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भूगोल से संबंधित सामान्य जानकारी

भूगोल धरातल पर स्थित विभिन्न चीजों के बीच आंतरिक संबधों का अध्ययन करता है. इसके अध्ययन के कई प्रकार हैं. जैसे- तंत्र दृष्टिकोण, प्रादेशिक दृष्टिकोण, वर्णात्मक दृष्टिकोण व विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण.
Feb 15, 2018 18:26 IST
Basic Concepts in Geography in Hindi

भूगोल धरातल पर स्थित विभिन्न चीजों के बीच आंतरिक संबधों का अध्ययन करता है. इसके अध्ययन के कई प्रकार हैं. जैसे- तंत्र दृष्टिकोण, प्रादेशिक दृष्टिकोण, वर्णात्मक दृष्टिकोण व विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण:

1. तंत्र दृष्टिकोण: विश्व स्तर पर अलग-अलग वर्गों का समस्त घटक तत्वों को एक साथ भौगोलिक ज्ञान के आधार पर संगठित करना तंत्र दृष्टिकोण कहलाता है।

2. प्रादेशिक दृष्टिकोण: धरातल पर विविध एकरूपता वाले  चीजों का पहचान कर उनके बीच आतंरिक संबंध को निर्धारण करना।यानि की किसी खास क्षेत्र का सामान्य गुण अपने पास के क्षेत्र से हमेशा अलग होता है।

3. वर्णात्मक दृष्टिकोण: इसके अंतर्गत किसी प्रदेश की भौगोलिक विशेषता व जनसंख्या वितरण का वर्णन किया जाता है। विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण: कोई क्षेत्र व उसमे समाहित चीजों का गुण अन्य क्षेत्रों से भिन्न क्यों होता है, इसका अध्ययन करता है।

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4. द्वीप: किसी भूखंड का वह हिस्सा जो चारों तरफ  पानी से घिरा हो 'द्वीप' कहलाता है। यह सागर,झील व नदी भी हो सकता है। सागर में किसी स्थलखंड के चारों ओर प्रवाल द्वारा निर्मित आकृत 'एटॉल'कहलाता है।इस तरह अन्य लघुद्वीप स्केरिज आदि का भी निर्माण होता है। नदी के मध्य भाग में निर्मित द्वीप को 'इयोट' कहा जाता है। एक सामान भौगोलिक विशेषता वाले द्वीप समूहों को 'आर्चिपिलागो' कहा जाता है,जो एक इतालवी शब्द से बना है। जैसे-जापान द्वीपसमूह, कनारी द्वीपसमूह, अंदमान निकोबार द्वीपसमूह, पश्चिमी द्वीपसमूह तथा इंडोनेशियन द्वीपसमूह, जो विश्व का सबसे बड़ा द्वीप समूह है। जबकि ग्रीनलैंड विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है जो 22 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

5. जलसन्धि: इसका निर्माण प्राकृतिक रूप से किसी स्थलसंधि के टूटने से,निमज्जन से,सागरतल के उत्थान या अपरदन क्रियाओ के द्वारा होता है। यह एक संकीर्ण नौगम्य भाग होता है जो बड़े सागरों को जोड़ने का काम करता है। सामान्यतः यह चैनल के रूप में भी इंगित होता है जो दो बड़े भूखंड के बीच नौ परिवहन होता है। लेकिन छिछला ,संकीर्ण व कई स्थानों पर छोटे-छोटे द्वीप स्थित होने के कारण बड़े पैमाने पर नौ परिवहन उन जलसंधियों में नहीं हो पता है। जैसे-जिब्राल्टर जलसन्धि(अटलांटिक व भूमध्य सागर के बीच) तथा बेरिंग जलसन्धि (आर्कटिक व प्रशांत महासागर के बीच) इसका एक अच्छा उदाहरण है।

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6. खाड़ी: किसी विशाल भूखंड में सागर का घुसा हुआ वह भाग जो तीन ओर से स्थल से घिरा हो यानी वह निवेशिक जिसके तीन ओर वृहद तट रेखा पायी जाती हो खाड़ी कहलाता है। खाड़ी के किनारो पर कई बंदरगाह स्थित होते है जो व्यापर की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते है। इसका निर्माण धरातल के ऊपरी भाग के विभंजन या तटीय भूमि पर सागर का अतिक्रमण करने से होता है।सामान्यतः गहरी खाड़ी को'गल्फ' व बड़े आकर वाले को 'बे' कहा जाता है।

