जानें न्यूटन की गति के नियमों के बारे में

सर आइज़क न्यूटन द्वारा गति के तीन नियमों की अवधारणा जो कि बल और गति पर आधारित है को परिभाषित किया गया है. इन नियमों को स्वयंसिद्ध (Axiom) भी कहा जाता है. आइये इस लेख के माध्यम से गति के तीन नियमों के बारे में अध्ययन करते हैं.
Mar 5, 2018 18:03 IST
    Newton's Laws of Motion

    सर आइज़क न्यूटन (Sir Isaac Newton) ने वस्तुओं की गति के सम्बन्ध में कुछ नियमों का उल्लेख किया है. ये सिद्धांत खगोल-विज्ञान के मूलभूत आधार हैं. इन नियमों के आधार पर ग्रहों, उपग्रहों तथा आकाश के अन्य पिंडों की गतियों तथा सूर्य-ग्रहण, चन्द्र-ग्रहण आदि के सम्बन्ध में बताया जा चुका हैं. न्यूटन ने सबसे पहले 1687 में अपनी पुस्तक प्रिंसिपिया (Principia) में गति के नियमों (Laws of Motion) को प्रतिपादित किया था इसलिए इन नियमों को न्यूटन के नियम कहा जाता है. ये गति-नियम संख्या में तीन है. आइये इन नियमों के बारे में इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.
    न्यूटन के गति के नियम
    1. न्यूटन का प्रथम नियम (Law of Inertia यानी जडत्व का नियम): वस्तु अपनी विरामावास्था या एक सीध में एकरूप गत्यावस्था में तब तक रहती है, जब तक बाह्य बल (external force) द्वारा उसकी विरामावस्था या गत्याव्स्था में कोई परिवर्तन न लाया जाए. वस्तु के विराम की अवस्था (Inertia) का बोध होता है. अतः इस नियम को विराम का नियम भी कहते हैं.
    उदाहरण: यदि आकाश में बॉल को फेका जाए तो वह अनंत गर्भ में विलीन हो जाएगी, यदि वायु का घर्षण तथा गुरुत्व इसके विरुद्ध नहीं हो. पेड़ को हिलाने से उसके फूल टूटकर नीचे गिर जाते है. अर्थात् उपर्युक्त नियम से वस्तु के दो तरह के विरामों का बोध होता है– विराम की अवस्था और गति की अवस्था.
    विराम की अवस्था: विराम की अवस्था प्रत्येक वस्तु का साधारण गुण है. टेबल या मेज अपनी जगह पर तब तक रहेगी, जब तक उसे हटाया नहीं जाए.
    गति की अवस्था: यह अवस्था गतिशील वस्तु का विशिष्ट गुण है. जैसे गाड़ी पर बैठा हुआ मुसाफिर गाड़ी की गति से ही आगे की ओर बढ़ता है क्योंकि गाड़ी के अकस्मात् रुकने से वह आगे की ओर लुढ़क जाता है. उसके ऊपर वाले भाग की गति गाड़ी की गति जैसी बनी रहती है लेकिन उसका बाकी का भाग रुक जाता है. फलतः गति की अवस्था के कारण उसका ऊपरवाला भाग आगे की ओर झुक जाता है.

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    2. गति का द्वितीय नियम (Law of Momentum यानी संवेग का नियम): वस्तु के संवेग (Momentum) में परिवर्तन की दर उस पर लगाये गये बल के अनुक्र्मानुपाती (Directly proportional) होती है तथा संवेग परिवर्तन आरोपित बल की दिशा में ही होती है अर्थात् यह उस दिशा में ही होती है जिस दिशा में बल लगता है. इस नियम में हमें बल का परिमाण या दो बलों का तुलनात्मक ज्ञान के बारे में पता चलता है.
    उदाहरण: क्रिकेट खिलाड़ी तेज़ी से आती हुई गेंद को केंच करते समय अपने हाथों को गेंद के वेग को कम करने के लिए पीछे की और खीच लेता है, ताकि उसको चोट न लगे.
    आइये देखते हैं आवेग (Momentum) क्या होता है?
    ये हम सब जानते हैं कि गतिशील वस्तु के सामने रुकावट डालने से हमें धक्का लगता हैं. जो वस्तु जितनी ही गतिशील होती है उसको रोकने में उतना ही अधिक धक्के का अनुभव हमें होता है. बन्दूक की गोली से तीव्र आघात, गोली के तीव्र वेग के कारण ही होता है. इस प्रकार यदि हमें दो वस्तुओं में समान वेग उत्पन्न करना हो तो हमें उस विशेष वस्तु में अधिक बल लगाना पड़ता है, जिसकी मात्रा अपेक्षाकृत अधिक रहती है.

    3. गति का तीसरा नियम (Law of action and reaction यानी क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम): प्रत्येक क्रिया (Action) की उसके बराबर तथा उसके विरुद्ध दिशा में प्रतिक्रिया (Reaction) होती है. इस नियम को क्रिया-प्रतिक्रिया (Law of action and reaction) का नियम कहा जाता है. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है: हम जिस वस्तु को जितने बल से खींचते हैं, वह वस्तु भी हमें उतने ही बल से अपनी ओर खींचती है, फर्क है केवल दिशा में.

    उदाहरण: बन्दुक से गोली छोड़ते समय पीछे की और झटका लगना. रॉकेट का आगे बढ़ना आदि. जितनी जोर से हम गेंद को पटकते हैं उतना ही ऊपर यह उछलता है. वस्तु को खींचना, जमीन पर पैर पटकना, गेंद को जमीन पर गिराना आदि क्रियाएँ हैं. वस्तु का विपरीत दिशा में खींचना, पैर में चोट लगना तथा गेंद का ऊपर दिशा में जाना आदि प्रतिक्रियाएँ हैं.
    न्यूटन के तीनों नियमों (Three laws of Newton) का साधारण प्रमाण नहीं दिया जा सका है. परन्तु इसके आधार पर की गई गणनाएँ प्रायः ठीक निकली हैं. अतः इन नियमों को स्वयंसिद्ध (Axiom) भी कहा जाता है.

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