अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद उसका 6 वर्ष छोटा पुत्र दिल्ली की गद्दी पर मालिक काफूर के द्वारा बैठाया गया. लेकिन मालिक काफूर स्वयं सल्तनत के अमीरों के द्वारा मारा गया. अलाउद्दीन के दूसरे पुत्र मुबारक शाह ने कार्यकारी प्रमुख के तौर पर अपने छोटे भाई के ऊपर शासन करता रहा. उसने अल्पायु शासक को शासन के कार्यों से पूरी तरह से अलग कर दिया और साम्राज्य के समस्त शक्ति अपने हाथो में सिमित कर लिया. यद्यपि वह स्वतः राज्य में अपना नियंत्रण स्थापित ना कर सका और चारो तरफ विद्रोह होते रहे. वह खुशरो खान के द्वारा मार डाला गया. खुशरो खान नाशिरुद्दीन के नाम से दिल्ली सल्तनत का अगला सुल्तान बना.
खुशरो खान हिन्दू धर्मान्तरित था. उसने पूरे खलजी साम्राज्य को अपने हाथो में सिमित कर लिया था. लेकिन वह ज्यादे दिनों तक सल्तनत को अपने हाथो में नियंत्रित ना कर सका. उसने कुल चार महीने तक ही शासन कार्य किया था. इसी बीच ग़ाज़ी मालिक ने उसे युद्ध में पराजित कर दिया और उसकी हत्या कर दी.
ग़ाज़ी मालिक गियासुद्दीन तुगलक के नाम से 1321 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत का अगला सुल्तान बना. उसे तुगलक साम्राज्य का संस्थापक कहा जाता है.
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