7. अंतरीप: किसी मुख्य भूखंड का वह भूमि जो सागर,नदी या झील में अंदर तक घुसा हो,तथा तीन ओर पानी से घिरा हो अंतरीप कहलाता है।जैसे-कप ऑफ गुड होप जो दक्षिण अफ्रीका के विशाल भूखंड का हिस्सा है।केप हेट रस जो यू एस ए के कैरोलिना राज्य में स्थित है।अधिकांस भूगोलवेत्ता का मनना है कि अंतरीप प्रायद्वीप से छोटा होता है।अंतरीप नुकीला होता है जो विशाल जलराशि में समाविष्ट होता है।जबकि प्रायद्वीप बहुत बड़ा होता है, जो मुख्य भूमि से ज्यादा जुड़ा होता है।

8. स्थलाकृति: इसमे पृथ्वी व अन्य ग्रहों के धरातलीय आकृति का अध्ययन किया जाता है। मूल रूप से स्थलाकृति मानचित्रों पर धरातल की प्राकृतिक विशेषता का अध्ययन किया जाता है।

9. उच्चावच: भूगोल में उच्चावच का अभिप्राय है धरातल पर की उच्चतम व निम्नतम आकृति वाले क्षेत्र। जैसे:-पर्वत,पहाड़,पठार, मैदान व घाटी।

10. पूर्ण स्थान: धरातल पर का वह स्थान जिसका निर्धारण अक्षांस व देशान्तर निर्देशांक द्वारा निर्धारित होता हो।

11. जलवृत: भूमिगत जलकूप जहाँ जलयुक्त शैल परत से जल रिसकर जमा होता जलवृत कहलाता है।

12. द्वीप समूह: एक समान विशेषता वाले द्वीपों का समूह जो माला के रूप में आबद्ध हो उसे द्वीप समूह कहते हैं.

13. प्रवाल वलय: प्रवालों से निर्मित वह भित्ति जो घोड़े के नाल के समान या मुद्रिका के जैसी हो जिसका विकास किसी पिंड के चारो ओर होता है तथा अंदर लैगून पाया जाता है।

14. जीवमंडल: पादप व जीव जहाँ एक साथ निवास करते है और पारस्परिक क्रियाकलाप सम्पादित करते है।

15. ज्वालामुखी कुंड: ज्वालामुखी विवर (क्रेटर)के बड़े आकर को ज्वालामुखी कुंड कहा जाता है। इसका निर्माण पर्वतों के चोटियों के ज्वालामुखी उदगार के बाद होता है। जैसे:-यू एस ए के ओरेगन राज्य का क्रेटर झील व इंडोनेशिया का तोबा झील।

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16. मानारेख: मानचित्र का चित्रात्मक निरूपण जिसमें वर्तमान आकड़ों का उपयोग किया हो।सामान्य मानारेख में विश्व के देश, उनके आकर व जनसंख्या वितरण दर्शाया जाता है।

17. मानचित्र कला: मानचित्र निर्माण की वह कला या विज्ञान जिसमें सटीक रूप से चीजों का प्रदर्शन किया जाता है।

18. जनगणना: एक निर्धारित समय सीमा के अंदर कुल जनसंख्या का आंकड़ा उपस्थित करना या किसी निश्चित समय पर किसी निर्धारित भौगोलिक प्रदेश में व्यक्तियों की सरकारी गणना।

19. महाद्वीपीय प्रवाह: प्रवाह सिद्धांत के अनुसार महाद्वीपों का वर्तमान स्थिति विशाल भूखंडों के प्रवाह के परिणामस्वरूप प्राप्त हुआ है।इस सिद्धांत के प्रतिपादक टेलर है।

20. महाद्वीपीय मग्नतट: महाद्वीपों के किनारे का वह भाग जिस पर सागर का अतिक्रमण हुआ हो।सागरीय जल के पीछे हटने पर ये दृष्टिगोचर हो जाते है।

21. जननांकिकी: जनसंख्या का सांख्यिकी अध्ययन जिसमे जन्म,मृत्यु आदि को सम्मिलित किया जाता है।

22. घनत्व: प्रति इकाई क्षेत्र पर किसी चीज की मात्रा या उसकी गहनता की माप ।जनसंख्या घनत्व व फसल घनत्व इसका उदाहरण है।

23. मरुस्थल: वैसा क्षेत्र जहाँ वर्षा की मात्रा न्यूनतम होती है।नमी के आभाव में वनस्पति का विकाश नहीं होता है।केवल छोटे-छोटे घास व झाड़ियाँ ही होती है।

