हमारे देश में लाखों स्टूडेंट्स हर साल अपनी ग्रेजुएशन पूरी करते हैं और अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद अधिकतर फ्रेश ग्रेजुएट्स जब जर्नलिज्म या मास मीडिया में कोई कोर्स करना चाहते हैं तो उनमें से कई महत्वाकांक्षी छात्र ऐसे भी हैं, जिन्हें यह समझ नहीं आता है कि वे मीडिया की फील्ड में आखिर कौन-सा कोर्स करें? इसी तरह, अधिकांश छात्र दो प्रसिद्ध और पसंदीदा कोर्सेज, जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में से अपने लिए कोई एक कोर्स चुनने के बारे में अक्सर कंफ्यूज रहते हैं. हालांकि, ये दोनों ही कोर्स आपस में काफी संबद्ध हैं लेकिन, इनसे संबद्ध करियर काफी भिन्न हैं. इन दोनों कोर्सेज में से अपने लिए कोई कोर्स चुनने से पहले आपके लिए यह समझना काफी महत्वपूर्ण है कि इनमें से कौन-सा कोर्स आपके करियर ऑप्शन के लिए ज्यादा अनुकूल है. इस आर्टिकल में जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने के बाद आप अपनी करियर चॉइस के मुताबिक इन दोनों कोर्सेज में से कोई एक कोर्स कर सकते हैं.
यह है जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में प्रमुख अंतर
जर्नलिज्म व्यापक रूप से न्यूज़ रिपोर्टिंग के साथ संबद्ध है जबकि मास कम्युनिकेशन में मीडिया के विभिन्न किस्म आते हैं ताकि मेसेज, सूचना आदि का प्रचार-प्रसार करने के साथ ही लोगों का मनोरंजन और ज्ञान वर्धन किया जाए. जर्नलिज्म के तहत न्यूज़पेपर्स, मैगजीन्स, टीवी, रेडियो या डिजिटल मीडियम में न्यूज़ रिपोर्टिंग शामिल होती है. इसी तरह, विभिन्न मीडियम्स के आधार पर, जर्नलिज्म को मुख्य रूप से 3 बड़े भागों में बांटा जा सकता है जैसे: प्रिंट (अर्थात न्यूज़पेपर्स और मैगजीन्स), इलेक्ट्रॉनिक (अर्थात टीवी और रेडियो) और ऑनलाइन जर्नलिज्म. इसलिये, आप अपनी रूचि के अनुसार इन मीडियम्स से संबद्ध कोई कोर्स कर सकते हैं.
मास कम्युनिकेशन के लिए, आप यह कह सकते हैं कि मीडिया के कई क्षेत्रों जैसेकि, थिएटर, रेडियो, टीवी, फिल्म निर्माण, जर्नलिज्म, एडवरटाइजिंग, पब्लिक रिलेशन्स और अन्य संबद्ध मीडिया क्षेत्रों के लिए व्यापक तौर पर एक ही शब्द ‘मास कम्युनिकेशन’ का इस्तेमाल किया जाता है. संक्षेप में, मास कम्युनिकेशन व्यापक रूप से मीडिया को कवर करता है जबकि, जर्नलिज्म में केवल न्यूज़ और उससे संबद्ध कार्य शामिल होते हैं.
भारत में टॉप जर्नलिज्म स्पेशलाइजेशन
जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन कोर्सेज में मुख्य अंतर
आगे प्रस्तुत हैं:
- कोर्स कंटेंट
जर्नलिज्म की विषयवस्तु में मुख्य रूप से पोलिटिकल साइंस, इकोनॉमिक्स, कम्युनिकेशन थ्योरी, जर्नलिज्म हिस्ट्री और रिसर्च मेथोडोलॉजी विषय शामिल हैं. इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक फैक्ट्स, सैद्धांतिक ढांचे के साथ ही एक मध्यस्थ एजेंसी के तौर पर मीडिया की भूमिका से छात्रों को परिचित करवाना होता है. लेकिन, मास कम्युनिकेशन में वे मुद्दे शामिल होते हैं जिनका सामाजिक सरोकार और सामाजिक प्रभाव काफी व्यापक होता है इसमें जर्नलिस्ट्स और राइटर्स द्वारा प्रस्तुत राय और महत्वपूर्ण आर्टिकल शामिल होते हैं.
