दिल-ओ-जान से करें काम | Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 12

Jan 7, 2020, 18:27 IST

“सफलता की राह पर” सीरीज़ के इस बारहवें वीडियो में मोटिवेशनल स्पीकर और विश्वविख्यात लेखक शिव खेड़ा जी हम से काम करने के तरीके और शैली के बारे में बात कर रहे हैं. वे हमें समझा रहे हैं कि अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता, संतोष और बेहतरीन कार्य करने के लिए हमें अपने दिल-ओ-जान से अपना काम करना चाहिए.

हम अक्सर अपने रोज़ाना के काम से बोरियत महसूस करते हैं. ऐसे में हमारे हाथ तो अपना काम कर रहे होते हैं लेकिन हमारा दिलो-दिमाग कहीं और ही होता है जिसका नतीजा हमारे कार्य की गुणवत्ता पर स्पष्ट रूप से नजर आने लगता है. अगर हम अपने करियर, शौक या फिर जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं तो हमें रोज़-रोज़ पूरे दिल-ओ-जान से अपना काम करना होगा. इस वीडियो में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा जी वायलिन वादक फ्रिट्ज क्रेस्लर सहित कुछ अन्य प्रेरणादायक उदाहरण देकर अपने प्रत्येक काम को पूरे दिल-ओ-जान से करने के लिए हमें प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि अपने करियर या जीवन के सभी क्षेत्रों में हम सफलता हासिल कर सकें.

  • दिल-ओ-जान से काम करने की प्रेरणा

इस वीडियो के शुरू में विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर हमें समझा रहे हैं कि, जिंदगी में वही इंसान अच्छे तरीके से काम कर सकता है जो ‘ऑनरशिप’ अर्थात अपने काम की जिम्मेदारी लेता है और जो व्यक्ति अपने काम की जिम्मेदारी खुद पर लेता है, वह व्यक्ति दिल से अपना काम करता है केवल हाथ से काम नहीं करता. शिव खेड़ा जी आगे समझा रहे हैं कि अगर कोई भी काम हमें निपुणता से करना हो तो वह काम हमें दिल से करना होगा.....उस काम को हम सिर्फ हाथ से नहीं कर सकते.  

  • किसी से मिलने उसके घर जाने पर होने वाला अहसास

यहां शिव खेड़ा जी हमें अपनी रोज़ाना की जिंदगी का एक बहुत ही अच्छा उदाहरण देकर समझा रहे हैं कि, अगर हम किसी के घर खाने पर जाते हैं तो खाने के स्वाद से ही हमें अक्सर पता चल जाता है कि खाना दिल से बनाया गया है या सिर्फ हाथ से. इसी तरह, किसी के घर के गेट के भीतर प्रवेश करते ही हमें अक्सर मालूम हो जाता है कि उस घर के लोग हमारे आने से प्रसन्न हैं या नहीं, वे हमारा दिल से स्वागत कर रहे हैं या नहीं. अगर आप कोई काम अपने दिल से नहीं करते हैं तो वह काम कभी भी अच्छे तरीके से पूरा नहीं हो पाता है. इसलिए अगर आपको अपने करियर और प्रत्येक क्षेत्र में निपुणता हासिल करनी है तो आपको अपना प्रत्येक काम दिल से करना होगा.

