राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, रासुका (NSA) क्या होता है और इसे कब लगाया जाता है?

Apr 6, 2020, 16:03 IST

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), या रासुका 23 सितंबर 1980, इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान अस्तित्व में आया था. यह कानून, राज्य और केंद्र सरकार को एक ऐसे व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार देता है जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका हो. राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA में यह प्रावधान है कि सरकार, किसी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रख सकती है.

Meaning and Provisions of National Security Act,1980
Meaning and Provisions of National Security Act,1980

भारत के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Act) या रासुका को विभिन्न मामलों में लगाया जाता है. अभी हाल में कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में कोरोना वारियर्स के नाम से प्रसिद्द डॉक्टर्स,नर्स, पुलिस, सफाई कर्मचारी इत्यादि के ऊपर हमले होने की घटनाओं और इनको परेशान करने की घटनाओं में बीच उत्तर प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश सरकार ने इस कानून के तहत कुछ लोगों पर मामला दर्ज किया है.

आइये अब इस लेख में जानते हैं कि आखिर यह राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), या रासुका क्या होता है, कब लगाया जाता है और इसके तहत किस तरह की सजा के प्रावधान हैं? 

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) क्या होता है? (What is National Security Act)

अगर, केंद्र या राज्य सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उसके सामने बाधा उत्पन्न कर रहा है या आवश्यक सेवा की आपूर्ति में बाधक बन रहा है, तो सम्बंधित सरकार द्वारा उस व्यक्ति को गिरफ्तार कराया जा सकता है. राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 23 सितंबर 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान अस्तित्व में आया था. रासुका में संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है.

रासुका के अन्य प्रावधान (Provisions of NSA)

1. यह अधिनियम, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को किसी व्यक्ति को भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने, विदेश के साथ भारत के संबंधों को चोट पहुँचाने, सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव या आपूर्ति को बाधित करने, ड्यूटी पर तैनात किसी पुलिस कर्मी पर हमला करने के जुर्म में गिरफ्तार करने की ताकत देता है. अभी हाल में मध्य प्रदेश में इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं.

2. NSA के तहत, सम्बंधित अधिकारी को यह पॉवर है कि वह संदिग्ध व्यक्ति को बिना कारण बताये 5 दिनों पर कैद में रख रख सकता है जबकि विशेष परिस्थितियों में यह अवधि 10 दिन तक हो सकती है. इसके बाद उसे राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है.

3. NSA के तहत, गिरफ्तार व्यक्ति सरकार द्वारा गठित किसी सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है लेकिन उसे मुक़दमे के दौरान वकील की सहायता प्राप्त करने का हक़ नहीं है.

4. यह कानून, सरकार को किसी विदेशी को उसकी गतिविधि को नियंत्रित करने के लिए गिरफ्तार करने या देश से बाहर निकालने की शक्ति भी देता है.

5. गाज़ियाबाद और दिल्ली में कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स से बदतमीजी करने और संक्रमित मरीजों द्वारा अपने कोरोना संक्रमण को अन्य स्वस्थ लोगों तक पहुँचाने के जुर्म में कुछ लोगों पर रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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कारावास की अवधि (Imprisonment under the NSA)

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA में यह प्रावधान है कि सरकार, किसी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रख सकती है. लेकिन सरकार द्वारा नए सबूत मिलने पर इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है.

अगर कोई अधिकारी किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करता है तो उसे राज्य सरकार को इस गिरफ़्तारी का कारण बताना पड़ता है. जब तक राज्य सरकार इस गिरफ्तारी का अनुमोदन नहीं कर देती है तब तक गिरफ़्तारी की अधिकतम अवधि बारह दिन से ज्यादा नहीं हो सकती है.

ध्यान रहे कि गिरफ़्तारी के आदेश, जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त अपने संबंधित क्षेत्राधिकार के तहत जारी कर सकते हैं.
भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण को भी ‘रासुका’ के तहत गिरफ्तार करके एक साल तक जेल में रखा गया था लेकिन बाद में छोड़ दिया गया था.

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राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) की आलोचना (Criticism of National Security Act)

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), NSA के तहत मामलों को अपने डेटा में शामिल नहीं करता है क्योंकि इस कानून के तहत बहुत कम संख्या में एफआईआर दर्ज की जाती है. इसलिए, NSA के तहत गिरफ्तार किये गये लोगों की संख्या के बारे में सटीक जानकारी नहीं है. 

चूंकि इस कानून में भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी कारण बताये गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ समय तक अपना वकील रखने की भी अनुमति नही होती है, इसलिए इस क़ानून की तुलना अंग्रेजों के रौलट एक्ट से भी की जाती है. कई जानकारों के अनुसार, राज्य सरकार ने NSA को ‘एक्स्ट्रा जुडिशल पॉवर’ के तौर पर इस्तेमाल भी किया है.

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Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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