मेक इन इंडिया की तर्ज पर बिहार की मधेपुरा इलेक्ट्रिक फैक्ट्री ने देश का पहला 12000 हार्स पावर वाला रेल इंजन बना लिया है। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा जिनके पास 12000 हार्स पावर या उससे ज्यादा क्षमता वाले इंजन हैं। स्वदेश में 1200 हॉर्स पावर का इंजन बनाने वाले देशों लिस्ट में भारत 6वां देश बन गया है। सोमवार को ये इंजन भारतीय रेलवे द्वारा पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से संचालित किया गया।
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क्या खास है इस इंजन में?
12000 हॉर्स पावर वाले इस का नाम WAH12 है और इसका नंबर 60027 है। ये इंजन अत्याधुनिक आईजीबीटी आधारित, 3-फेज ड्राइव और 12000 हॉर्स पावर के इलेक्ट्रिक इंजन हैं। यह इंजन 706 केएन के अधिकतम संकर्षण के लिए सक्षम है, जो 150 में 1 की ढाल में 6000 टन ट्रेन का संचालन शुरू करने और चलाने में सक्षम है।
22.5 टन के एक्सल लोड के ट्विन बो-बो डिजाइन वाले इंजन को 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 25 टन तक अपग्रेड किया जा सकता है। यह इंजन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए कोयला रेलगाड़ियों की आवाजाही के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। इसमें लगे हुए सॉफ्टवेयर और एंटीना के माध्यम से इसके रणनीतिक उपयोग के लिए इंजन पर जीपीएस के जरिए नजर रखी जा सकती है। माइक्रोवेव लिंक के माध्यम से जमीन पर सर्वर के जरिए एंटीना उठाया जाता है।
इतना ही नहीं ये इंजन ओएचई लाइनों वाली रेलवे पटरियों के साथ-साथ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर भी परिचालन करने में सक्षम है। इस इंजन के दोनों ओर वातानुकूलित ड्राइवर कैब हैं। 12000 हॉर्स पावर वाला ये इंजन पुनरुत्पादक ब्रेकिंग सिस्टम से लैस है। इस फीचर की मदद से इंजन के परिचालन के दौरान पर्याप्त ऊर्जा की बचत होगी। इसके साथ-साथ यह इंजन फॉग वाचिंग डिवाइस से लैस है जिससे कोहरे में भी रफ्तार कम नहीं होगी।
12000 हॉर्स पावर वाले इस इंजन के क्या फायदे हैं?
अगले 11 सालों में मधेपुरा फैक्ट्री तकरीबन 800 इंजन बना कर तैयार कर लेगी। 12000 हॉर्स पावर वाले ये इंजन दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंजनों में से एक हैं जो आगे आने वाले समय में मालगाड़ियों की गति बढ़ाने में मदद करेंगे। इन इंजनों के उपयोग के बाद भारी मालगाड़ियों की आवाजाही में तेज़ी आएगी। इस तरह मालगाड़ियों की गति को बढ़ाकर सबसे ज़्यादा इस्तेमाल में आने वाली पटरियों पर भीड़ कम करने में मदद मिलेगी। यह इंजन 100 किमी प्रति घंटे की स्पीड मालगाड़ी को खींच सकेगा।
मेक इन इंडिया की तर्ज पर 10 अप्रैल 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना का उद्धाटन किया था। पूरे इंजन को डिजाइन करने में 4 से 6 महीने लगे और तमाम मुश्किलों और कोविड-19 महामारी के बावजूद सफलता प्राप्त कर इस इंजन को पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से संचालित कर शिवपुर तक वाणिज्यिक दौड़ लगाई।
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