24. पारिस्थिकी: जीव व पर्यावरण के बीच के अंतरसंबंध को पारिस्थिकी कहा जाता है।

25. एलनिनो दक्षिणी दोलन: सागरीय जल की कालावधि  जिसमें पूर्वी प्रशांत महासागर प्रभावित होता है तथा सम्पूर्ण विश्व के मौसम को प्रभावित करता है।

26. अधिकेंद्र: धरातल का वह क्षेत्र जहाँ भूकंपीय तरंगे पहली बार धक्का देती है अघिकेंद्र कहलाता है।

27. विषुवत रेखा: वह काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी को दो बराबर भागों में बांटती है उतरी व दक्षिणी गोलार्द्ध में,विषुवत रेखा कहलाती है।इसका मान शून्य डिग्री होता है।

28. विषुब: जब सूर्य की स्थिति  विषुवत रेखा के लम्बवत होती है तो पुरे विश्व में दिन व रात बराबर होती है।एक वर्ष में दो विषुब 21मार्च व 23 सितंबर होता है।

29. अपरदन: धरातल पर लगने वाला बहिर्जात बल जिससे कटाव का काम होता है।इसके करक हिमानी, जल,वायु आदि।

30. एश्च्युरि: किसी नदी का समुद्र के साथ विशाल मिलान जहाँ खरा ज्वारीय पानी नदी मीठे जल से मिश्रीत होता है।

31. भ्रंश: भूखंडों में गति व स्थानांतरण के कारण चट्टानों में जो दरार हो जाता है भ्रंश कहलाता है।

32. भवैज्ञानिक काल: पृथ्वी के जन्म(4.6 बिलियन वर्ष)से वर्तमान तक का कैलेण्डर।यह महाकल्प,युग व काल में विभाजित है।

33. भूविज्ञान: इसके अंतर्गत पृथ्वी के क्रस्ट,संस्तर व चट्टानों आदि का अध्यन किया जाता है।

34. हिमानी: बर्फ की वह बड़ी राशि जो स्थल पर प्रवाहित होती है तथा सतह का अपरदन व परिवहन का काम करती है।

35. ग्लोबल पोजिसनिंग सिस्टम: उपग्रह की वह प्रणाली जो धरातल की किसी स्थान की सटीक जानकारी उपलब्ध कराता है।

36. वैश्विकतापन:  वायुमंडल में तापमान वृद्धि को वैश्विकतापन कहा जाता है। इसके वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्र में निरंतर वृद्धि है।

37. ग्लोब: ग्लोब, पृथ्वी का नमूना है जिसपर विश्व का मानचित्र अंकित होता है। इसे पार्थिव ग्लोब भी कहा जाता है।

38. हरितगृह प्रभाव: वायुमंडल में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड बहिर्गामी पार्थिव विकिरण को पुनः धरातल पर वापस कर देती जिससे वातावरण गर्म हो जाता है इस घटना को हरितगृह प्रभाव कहा जाता है।

39. गोलार्द्ध : काल्पनिक रूप से पृथ्वी को चार भागों में बांटा गया है।उत्तरी व दक्षणि गोलार्द्ध को विषुवत रेखा तथा पूर्वी व पश्चमी गोलार्द्ध को प्रधान मध्यान रेखा बांटती है।

40. आद्रता: वातावरण में मौजूद जलवाष्प की मात्रा को आद्रता कहते है।

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41. हरिकेन: उष्णकटिबंधीय तूफान जो 74 मील प्रति घंटा (119 किलोमीटर/घंटा) से चलता हो, जिसे प्रशांत महासागर में हरिकेन,हिंद महासागर में टाइफून व चक्रवात कहा जाता है।

42. जलचक्र: जलीय परिसंचरण द्वारा निर्मित एक चक्र जो जल सागर से वायुमंडल,भूमि और फिर पुनः सागर में पहुँच जाता है जलचक्र कहलाता है।

43. अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा: पृथ्वी पर 180 डिग्री खिंची वह काल्पनिक रेखा जिसके पूरब या पश्चिम जाने पर दिन में वृद्धि या कमी होती है।

44. जेटस्ट्रीम: क्षोभसीमा में तेज गति से चलने वाली वायु जिसकी दिशा पश्चिम से पूर्व होती है जेटस्ट्रीम कहलाता है।

45. ला नीना: प्रशांत महासागर में जल को ठंडा होने का क्रम जिससे पुरे विश्व का मौसम प्रतिरूप प्रभावित होता है।

46. लैगून : छोटा व छिछला जलराशि क्षेत्र जो प्रवाल व द्वीप के बीच स्थित होता है या वह छोटा जलक्षेत्र जो चरों ओर एटॉल से घिरा हो।

