किस्मत या मेहनत? | Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 2

Jan 7, 2020, 10:38 IST

सफलता की राह पर वीडियो सीरीज़ के इस वीडियो में मोटिवेशनल स्पीकर और अवार्ड विजेता लेखक शिव खेड़ा जी हमसे पूछ रहे हैं कि क्या हमें सफलता किस्मत से मिलती है या फिर कड़ी मेहनत से? क्या हम अपनी कड़ी मेहनत के जरिये अपनी किस्मत बदल सकते हैं? सफलता की राह पर वीडियो सीरीज़ के इस दूसरे वीडियो में शिव खेड़ा जी हमें बता रहे हैं कि सफल होने का क्या मतलब है और कैसे आप अपनी कड़ी मेहनत और केवल कड़ी मेहनत के ही माध्यम से अपने लक्ष्य हासिल करके अपने जीवन में सफल हो सकते हैं. तब किस्मत भी आपको सफलता हासिल करने में सहायता करेगी. 

इस मोटिवेशनल वीडियो में जाने-माने मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा जी हमें जीवन के हरेक क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए मेहनत और प्रैक्टिस का महत्त्व समझा रहे हैं. उनके मुताबिक मेहनत और प्रैक्टिस ही हमारी किस्मत बना सकती है और कड़ी मेहनत के बूते पर ही हम अपने सपने साकार कर सकते हैं. शिव खेड़ा जी यहां एक स्कॉलर का यह खास उदाहरण दे रहे हैं कि, सपने वो नहीं होते हैं जो नींद में आते हैं, सपने वो होते हैं जो हमें नींद नहीं आने देते. इस मोटिवेशनल स्पीच में शिव खेड़ा जी ने ब्रूसली और के उदाहरण देकर जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए कठोर परिश्रम के महत्त्व को समझाया है और जोर देकर कहा है कि कठोर मेहनत से मनुष्य अपनी तकदीर बदल सकता है. आइये आगे जानते हैं कि इस वीडियो में खेड़ा जी हमें जिंदगी जीने के कौन-से जरुरी सबक सिखा रहे हैं: 

  • ब्रूसली: एक महान प्रतिभा के साथ जुझारू व्यक्तित्व 

शिव खेड़ा जी अपने इस वीडियो में ब्रूसली का परिचय देते हुए बताते हैं कि दुनिया में मार्शल आर्ट के सबसे बड़े लीजेंड अगर कोई हैं तो वे ब्रूसली हैं. क्या आपको पता है कि उनकी एक टांग दूसरी टांग से 1 इंच छोटी थी और ब्रूसली की आई-साइट का नंबर – 10 तक था. ब्रूसली बिना लेंसेस के अपने ओपोनेंट्स को ठीक से देख नहीं पाते थे. ब्रूसली रोज़ाना 5 हजार पंचेस (मुक्केबाजी) की प्रैक्टिस करते थे. ब्रूसली की एक खास बात शिव खेड़ा जी ने अपने नई किताब में लिखी है जिसमें ब्रूसली ने यह कहा है कि, ‘मुझे उससे डर नहीं लगता जिसे किक करने के 10 हजार तरीके आते हैं, मुझे उससे डर लगता है जिसे किक मारने का सिर्फ 1 तरीका आता है लेकिन उसने अपने इस 1 तरीके की प्रैक्टिस 10 हजार बार की है. ऐसा आदमी खतरनाक साबित हो सकता है. आगे शिव खेड़ा जी ने स्टीव जॉब्स और माइकल फैब्स का जिक्र करते हुए माइकल फैब्स के बारे में डिटेल से अपने वीडियो में कुछ इस तरह बताया है कि, 