- कंटेंट की किस्म
जर्नलिज्म अपने पाठकों या दर्शकों को घटनाओं का सटीक विवरण देने के साथ ही वास्तविक फैक्ट्स का विवरण मुहैया करवाता है लेकिन, मास कम्युनिकेशन में स्थानीय, राष्ट्रीय या अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को जानकारी दी जाती है. इसके लिए मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म्स की सहायता ली जाती है और जरुरी नहीं इस जानकारी या सूचना का कोई विशेष आशय हो.
- लिखने की आजादी
इस संबंध में जर्नलिज्म का दायरा कुछ ज्यादा सीमित है और इसमें ऐसे पेशेवरों की जरूरत रहती है जो अपनी राय देने के बजाय फैक्ट्स बतायें. उन्हें सिर्फ यह बताना होता है कि कब, कहां, किस समय, क्या हुआ है? ........और घटना का हूबहू विवरण देना होता है. मास कम्युनिकेशन का दायरा इससे काफी व्यापक होता है और इसमें राइटर्स के पास ज्यादा विकल्प होते हैं.
- कोर्स में शामिल मुख्य कॉन्सेप्ट्स
ग्रेजुएशन लेवल पर जर्नलिज्म में अक्सर प्रिंट, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक मीडियम्स शामिल होते हैं और पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए आप उक्त में से कोई एक मीडियम चुन सकते हैं. जबकि मास कम्युनिकेशन में आप विभिन्न न्यूज़ मीडियाज के लिये न्यूज़ या करेंट अफेयर्स के बारे में लिखते हैं. अगर आप मास कम्युनिकेशन को एक विषय के रूप में पढ़ते हैं तो आपको मास मीडिया के क्षेत्र में संचालित ह्यूमन कम्युनिकेशन की विभिन्न प्रक्रियाओं और बारीकियों के बारे में भी जानकारी हासिल करनी होगी. इसमें आप ह्यूमन कम्युनिकेशन का अध्ययन करेंगे और यह जानकारी हासिल करेंगे कि लोगों की विशाल संख्या तक कोई सूचना या जानकारी फ़ैलाने के लिए आप ह्यूमन कम्युनिकेशन का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?
- जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ये हैं प्रमुख कोर्सेज
आजकल, जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन के क्षेत्र में छात्रों को ढेरों कोर्सेज ऑफर किये जाते हैं क्योंकि अबतक, इन दोनों ही कोर्सेज के तहत ढेरों विषय समाविष्ट किये जा चुके हैं. कुछ प्रमुख विषय या कोर्सेज इस प्रकार हैं: बैचलर्स इन जर्नलिज़म, बैचलर्स इन जर्नलिज़म एंड मास कम्युनिकेशन, बैचलर्स इन मास मीडिया एंड मास कम्युनिकेशन तथा बैचलर्स इन कम्युनिकेशन स्टडीज और कई अन्य संबद्ध विषय.
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जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में जॉब प्रॉस्पेक्ट्स
जहां तक उक्त दोनों क्षेत्रों में जॉब्स मिलने की संभावनाएं हैं, न्यू स्टाइल मीडिया के क्षेत्र में बहुत तेज़ी से विकास होने के कारण उक्त दोनों ही क्षेत्रों में जॉब्स के ढेरों अवसर मौजूद हैं. जो छात्र जर्नलिज्म चुनते हैं, वे विभिन्न न्यूज़ एजेंसीज, टेलीविज़न और रेडियो न्यूज़ चैनल्स, न्यूज़पेपर्स, मैगजीन्स और न्यूज़ पोर्टल्स जैसे विभिन्न न्यूज़ मीडिया संगठनों में काम तलाश सकते हैं. जो छात्र मास कम्युनिकेशन में अपना करियर बनाना चाहते हैं, वे एनजीओ, पब्लिक रिलेशन्स, एडवरटाइजिंग एजेंसीज, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, कम्युनिकेशन सोल्यूशन संगठनों, यूएन संगठनों और मीडिया अकेडमिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों में जॉब कर सकते हैं.
जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मिलने वाला सैलरी पैकेज
उक्त कोर्सेज में डिग्री प्राप्त करने के बाद आप कितनी सैलरी कमाते हैं?....यह आपके कार्य और संगठन पर निर्भर करता है. अक्सर ऐसा कहा जाता है कि जर्नलिज्म के पेशे में आपको अपने काम के बनिस्पत काफी कम पैसा मिलता है. इसलिये, अगर आप अपने जीवन में पैसे को उच्च प्राथमिकता देते हैं तो आप जर्नलिज्म के बजाय मास कम्युनिकेशन में अपना करियर शुरू करें. एडवरटाइजिंग एजेंसीज में कुछ जॉब्स में किसी न्यूज़ एजेंसी की वैसी ही जॉब से ज्यादा सैलरी मिलती है. इसलिये, अगर आप लोगों को अपने आइडियाज से प्रभावित कर सकते हैं तो किसी एडवरटाइजिंग एजेंसी में काम करना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा.
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भारत के प्रमुख जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स
- एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलि ज्म (एसीजे)
- इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन (आईपीसीडब्ल्यू)
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी)
- सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन (एसआईएमसी)
- मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन (एमआईसीए)
- जामिया मिलिया इस्लामिया
- जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशंस (एक्सआईसी)
- माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय (एमसीएनयूजेसी)
जर्नलिज्म में न्यूज़ रिपोर्टिंग शामिल है फिर चाहे वह प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक या ऑनलाइन मीडिया से संबद्ध न्यूज़ रिपोर्टिंग हो. लेकिन, मास कम्युनिकेशन में फिल्म्स, ऑनलाइन मीडिया, डाक्यूमेंट्री, टेलीविज़न, रेडियो, ग्राफ़िक्स, इवेंट्स, एडवरटाइजिंग, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स और अन्य कई संबद्ध मीडिया विषय शामिल हैं. जब आप किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी से उक्त में से कोई कोर्स करना चाहते हैं तो आप देखेंगे कि ये दोनों ही कोर्स आपस में काफी हद तक जुड़े हुए हैं. हालांकि, उक्त विभिन्नताओं के अलावा, छात्रों के लिए दोनों ही विषय काफी रोचक और चुनातिपूर्ण हैं. आप अपनी रूचि के अनुसार इन दोनों कोर्स में से कोई एक कोर्स चुन सकते हैं. असल में, जिन लोगों को यह लगता है कि उन्हें करेंट अफेयर्स में काफी रूचि है और उन्हें लोगों के साथ जानकारी साझा करना अच्छा लगता है, वे लोग जर्नलिस्ट्स बन सकते हैं. जबकि ऐसे लोग जिन्हें न्यूज़ के अतिरिक्त मास मीडिया के अन्य पहलुओं जैसेकि, कम्युनिकेशन एंड कल्चर स्टडीज, विज्ञापन, पब्लिक रिलेशन्स, डॉक्यूमेंट्री और फीचर फिल्म, रेडियो और टेलीविजन प्रोग्रामिंग में रूचि है, वे मास कम्युनिकेशन का कोर्स चुन सकते हैं. मीडिया इंडस्ट्री लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ या पिलर है और इसमें करियर शुरू करने के लिए आपको रचनात्मक होने के साथ-साथ जिम्मेदार व्यक्ति भी बनना होगा.
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