  • ऊंची कूद का रिकॉर्ड

शिव खेड़ा जी अब हमें कुछ वर्ष पहले का ‘हाई जंप’ अर्थात ऊंची कूद का एक विशेष उदाहरण देकर अपनी बात स्पष्ट कर रहे हैं. इस वीडियो में वे कह रहे हैं कि, ‘ कुछ वर्ष पहले ऊंची कूद का विश्व रिकॉर्ड 7 फीट 4 इंच था. अब आप ही सोचिये कि कोई आदमी 7 फीट 4 इंच का डंडा कैसे एक छलांग  लगा कर पार कर सकता है? आमतौर पर तो किसी भी व्यक्ति के लिए 4 फीट 7 इंच की छलांग लगाना भी मुश्किल है.’ किसी ने ऊंची कूद का विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले चैंपियन से पूछा कि आप कैसे 7 फीट 4 इंच का डंडा एक छलांग लगाकर पार कर लेते हो? तब उस चैंपियन ने बड़ा ही शानदार जवाब दिया और कहा कि, ‘मैं अपने दिल को डंडे के ऊपर फैंकता हूं, जिस्म तो अपनेआप चला आता है.’ इसका यह मतलब है कि अगर हम बेदिली से अपनी जिंदगी में कुछ भी करेंगे तो असफलता ही हमारे हाथ लगेगी. लेकिन, अगर हमें किसी भी काम में सफलता हासिल करनी है तो हमें अपने दिल से वह काम करना पड़ेगा. इसी तरह, सफलता हासिल करने के लिए हमें काफी मेहनत और लगातार अभ्यास भी करना पड़ता है.  

  • वायलिन वादक फ्रिट्ज क्रेस्लर का नजरिया

इस वीडियो में आगे शिव खेड़ा जी हमें एक और जबरदस्त उदाहरण देते हुए अपनी बात कुछ इस तरह समझा रहे हैं कि, एक बार विश्व प्रसिद्ध वायलिन वादक फ्रिट्ज क्रेस्लर अपना संगीत कार्यक्रम समाप्त करके जब जाने लगे तो एक महिला ने उन्हें रोककर कहा कि, ‘क्रेस्लर साहब! आप जिस तरह से अपना वायलिन बजाते हैं, वैसा वायलिन बजाने के लिए मैं अपनी जिंदगी तक देने को तैयार हूं.’ यह सुनकर फ्रिट्ज क्रेस्लर ने जवाब दिया कि, ‘मैडम! मैंने तो अपनी जिंदगी दे दी, लेकिन आप अपनी जिंदगी नहीं देंगी’. फिर फ्रिट्ज क्रेस्लर ने उस महिला प्रशंसक से आगे कहा कि, ‘मैं अगर 1 महीना वायलिन बजाने का अभ्यास नहीं करता हूं तो मेरे श्रोता मेरे वायलिन वादन में फर्क महसूस कर लेते हैं. अगर में 1 सप्ताह अपना अभ्यास नहीं करता तो मेरा परिवार मेरे वायलिन वादन में फर्क बता देता है और मैं अगर 1 दिन अपना वायलिन वादन का अभ्यास नहीं करता हूं तो मैं खुद अपने वायलिन वादन में कमी बता सकता हूं.’ यही फर्क हमें समझाने के लिए काफी है कि जो इंसान निपुणता से अपना काम करते हैं, वे कैसे अपने दिल-ओ-जान अपने काम में झोंक देते हैं.  

  • एक मजदूर, कारीगर और कलाकार में फर्क

सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी इस वीडियो के आखिर में हमें एक मजदूर, एक कारीगर और एक कलाकार द्वारा अपना काम करने के रवैये में फर्क का सटीक उदाहरण देकर प्रेरणा दे रहे हैं. शिव खेड़ा जी आगे कहते हैं कि, ‘यह काम करने के रवैये का फर्क ही है जो हम किसी मजदूर, कारीगर या कलाकार के काम करने के तरीके में साफ़ तौर पर देख सकते हैं.’ तब किसी ने पूछा कि, आखिर इन तीनों के काम करने के रवैये में फर्क क्या है? तब शिव खेड़ा जी बड़े ही स्पष्ट शब्दों में हमें समझा रहे हैं कि, ‘जो इंसान सिर्फ हाथ से काम करता है, उसे मजदूर कहते हैं. जो इंसान अपने हाथ और दिमाग से काम करता है, उसे कारीगर कहते हैं और जो इंसान अपने हाथ के साथ-साथ अपने दिमाग और दिल से भी काम करता है, वास्तव में वह इंसान एक कलाकार होता है.’ इसलिए, अगर हमें अपनी जिंदगी में कोई भी काम अच्छे तरीके से और निपुणतापूर्वक करना हो तो हमें वह काम अपने हाथ, दिमाग और दिल को एक-साथ मिलाकर करना पड़ेगा वरना हम लोग कभी सफल नहीं हो सकते.

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Education Desk

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