  • माइकल फैब्स: ऐसे तैराक जिन्होंने कठोर मेहनत से अपनी तकदीर बदल दी 

अपने इस वीडियो में शिव खेड़ा जी माइकल फैब्स का उदाहरण भी पेश कर रहे हैं. 2008 की ऑलम्पिक गेम्स से 2 साल पहले माइकल फैब्स के हाथ फ्रैक्चर हो गया था. फैब्स ने माक्स पिच का 36 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था. बीजिंग में वर्ष 2008 में फैब्स ने कुल 8 गोल्ड मेडल जीते थे. डॉ. ने फैब्स को पानी में जाने से ही मना कर दिया था. डॉ. ने कहा कि अगर आपका हाथ ठीक भी हो जाए लेकिन आपके हाथ में पहले जैसी ताकत शायद ही आ पाए. तुम ऑलम्पिक्स में हिस्सा लेना चाहते हो न कि पड़ोस के बच्चों से कॉम्पीटीशन करना चाहते हो. तुम अब पानी में नहीं जा सकते. फैब्स का यह 10 साल से सपना था कि वह ऑलम्पिक्स में चैंपियन बनेगा. फैब्स अपने इस सपने को टूटते हुए नहीं देख सकता था. खेड़ा जी ने आगे किसी स्कॉलर के इस वाक्यांश का उदाहरण हमारे सामने पेश किया है कि, सपने वो नहीं होते हैं जो नींद में आते हैं, सपने वो होते हैं जो हमें नींद नहीं आने देते हैं. फैब्स पानी में गए. उन्होंने 2 साल पूरी प्रैक्टिस की और पानी में हाथ नहीं चलाए बल्कि अपने पांव चलाए. अपनी कठोर मेहनत और प्रैक्टिस के दम पर माइकल फैब्स ने 2008 बीजिंग ऑलम्पिक में कुल 8 गोल्ड मेडल जीते. उनमें से 1 गोल्ड मेडल फैब्स को 100 मीटर बटरफ्लाई स्ट्रोक में मिला जिसमें वे सेकंड स्थान पर आने वाले अपने प्रतिभागी से केवल 1 सेकंड के 100वें हिस्से से आगे थे. खेड़ा जी आगे बताते हैं कि तब वहां मौजूद कुछ प्रेस रिपोर्टर्स में से एक ने फैब्स से कहा कि, ‘यह जरुर आपका लकी डे है.’ आपको किस्मत ने जिता दिया. यह सुनकर फैब्स कुछ नाराज़ हो गये और उस रिपोर्टर से कहने लगे कि, मैं इस इवेंट के लिए पिछले 10 साल से प्रैक्टिस कर रहा था और पिछले 4 सालों में मैंने 10 हजार घंटे प्रैक्टिस की है जिसका सीधा-सा अर्थ है – रोज़ाना 8 घंटे की प्रैक्टिस (संडे को मिलाकर). फैब्स आगे कहते हैं कि अगर आप अगले 4 साल तक रोज़ाना 8 घंटे पानी में बैठ जाओ तो आपका जिस्म सिकुड़ जाएगा. फैब्स आगे उस रिपोर्टर से पूछते हैं कि क्या अब भी मुझे किस्मत ने जिता दिया है?? 

  • एथलीट्स करते हैं 15 सेकंड की परफॉरमेंस के लिए 15 साल तैयारी 

शिव खेड़ा जी ने फिर माइकल फैब्स द्वारा दिए गए उदाहरण को इस वीडियो में हमारे सामने पेश किया है. फैब्स अपनी शानदार जीत का सारा श्रेय किस्मत को देने वाले प्रेस रिपोर्टर से कहते हैं कि एथलीट्स 15 सेकंड की परफॉरमेंस के लिए 15 सालों तक तैयारी करते हैं. आप उनकी जिंदगी या डेली रुटीन देख सकते हैं. कहने का मतलब तो यह है कि कड़ी मेहनत के बिना और सिर्फ किस्मत के भरोसे हमें कुछ हासिल नहीं हो सकता है. 

  • भाग्यवादी नहीं करते मेहनत और भरते हैं किस्मत का दम  

भाग्यवादी अपने जीवन में मेहनत नहीं करते हैं और कहते हैं कि भाग्य से मिला है सब या फिर, भाग्य ने जिता दिया. दरअसल, जो भाग्यवादी होते हैं खुद अपने जीवन में कभी कुछ करते नहीं हैं और वे कुछ होने का इंतजार करते हैं. 

.........तो इस वीडियो से हमें किस्मत के भरोसे बैठने के बजाय अपने सपनों को साकार करने के लिए सफलता मिलने तक लगातार कठोर मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है. इसलिए, अगर हम अपने जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करना चाहते हैं तो हमें जरुर अपनी किस्मत के भरोसे बैठे रहने के बजाय लगातार कठोर मेहनत करनी चाहिए. 
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Jagran Josh
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Education Desk

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