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Positive India: कॉलेज में थे डिप्रेशन के शिकार, आज बन गए हैं बिहार के सुपर कॉप - जानें IPS अमित लोढ़ा की कहानी

बिहार सुपर कोप के नाम से मशहूर IPS अमित लोढ़ा ने अपने कॉलेज के दिन डिप्रेशन से झुझते हुए बिताए परन्तु एक घटना ने उनके आगे का पूरा जीवन बदल दिया। 2018 में अमित ने "Bihar Diaries" नाम से उनके जीवन पर आधारित बुक लांच की

Jul 8, 2020 14:22 IST
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Positive India: कॉलेज में थे डिप्रेशन के शिकार, आज बन गए हैं बिहार के सुपर कॉप - जानें IPS अमित लोढ़ा की कहानी
Positive India: कॉलेज में थे डिप्रेशन के शिकार, आज बन गए हैं बिहार के सुपर कॉप - जानें IPS अमित लोढ़ा की कहानी

IPS अमित लोढ़ा को बिहार के टॉप आईपीएस अफसर में से एक माना जाता है। वर्तमान में पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद पर रहते हुए उन्हें सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक, पुलिस पदक और आंतरिक सुरक्षा पदक से भी सम्मानित किया गया। परन्तु आत्म विश्वास से परिपूर्ण आईपीएस अमित लोढ़ा ने अपने स्कूल और कॉलेज का समय आत्म-संदेह और डिप्रेशन में गुज़ारा। आइये जानते हैं इस सुपर कोप की सफलता की कहानी। 

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अमित के नाना थे IAS अफसर 

IPS अमित लोढ़ा के नाना एक IAS अधिकारी थे। अमित बचपन से ही अपने नाना और उनके आस-पास रहने वाले पुलिसकर्मी और उनकी वर्दी से आकर्षित करते थे। अमित कहते हैं कि एक बच्चे के रूप में वह कमजोर और शर्मीले थे। वह बताते हैं कि पुलिस सेवा ने उन्हें आत्म-विश्वास दिलाने में काफी मदद की।

कॉलेज में हुए थे डिप्रेशन के शिकार 

राजस्थान के रहने वाले अमित ने जयपुर के सेंट ज़ेवियर स्कूल से स्कूली पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने पहले ही एटेम्पट में IIT दिल्ली की प्रवेश परीक्षा पास की। परन्तु अमित का कहना है की कॉलेज में बिताया हुआ उनका समय उनके जीवन का सबसे बुरा दौर था। इस अनुभव का उनके कॉलेज से कोई लेना-देना नहीं था लेकिन उन्होंने कॉलेज का अधिकाँश समय हीन भावना के साथ निकला।

अपने अनुभव को याद करते हुए बताते हैं, '' सबसे पहले मैंने महसूस किया कि हर कोई मुझसे कॉलेज में बेहतर था, शानदार भी। और उन लोगो से मेरा कोई मुकाबला नहीं था। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे हंसी आती है कि मैंने ऐसा क्यों महसूस किया। मैंने उनमें से अधिकांश की तरह पहले प्रयास में योग्यता के आधार पर परीक्षा पास कर ली थी। लेकिन क्योंकि मैं अपने आप को बताता रहा कि मैं कुछ भी नहीं कर सकता इसलिए मैं सबसे सरल कार्यों और परीक्षाओं में  भी असफल रहा। मैं हर चीज में असफल हो रहा था। मैं डिप्रेशन और आत्मघाती विचारों से पीड़ित था। मुझे लगता था कि मैं दुनिया का सबसे बदकिस्मत व्यक्ति हूं। मेरे ग्रेड सबसे खराब थे और यहां तक कि मेरे दोस्त भी मुझसे दूर हो रहे थे क्योंकि मैं शांत था और अजीब माना जाता था।"

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एक घटना ने बदल दिया जीवन 

यह एक नियमित दिन था जब अमित स्क्वैश खेल रहे थे, जब आईआईटी टीम के खिलाड़ियों में से एक ने उनका मजाक उड़ाया और उन्हें कोर्ट से बाहर कर दिया। "यह खेल तुम्हारे जैसे के लिए नहीं है," उसने कहा। यह सुन कर अमित को काफी बुरा लगा लेकिन उनके अंदर एक ऊर्जा जगी। इस दिन के बाद उन्होंने हर रात 1 बजे अभ्यास शुरू किया। और तीन महीने बाद कॉलेज  स्क्वाश टीम में शामिल हो कर उसी व्यक्ति को हराया।

