इन दिनों सोशल मीडिया के बढ़ते हुए चलन ने न केवल युवाओं को अपनी चपेट में ले लिया है बल्कि किशोर अवस्था के विद्यार्थी भी इसके आकर्षण से दूर नहीं रह पाएl सुबह उठते ही और रात को सोने जाने से पहले तक इन वैबसाइटों को ऐक्सैस करने की आदत ने बच्चों को वास्तविक दुनिया से जैसे परे ही कर दिया हैl हर पल हाथ में लिए मोबाइल फ़ोन पर नज़रें जमाकर बैठे विद्यार्थियों को भला आत्मविश्लेषण करने का समय कब मिलेगा? कब वे अपनी पहचान के बारे में या अपने उद्देश्य के बारे में सोच सकेंगे? विद्यार्थियों में तनाव की बढ़ती हुई समस्सया का प्रमुख कारण भी, सोशल मीडिया पर उनकी बढ़ती व्यस्तता ही हैl
पढ़ाई में कैसे बढ़ाएं रूचि और कैसे रहें एकाग्रित व व्यवस्थित? ये स्टडी टिप्स ज़रूर करेंगे आपकी मदद
इस लेख के द्वारा आज हम अपने विद्यार्थियों पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव की बात करते हुए इसके नेगेटिव इफेक्ट्स पर चर्चा करेंगेl
आइए जानते हैं सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से क्या होते हैं नुकसान:
1. याददाश्त में आती है कमी
सोशल मीडिया पर किए एक अध्ययन के मुताबिक सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल याद्दाश्त पर विपरीत असर डालता है। ऐसे लोगों के दिमाग में महत्वपूर्ण जानकारी सुरक्षित नहीं रह पाती। दरअसल खाली समय में दिमाग जानकारियों को सुरक्षित करने का काम करता है। लेकिन फ्री टाइम में भी लोग ऑनलाइन गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, जिसके चलते उनके दिमाग को आराम नहीं मिल पाता और इसका सीधा असर उनकी याद्दाश्त पर पड़ता है।
2. एकाग्रता होती है प्रभावित
पढ़ाई के दौरान भी बच्चों का ज़्यादातर ध्यान अपने फ़ोन पे आने वाले मैसेजज़ और नोटिफिकेशन्ज़ पर ही रहता है, जिसकी वजह से उसका ध्यान पढ़ाई पर केन्द्रित नहीं हो पाताl फेसबुक, व्हाट्स ऐप, ट्विटर, आदि जैसी सोशल मीडिया साइट्स की वजह से होने वाली Distraction यानि व्याकुलता के कारण विद्यार्थियों की अकादमिक परफॉरमेंस में भी गिरावट आती हैl
किशोरावस्था में बच्चों के बदलते सवभाव को कैसे संभालें माँ-बाप?
3. आत्मसम्मान पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव
जब बच्चे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों द्वारा शेयर किए गए फोटो अथवा स्टेटस मैसेजेज देखते हैं, तो वे अपनी उपलब्धियों की तुलना अपने दोस्तों की उपलब्धियों से करने लग जाते हैंl उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा किसी ख़ास स्थान पर छुट्टी मनाने के लिए जाना चाहता था लेकिन किसी वजह से वहां नहीं जा पाया और उसका ही एक दोस्त उसी जगह पर ली गई अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर देता है तो वह बच्चा काफी निराश महसूस करने लगता हैl इसके अलावा अपनी फ़ोटो अथवा स्टेटस पर मिलने वाले लाइक्स और कमेंट्स की संख्या अपने किसी दोस्त के मुकाबले कम होने पर भी बच्चों का आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगता हैl क्योंकि वे इन लाइक्स और कमेंट्स को अपनी शख्सियत की अहमियत से जोड़ लेते हैंl
4. कम्युनिकेशन स्किल्स में आती है कमी
हमेशा ऑनलाइन बात-चीत में व्यस्त रहने वाले विद्यार्थियों में समाजिकता की कमी आ जाती है अर्थात् वे निजी तौर पर लोगों से आमने-सामने संवाद करने से बचते हैं जिसके चलते उनमें कम्युनिकेशन स्किल्स की कमी आती हैl जबकि जीवन के हर क्षेत्र चाहे अकादमिक हो या प्रोफेशनल, बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल्स का होना बेहद ज़रूरी है क्योंकि प्रभावी बातचीत की कला आपके सफलता के प्रतिशत बढ़ा देती है।
5. चिंता और तनाव को देता है बुलावा
सोशल मीडिया की बढती लोकप्रियता की वजह से ऑनलाइन दोस्त बनाने का चलन भी बढ़ते जा रहा है, जिसमें आप ऐसे किसी इन्सान को अपना फ्रेंड बनाते हो जिसको आप निजी तौर पर न तो जानते हो और न ही कभी मिले होl इस तरह की गई दोस्ती में विश्वास की कमी रहती है और जितनी जल्दी ऐसे रिश्ते बनते हैं उतनी ही जल्दी टूट भी जाते हैंl मानसिक तौर पर ज़्यादा मज़बूत न होने की वजह से किशोरों में ऐसे टूटते रिश्ते दिमागी चिंता और तनाव का कारण बनते हैं जो की बेहद गंभीर समस्सया हैl
निष्कर्ष
सोशल मीडिया दोस्तों से जुड़े रहने का एक बेहतरीन साधन हैl लेकिन जिस प्रकार हर चीज़ के नुकसान व फ़ायदे दोनों होते हैं, सोशल मीडिया के इस्तेमाल में भी कुछ यही हाल हैl ऊपर दिए नेगेटिव इफेक्ट्स बताने का हमारा मकसद ये नहीं कि सोशल मीडिया का वहिष्कार ही कर दिया जाएl बल्कि इससे हम आपको सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से होने वाली परेशानियों से वाकिफ करवाना चाहते हैं जिनसे लोग जानते हुए भी अनजान बने रहते हैंl सोशल मीडिया पर की गतिविधियों को जिंदगी का हिस्सा न बनाएंl माता-पिता को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को इन साइट्स का सही प्रयोग करना बताएं व उनकी हर गतिविधि या अपडेट से अवगत होते रहेंl
Comments
All Comments (0)
Join the conversation