Search

पाकिस्तान और चीन बना रहे हैं POK में दियामर बाशा डैम प्रोजेक्ट: जानिये पूरी डिटेल

पाकिस्तान और चीन ने गिलगित-बाल्टिस्तान (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर -POK) में दियामेर-भाषा बांध के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं. इसका निर्माण चीन की एक सरकारी कंपनी ‘चाइना पावर’ और पाकिस्तानी सेना की वाणिज्यिक इकाई ‘फ्रंटियर वर्क्स आर्गनाइजेशन’ के द्वारा किया जायेगा. इस बाँध के लिए 442 अरब पाकिस्तानी रुपये के ठेके पर हस्ताक्षर किये गए हैं.
May 15, 2020 17:20 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon
Diamer Basha Dam work progress
Diamer Basha Dam work progress

दियामर बाशा डैम का इतिहास: (History of Diamer-Bhasha Dam)

दरअसल पाकिस्तान इस बाँध का निर्माण करने की कोशिश 2010 से ही कर रहा है जब  काउंसिल ऑफ़ कॉमन इंटरेस्ट (CCI) ने इसके निर्माण की अनुमति दी थी लेकिन पैसे की तंगी वजह से हर बार पीछे हटना पड़ा था. लेकिन अब चीन के इसमें पार्टनर बन जाने से पैसे की तंगी की समस्या हल हो गयी है. 

इस 4500 मेगावाट के दियामर बाशा डैम के लिए चीन और पाकिस्तान के बीच 13 मई को 442 अरब पाकिस्तानी रुपये (Diamer-Bhasha Dam cost) के ठेके पर हस्ताक्षर किये गये हैं. हालाँकि अभी तक इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ है लेकिन जमीन अधिग्रहण का काम कर लिया गया है.
इसका प्रोजेक्ट में चीन की सरकारी कंपनी ‘चाइना पावर’ की 70% हिस्सेदारी जबकि पाकिस्तानी सेना की वाणिज्यिक इकाई ‘फ्रंटियर वर्क्स आर्गनाइजेशन’ की 30% हिस्सेदारी है.

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के बारे में रोचक तथ्य और इतिहास

ध्यान रहे कि इसके पहले जब चीन ने पाकिस्तान से कहा था कि इस Diamer-Bhasha Dam को One Belt, One Road' (OBOR) प्रोजेक्ट के तहत बनाया जा सकता है तब पाकिस्तान ने इसके लिए मना कर दिया था. लेकिन अब कोविड 19 के कारण पाकिस्तान में रोजगार की कमी है और अर्थव्यवस्था काफी दबाव में है. इसलिए पाकिस्तान इस Diamer-Bhasha Dam को बनाने के लिए तैयार हुआ है.

OROB-CHINA

दियामर बाशा डैम के बारे में  (About Diamer-Bhasha Dam)

दियामर बाशा डैम परियोजना, चिलास (खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित बाल्टिस्तान) के पास सिंधु नदी पर स्थित है. परियोजना में अनुमानित लागत (diamer-bhasha dam cost) लगभग 14 बिलियन अमेरीकी डॉलर है.

इस परियोजना में मुख्य बांध, एक जल डायवर्जन प्रणाली (डायवर्जन प्रणाली में दो सुरंगें और एक डायवर्जन नहर शामिल होगी), एक्सेस ब्रिज और 21 मेगावाट जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया जाएगा जिससे बाँध निर्माण के दौरान परियोजना की ऊर्जा जरुरतों को पूरा  किया जाएगा.

पाकिस्तानी समाचारपत्र डॉन के अनुसार, बाँध की ऊंचाई 272 मीटर होगी और आठ मीलियन एकड़ फुट (MAF) जलाशय का निर्माण किया जाएगा जो कि दुनिया का सबसे ऊंचा रोलर कॉम्पैक्ट कंक्रीट (RCC) बांध होगा. इसमें 14 गेट, एक स्पिलवे (जिससे पानी सरकता है), और गाद को बाहर निकालने के लिए पांच आउटलेट होंगे. पुल का निर्माण बांध ढांचे के नीचे के प्रवाह की ओर होगा.

लगभग 14 बिलियन अमेरीकी डॉलर के कुल वित्तीय परिव्यय की बांध परियोजना 2028 में पूरी होगी.

पाकिस्तान को दियामर बाशा डैम से होने वाले लाभ: (Advantages of Diamer-Bhasha Dam to Pakistan)

1.  पाकिस्तान ने सिंध नदी पर कई बाँध बना दिए हैं जो कि अब पुराने भी हो चुके हैं. इस नए बाँध के निर्माण से इन पुराने बांधों के ऊपर लोड कम होगा और उनकी आयु बढ़ने की संभावना है. इसका फायदा तरबेला बाँध को होगा और इसकी आयु कम से कम 35 वर्ष बढ़ जाएगी.

2.  इस बाँध के बन जाने से पाकिस्तान में बाढ़ की संख्या, बाढ़ की भीषणता और निरंतरता में कमी होगी.

3. इससे सिंधु बेसिन सिंचाई प्रणाली में सिचाईं की उत्तम व्यवस्था हो जाएगी जो कि मौजूदा जलाशयों में गाद जमाव के कारण ख़राब हो गयी है.

4. इस परियोजना से अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों पर विकास को गति मिलेगी और पानी और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता में सुधार के अलावा रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.  

5. इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर ने बताया है कि इसके बनने से पाकिस्तान में लगभग 16500 नयी नौकरियों का सृजन होगा. इसके अलावा यह 4500 मेगावाट हाईडल बिजली और लगभग 1.2 मिलियन एकड़ जमीन की सिंचाई में मदद करेगा.

अब देखने वाली बात यह कि क्या भारत अपनी कूटनीति के तहत इस diamer bhasha dam के निर्माण को रुकवाने में कामयाब होगा? हालाँकि इसके पहले विश्व बैंक औए एशियाई विकास बैंक इस प्रोजेक्ट को विवादित क्षेत्र में होने के कारण आर्थिक मदद देने से मना कर चुके थे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को कौन देश कितना फण्ड देता है?

जानें पाक अधिकृत कश्मीर (POK) का इतिहास क्या है?