहमति से होता था लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.
#WATCH | BJP MP Om Birla occupies the Chair of Lok Sabha Speaker after being elected as the Speaker of the 18th Lok Sabha.
— ANI (@ANI) June 26, 2024
Prime Minister Narendra Modi, LoP Rahul Gandhi and Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju accompany him to the Chair. pic.twitter.com/zVU0G4yl0d
कोटा में जन्मे बिड़ला:

ओम बिड़ला जून 2019 से 17वें लोक सभा अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे, 18वीं लोकसभा के लिए उन्हें एक बार फिर से चुन लिया गया है. वह राजस्थान के कोटा-बूंदी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. लोक सभा के लिए चुने जाने से पहले, बिड़ला ने राजस्थान विधानसभा में तीन कार्यकालों के लिए विधायक के रूप में कार्य किया था. ओम को 2003, 2008 और 2013 में क्रमशः 12वीं, 13वीं और 14वीं राज्य विधानसभाओं के लिए चुना गया था.
23 नवंबर 1962 को राजस्थान के कोटा में जन्मे बिड़ला ने कम उम्र में ही अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की है.
तीन बार विधायक और तीन बार सांसद:
ओम बिड़ला की पत्नी का नाम अमिता है जो पेशे से सरकारी डॉक्टर और उनकी दो बेटियां अंजली और आकांक्षा है. ओम तीन बार विधायक रह चुके है और इस बार तीसरी बार लोकसभा के लिए भी चुने गए है. वह लोकसभा स्पीकर बनने वाले राजस्थान के पहले सांसद भी हैं. स्पीकर पद पर रहते हुए उन्होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किये है.
ओम बिड़ला के बारें में:
| पिता का नाम | श्री कृष्ण बिड़ला |
| माता का नाम | श्रीमती शकुंतला बिड़ला |
| पत्नी का नाम | अमिता बिड़ला |
| शिक्षा | एम कॉम |
| लोकसभा क्षेत्र | कोटा (राजस्थान) |
| राजस्थान विधानसभा सदस्य | 2003, 2008 और 2013 |
| लोकसभा सदस्य | 16वीं, 17वीं और 18वीं लोकसभा |
| पहली बार लोकसभा स्पीकर बने | 19 जून 2019 |
लोक सभा के अध्यक्ष के शक्तियां और कार्य:
लोक सभा के अध्यक्ष का मुख्य कार्य लोकसभा का सुचारू रूप से संचालन करना होता है. साथ ही बैठकों की अध्यक्षता करना होता है. वे सभी बैठकों के समय और क्रम को संचालित करते हैं.
विधायिका: अध्यक्ष को लोक सभा में विधायिका कार्यक्षमता की स्थापना का अधिकार होता है.
वैधानिक शक्तियां: अध्यक्ष को संसद की वैधानिक सभी शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार होता है. वे विवादास्पद प्रश्नों में तटस्थ भूमिका निभाते हैं और न्यायिक विवादों में निर्णय का अधिकार रखते है.
पारित बिलों का समय सीमा: स्पीकर को पारित बिलों की समय सीमा निर्धारित करने का अधिकार होता है.
सदस्यों के अधिकारों की रक्षा: अध्यक्ष का दायित्व होता है कि वे सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करें और सदन की संवादशीलता और नैतिकता को बनाए रखें.
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