येती: हिमालय क्षेत्र में एक रहस्यमय विशाल हिममानव के बारे में

अप्रैल,2019 माह में भारतीय सेना ने ट्वीट किया कि उसके पर्वतारोहण अभियान दल ने 9 अप्रैल, 2019 को नेपाल में स्थित मकालू बारुन नेशनल पार्क के पास 32x15 इंच के पैरों के निशान देखे थे. कुछ लोग कह रहे हैं कि ये हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले हिम मानव येती के पैरों के निशान हैं.
May 3, 2019 11:56 IST
    Yeti Monster Pic

    भारत के ग्रामीण इलाकों में कई किस्से कहानियां प्रचलित होती है जिनमें कई बार बहुत अजीब से करैक्टर होते हैं जिनमें हिम मानव, आदिमानव या फिर विशालकाय कोई अन्य जानवर इत्यादि पाए जाते हैं. वर्तमान में ऐसे ही एक विशाल हिम मानव की चर्चा हिमालय के क्षेत्रों में पाए जाने को लेकर हो रही है. इसे शेरपाओं की लोकल भाषा में "येती" कहा जाता है.

    भारतीय सेना ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस संबंध में कुछ तस्‍वीरें भी जारी की हैं. एडीजीपीआई इंडियन आर्मी ट्विटर हैंडल पर कुछ तस्‍वीरें पोस्‍ट की गई हैं, जिनमें बर्फ पर कुछ निशान दिख रहे हैं और कहा जा रहा है कि ये निशान हिममानव 'येति' के हो सकते हैं.

    yeti tweet

    येती क्या है?

    येती 'जंगली आदमी' के लिए एक शेरपा शब्द है. येती एक बन्दर जैसा दिखने वाला हिममानव (मानव, भालू और बंदर का संयुक्त रूप) है जो एक औसत मानव की तुलना में लंबा होता है इसका वजन लगभग 100-180 किलोग्राम माना जाता है. भारतीय सेना ने दावा किया कि विशालकाय हिम मानव के पैरों के निशान लगभग 32x15 इंच लम्बे-चौड़े थे.

    ऐसा माना जाता है कि “येती” हिमालय के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहता है जहां अधिकांश मनुष्य रहना पसंद नहीं करते हैं और विषम परिस्तिथियाँ होने के कारण जीवित नहीं रह सकते हैं. इस हिम मानव के विशाल आकार के कारण इसे अमेरिका जैसे देशों में बिगफुट (Bigfoot) या बदसूरत हिम मानव कहा जाता है.

    पहली बार एक भारतीय सेना माउटाइरिंग एक्सपेडिशन टीम ने 09 अप्रैल, 2019 को मकालू बेस कैंप के करीब 32x15 इंच वाले हिममानव 'येति' के रहस्यमय पैरों के क्लिक किये हैं. इस रहस्यमयी हिममानव को पूर्व में मकालू-बरुन नेशनल पार्क में देखा गया है.

    yeti footprints

    उल्लेखनीय है कि माउंट मकालू दुनिया का 5वां सबसे ऊंचा पर्वत है. यह चीन और नेपाल के बीच की सीमा पर स्थित है और माउंट एवरेस्ट से लगभग 12 मील दक्षिण में है.

    इस रहस्यमयी हिममानव को पहले भी मकालू-बारुण नेशनल पार्क में देखा जा चुका है.

    देश के रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि सेना के पर्वतारोहण अभियान दल द्वारा ली गई तस्वीरों को सत्यापन के लिए "वैज्ञानिक समुदाय" को भेज दिया गया है.

    इस हिम मानव के पैरों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे कोई मॉडल रैंप पर कैट वाक करने निकली हो; क्योंकि इसके पैरों के निशान ‘एक के बाद एक’ क्रम में थे.

    “येती” के अस्तित्व का दावा पहले भी किया गया था जब नवंबर 2017 में एक रिपोर्ट रॉयल सोसाइटी जर्नल प्रोसीडिंग्स ने कहा था कि 'आधा मानव, आधा-हिममानव' वास्तव में एक भालू है.

    उन्होंने 3 प्रकार के भालुओं को भी वर्गीकृत किया है जिनके हिमालयी क्षेत्र में देखे जाने की संभावना है;

    1. तिब्बती ब्राउन भालू

    2. एशियाई काले भालू

    3. हिमालयन ब्राउन भालू

    यूनिवर्सिटी ऑफ बफेलो कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर चार्लोट लिंडक्विस्ट ने दावा किया था कि:

    "हमारे निष्कर्ष इस बात की पुष्टि करते हैं कि येती नामक हिम मानव के जैविक प्रमाण (biological proof) स्थानीय भालू में पाये जा सकते हैं, ये शरीर में विशालकाय होने के साथ-साथ बड़े पंजे और बड़े-बड़े बालों वाले भी होते हैं जो कि किसी को भी हिम मानव होने का भ्रम करा सकते हैं.

    निष्कर्ष में हम येती के अस्तित्व को पूरी तरह से नकार या स्वीकार नहीं कर सकते हैं. लेकिन तार्किक रूप से सोचने पर ऐसा लगता है कि मनुष्य के लिए हिमालय क्षेत्र की सबसे कठिन परिस्थितियों में जीवित रहना लगभग असंभव है क्योंकि वे उस क्षेत्र में भोजन आसानी से प्राप्त नहीं कर सकेंगे और यदि वे कुछ समय के लिए भोजन जुटा भी लेते हैं तो उन्हें जल्दी जल्दी भोजन की तलाश में बाहर निकलना पड़ेगा जिसके कारण वे बहुत जल्दी जल्दी लोगों की नजर में आ जायेंगे जबकि सच यह है कि हिम मानव देखे जाने के उदाहरण बहुत सालों बाद कभी-कभी आते हैं.

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