भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को भारतीय नागरिक के तौर पर पहचान मिली हुई है। भारतीय संविधान में भाग -2 में अनुच्छेद 5 से 11 तक में नागरिकता को लेकर उल्लेख भी किया गया है, जिसमें भारतीय नागरिकता को लेकर विस्तार से बताया गया है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत का प्रथम नागरिक कौन होता है। कुछ लोग राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लेकर दुविधा में होते हैं। ऐसे में इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
कौन होता है भारत का प्रथम नागरिक
भारत का प्रथम नागरिक राष्ट्रपति होता है। यह पद भारत के संवैधानिक प्रमुख का प्रतीक है। यह बहुत ही जिम्मेदार और महत्त्वपूर्ण पद है।
कौन होता है राष्ट्रपति
अब हम यह जान लेते हैं कि राष्ट्रपति कौन होता है। आपको बता दें कि भारत का राष्ट्रपति भारतीय गणराज्य का प्रमुख होता है, जिसे राष्ट्रप्रमुख भी कहा जाता है। राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होता है, जो कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और एकजुटता का प्रतीक माना जाता है।
किस अनुच्छेद में है राष्ट्रपति का जिक्र
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है। इसमें अनुच्छेद 52 में राष्ट्रपति का जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा। वर्तमान में द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2022 से कार्यभार संभाला है।
राष्ट्रपति क्यों होता है प्रथम नागरिक
अब हम यह जान लेते हैं कि राष्ट्रपति को ही प्रथम नागरिक क्यों कहा जाता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि राष्ट्रपति हमारे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और भारतीय गणराज्य में सर्वोच्च पद भी है। भारत के सभी आधिकारिक कार्यकारी निर्णय राष्ट्रपति के नाम पर ही लिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय गणराज्य में वरीयता का क्रम उठाकर देखें, तो इसमें अधिकारियों और गणमान्य पदाधिकारियों में राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च अधिकारी हैं।
राष्ट्रपति की शक्तियां और कार्य
राष्ट्रपति के पास कार्यकारी, विधायी, न्यायिक, सैन्य और विवेकाधीन शक्तियां होती हैं।
कार्यकारी शक्तियां:
- राष्ट्रपति द्वारा ही प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् के अन्य मंत्रियों की नियुक्ति की जाती है।
-राष्ट्रपति द्वारा ही विभिन्न न्यायाधीशों, राजदूतों और अन्य महत्त्वपूर्ण अधिकारियों को नियुक्त किया जाता है।
-राष्ट्रपति के नाम पर ही संघ के सभी कार्यकारी कार्य किए जाते हैं।
विधायी शक्तियां
- राष्ट्रपति के पास सदन की बैठक बुलाने और सत्रावसान करने का अधिकार होता है।
-राष्ट्रपति द्वारा ही विधेयक पर साइन होते हैं, जिसके बाद कानून बनता है।
-यदि संसद सत्र का आयोजन न हो, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
-राष्ट्रपति के पास लोकसभा को भंग करने का अधिकार होता है।
न्यायिक शक्तियां
राष्ट्रपति द्वारा न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती है।
-राष्ट्रपति के पास मृत्युदंड को क्षमा करने या निलंबित या कम करने का अधिकार होता है।
सैन्य शक्तियां
-राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं।
-उनके पास युद्ध घोषित करने या फिर विराम करने की शक्ति होती है।
वित्तीय शक्तियां
-संसद में सभी धन विधेयक तब पेश किए जाते हैं, जब राष्ट्रपति द्वारा इसकी सिफारिश की जाती है।
-राष्ट्रपति द्वारा हर पांच साल में एक वित्त आयोग की नियुक्ति की जाती है।
क्या हैं आपातकालीन शक्तियां:
राष्ट्रपति के पास राष्ट्रीय, राज्य और वित्तीय आपातकाल घोषित करने या हटाने की शक्ति होती है।
Comments
All Comments (0)
Join the conversation