47. अक्षांस: विषुवत रेखा को आधार मानकर खिंची गई कोणात्मक रेखा जो शून्य डिग्री के सामानांतर होता है।जिसमे दोनों ध्रुब का मान 90 डिग्री होता है।

48. लावा: ज्वालामुखी उद्गार के समय जो पृथ्वी के अंदर से तरल पदार्थ निकलता है उसे लावा कहते है।

49. लोकभाषा: विविध भाषा की आपसी बोल-चाल की मिश्रीत भाषा या आपस में एक दूसरे को समझने की प्रणाली।

50. स्थलमंडल: मृदा और चट्टान का सम्मिलित रूप स्थलमंडल कहलाता है।

51. देशान्तर: प्रधान मध्यान रेखा से कोणात्मक दूरी पर खिंची गई रेखा जो दोनों ध्रुवों से होकर गुजरती है।

52. मैग्मा: पृथ्वी के गहराई में अत्यधिक ताप के कारण चट्टान पिघल जाती है जो ज्वालामुखी उद्गार के दरम्यान बहार आता है। बहार आने पर लावा व अंदर मैग्मा कहलाता है।

53. मानचित्र: पृथ्वी के सतह का ग्राफीय प्रस्तुतिकरण मानचित्र कहलाता है।

54. मानचित्र प्रक्षेप: गणितीय विधि से धरातल के वक्र स्थान को मानचित्र पर समतल कर प्रस्तुत करना।

55. मानचित्र मापनी: धरातल पर किन्हीं दो स्थानों की बीच की दूरी को मानचित्र पर उन्हीं स्थानों की बीच की दूरी को प्रदर्शित करना।

56. बृहद नगर: एक बृहद नगरीय क्षेत्र  जिसका  उद्भव बाहरी विस्तार अनेक नगरों के भौतिक रूप से परस्पर मिल जाने के फलस्वरूप होता है। मेगालोपोलिस को एक विशाल सन्नगर भी कहा जाता है।

57. याम्योत्तर रेखा: देशान्तर रेखा को याम्योत्तर रेखा कहा जाता है।

58. मेसा: बृहद आकर का समतल ऊँचा चबूतरा जिसका किनारा तीव्र ढाल वाला हो कालांतर में कटाव द्वारा बुटी में बदल जाता है।

59. मौसम विज्ञान: वायुमंडल का वैज्ञानिक अध्ययन मौसम विज्ञान कहलाता है।

60. मॉनसून: पवन का वह प्रतिरूप जो दक्षिण-पूर्व एशिया में मौसमिक परिवर्तन लाता है।यह नम व शुष्क मौसम के लिए जिम्मेदार होता है।

61. आकारिकी: किसी प्रदेश के भूआकृतिक तथ्यों के बहरी स्वरूप का आकृति व आकर का वैज्ञानिक अध्ययन।

62. पैंजिया: कार्बोनिफेरस कालीन विशाल महाद्वीप जिससे वर्त्तमान महाद्वीप निर्मित है। पैंजिया नाम जर्मन वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगनर ने दिया ।

63. स्थायी तुषार भूमि: मृदा में स्थायी रूप से पानी का तुषार के रूप में सम्मिलित रहना।

64. भौतिक भूगोल: भौतिक की वह शाखा जो पृथ्वी की प्राकृतिक विशेषताओं का अध्ययन करता है।

65. प्लेट विवर्तनीकी: हमारी पृथ्वी कई बड़े प्लेटों से मिलकर बना है जो कि धीमे गति से ग्रहों से परिक्रमा कर रहा है।प्लेटों का मिलना व अलग होना कई घटनाओं को जन्म देता है जैसे-भूकंप,ज्वालामुखी, पर्वत निर्माण आदि।

66. वर्षण: जल के विविध रूपों में वायुमंडल से धरातल पर गिरना।जैसे-वर्षा,हिम, तुषार,सहिम वृष्टि आदि।

67. प्रथम नगर/प्रमुख नगर: किसी प्रदेश का बृहतम नगर जो सामान्यतः आर्थिक,सामजिक,सांस्कृतिक,राजनीतिक व व्यापारिक क्रियाओं का केंद्र होता है।

68. स्थलसंधि: दो विशाल भूखंड को जोड़ने वाला संकीर्ण स्थल मार्ग जो दो सागरों को अलग करता है स्थलसंधि कहलाता है।विश्व के दो प्रमुख स्थलसंधि पनामा जो उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका को जोड़ता है।तथा स्वेज स्थलसंधि जो एशिया व अफ्रीका को जोड़ता है।

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Image source: www.clearias.com