अमित बताते हैं “मुझे ये सफलता इस आत्म विश्वास से मिली की अगर मैं किसी भी काम को 100 प्रतिशत से अधिक देता हूं तो मैं सफल बन सकता हूं। मैंने यूपीएससी की तैयारी के दौरान उसी विश्वास को लागू किया। मैंने सुबह 4 बजे सोने और 1 बजे उठने की आदत को बदला, जैसा कि मैंने अपने कॉलेज की परीक्षा के दौरान किया था। मैंने एक सख्त कार्यक्रम बनाया और व्यवस्थित रूप से इसका पालन किया। IIT में गणित में E ग्रेड प्राप्त करने के बाद, मैं इस विषय से डरने लगा था लेकिन मैं यूपीएससी के दौरान इसमें अव्वल था!"

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यूपीएससी को क्रैक करना केवल पहला कदम था। असली चुनौती थी सेवा में अपनी सूक्ष्मता साबित करना। उनकी पहली पोस्टिंग राजस्थान में अपने गृहनगर से दूर बिहार के कई कठिन क्षेत्रों में हुई। आम जनता के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले अमित लोढ़ा ने उन्हें लोगों का अधिकारी बना दिया। 90 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में जब मोबाइल फोन असामान्य थे उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि लोग उन्हें सीधे लैंडलाइन पर कॉल कर संपर्क कर सकें और उनके साथ किसी भी कानून-व्यवस्था या कानूनी मुद्दों के बारे में बात कर सकते हैं।

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बेगूसराय जिले में अपनी पोस्टिंग के दौरान, लोढ़ा को क्षेत्र के आसपास नक्सली गतिविधियों के बारे में बताया गया था। संसाधन सीमित थे, लेकिन अधिकारी ने अपरंपरागत तरीकों के बारे में सोचा। मोबाइल फोन पर नज़र रखने से लेकर घेराबंदी करने के लिए अधिकारियों और पुलिस जवानों की एक समर्पित टीम रखने तक, उन्होंने इसे व्यवस्थित तरीके से किया। लेकिन नक्सली भी उतने ही मजबूत थे। उन्होंने गोली चला दी।

अमित बताते हैं “जब मैं मौके पर पहुंचा तो गोलीबारी शुरू हो चुकी थी। मेरे डीएसपी और पुलिस के जवान कीचड़ से चल रहे थे। मैंने भी वैसा ही किया। चूंकि सड़क कच्ची थी मैं निकटतम घर तक रेंगता रहा जब तक मुझे एहसास हुआ कि यह वही स्थान है जहां गोलीबारी हो रही थी। मेरे बॉडीगार्ड को भी गोली लगी। यह मुठभेड़ तीन घंटे तक चली, मेरी टीम और मैंने उनमें से नौ नक्सलियों पर हमला किया, जिनमें तीन महिलाएं शामिल थीं। हम उन दो जवानों को बचाने में भी कामयाब रहे, जो गंभीर रूप से घायल हो गए थे और नकदी और हथियारों का भारी जखीरा बरामद किया था। ”

उनका यह मिशन सफल रहा और लोढ़ा को पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया।

IPS अमित लोढ़ा UPSC सिविल सेवा की तैयारी कर रहे ऊमीदारों को संदेश देते हैं की "“यदि आप एक इच्छुक सिविल सेवक हैं, तो लाल बत्ती या इससे जुड़े लाभों के बारे में विचार के साथ सेवा में प्रवेश न करें। सेवा करने का इरादा होना चाहिए। भारत सरकार आपको देश में बदलाव लाने का मौका दे रही है। इसके बावजूद, यदि आप अपने बंगले, कार और लाभों के बारे में सोचते हैं, तो आप गलती कर रहे हैं। जब आप सेवा में शामिल होते हैं, तो आप जहाँ भी तैनात होते हैं, चाहे सबसे अविकसित गाँव में या बड़े जिले में, जाएँ और सेवा करें। ग्लैमर का शिकार न हों बेशक, आपके जीवन के लिए नुकसान, चुनौतियां और खतरे हैं। लेकिन आपने इसे चुना है तो विश्वास के साथ देश की सेवा करने के लिए सिविल सेवा को चुने।"

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