चीन का Chang'e 4: चांद की दूसरी सतह पर पहुंचने वाला विश्व का पहला spacecraft

चीन के चांग'ई 4 मिशन को दिसंबर 2018 में चंद्रमा के पिछली तरफ या दूसरी सतह पर लॉन्च किया गया था और इस मिशन को एक ऐतिहासिक सफलता भी मिली. चंग'ई 4 अंतरिक्ष यान चांद के पिछली तरफ उतरने वाला दुनिया का पहला अंतरिक्ष यान बन गया है. आइए इस लेख के माध्यम से चंग'ई 4 अंतरिक्ष यान के बारे में, क्यों और कैसे इसे चंद्रमा के दूसरी ओर भेजा गया, क्यों चंद्रमा का पिछला हिस्सा पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है, अब तक कितने मून मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं इत्यादि.
Jan 7, 2019 18:03 IST

    जैसा कि हम जानते हैं कि चांद पर कई वर्षों से रिसर्च की जा रही है. पहली बार मानव जाती ने 1968 में चंद्रमा के पिछले हिस्से पर रिसर्च करना शुरू किया था. इस आधुनिक युग में जिस प्रकार से नई तकनीकों का अविष्कार हो रहा है, नए चमत्कार या खोज देखने को मिल रहे हैं. उसी प्रकार से चीन ने भी एक और चमत्कार कर दिखाया है.

    चीन वैसे भी अपने उपकरण और तकनीक के लिए जाना जाता है. क्या आप जानते हैं कि हाल ही में चीन ने चंद्रमा के पिछले हिस्से यानी वो चांद का हिस्सा जो धरती से नज़र नहीं आता है, पर अपना स्पेसक्राफ्ट चांग‘ई 4 (Chang’e 4) को उतारा है. पहली बार चांद के इस हिस्से पर किसी स्पेसक्राफ्ट ने लैंडिंग की है.

    यहीं आपको बता दें कि अब तक चांद पर अमेरिका, रूस और चीन ही अपना स्पेसक्राफ्ट उतार सके हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-1 को चंद्रमा की परिक्रमा करने के लिए भेजा था लेकिन चांद की सतह पर उतारा नहीं गया था.

    आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं कि चीन के स्पेसक्राफ्ट चांग‘ई 4 की क्या खासियत है, इसने चांद के पिछले हिस्से के बारे में क्या जानकारी दी, चंद्रमा का पिछला हिस्सा आखिर नज़र क्यों नहीं आता है, अब तक कितने मून मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं इत्यादि.

    चांग‘ई 4 स्पेसक्राफ्ट के बारे में

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    Source: www. financialexpress.com

    चीन ने चांग‘ई 4 स्पेसक्राफ्ट को 8 दिसंबर को शियांग सैटलाइट लॉन्च सेंटर से मार्च 3बी रॉकेट की मदद से लॉन्च किया था. चांग‘ई 4 अपने साथ एक रोवर (स्पेस स एक्सप्लोरेशन वीइकल) भी लेकर गया है. यह लो फ्रिक्वेंसी रेडियो एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेशन की मदद से चांद के पिछले हिस्से की सतह की संरचना और मौजूद खनिजों के बारे में पता लगाएगा. इसके साथ ही यह रोवर पृथ्वी से चंद्रमा की पिछली सतह पर पहुंचने वाला विश्व का पहला यान बन गया है.
    यान दक्षिण ध्रुव ऐटकेन बेसिन में वोन कारमन क्रेटर (Von Kármán crater within the Aitken basin) में उतरा. यह हिस्सा चंद्रमा का सबसे बड़ा, सबसे गहरा और सबसे पुराना है. लैंडर ने मॉनिटर कैमरे से लैंडिंग स्थल की एक तस्वीर भेजी. यह चंद्रमा के पिछले हिस्से से ली गई पहली तस्वीर हैं.

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    चंद्र अभियान चांग‘ई-4 का नाम चीनी पौराणिक कथाओं की चंद्रमा देवी के नाम पर रखा गया है. सरकारी संवाद समिति शिंहुआ के अनुसार चांग‘ई-4 मिशन चंद्रमा के रहस्यमयी पक्ष का पता लगाने में अहम भूमिका निभाएगा.
    इसमें कोई संदेह नहीं है कि चंद्रमा का आगे वाला हिस्सा धरती के हमेशा सम्मुख रहता है, कई यहां पर समतल क्षेत्र हैं और इस पर यान को उतारना आसान होता है, लेकिन इसकी दूसरी सतह पर जो धरती से दिखती नहीं है, पहाड़ी और उबड़-खाबड़ है वहा उतारना अपने में एक उपलब्धि है.

    अब सवाल यह उठता है कि आखिर चांद का पिछला हिस्सा दिखाई क्यों नहीं देता है?

    पृथ्वी से चांद का एक ही हिस्सा नज़र आता है क्योंकि जिस गति से चांद धरती का चक्कर लगाता है उसी गति से वह अपनी धुरी पर भी घूमता है. ऐसे में उसका दूसरा हिस्सा कभी भी धरती के सामने नहीं आ पाता है.

    पृथ्वी से नजर नहीं आने की वजह से चांद के दूसरे हिस्से पर मौजूद एयरक्राफ्ट से सीधे संपर्क हो पाना नामुमकिन है. ऐसे में चांग‘ई-4 से संपर्क स्थापित करने के लिए एक सैटेलाइट मई में ही लॉन्च् कर दिया गया था.

    साथ ही आपको बता दें कि इस मिशन के तहत चांद के अंधेरे हिस्से की भू-संरचनाओं और घाटियों का अध्ययन किया जाएगा. वहां मौजूदा खनिजों का पता लगाया जाएगा. इस हिस्से पर बर्फ के रूप में पानी जमा है इसलिए इसे इंसान के बसने के लिए आदर्श माना जाता है.

    आइये अब अन्य मून मिशनों के बारे में अध्ययन करते हैं

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    Source: www. en.wikipedia.org.com

    सोवियत संघ ने 1959 में पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में पहला उपग्रह भेजने के दो साल बाद लूना 2 (Luna 2) को लॉन्च किया था. लूना 2 beachball-shape का था, इसमें spiky antennas थे और इसका वजन 390 पाउंड था. इस अंतरिक्ष यान में कई उपकरणों को रखा गया था जो कि चांद के चारों ओर विकिरण के वातावरण (radiation environment around the moon) को मापने के लिए इस्तेमाल किए गए थे. अचानक से लूना 2 के सिग्नल रुक गए थे और यह चांद में फिसल कर टुकड़े-टुकड़े हो गया था. इस प्रकार लूना 2 चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन गया.

    1962 में नासा ने अपना पहला अंतरिक्ष यान रेंजर 4 चंद्रमा पर भेजा था. दुर्भाग्य से रेंजर 4 चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक डेटा को भेजने में असमर्थ रहा.

    दो साल बाद, रेंजर 7 को लॉन्च किया गया इससे पहले कि यह सतह पर धराशायी हो जाता इसने चांद की 17 मिनट में 4,000 से अधिक तस्वीरें भेजी. यहीं आपको बता दें कि सभी रेंजर मिशनों में विशेषकर रेंजर 9 की छवियों से पता चला कि चंद्रमा की सतह खुरदरी है.

    1966 में सोवियत अंतरिक्ष यान लूना 9 ने चंद्रमा की स्थलाकृतिक बाधाओं को पार कर लिया और उसकी सतह पर सुरक्षित रूप से पहुँचने वाला पहला यान बन गया. लूना 10 इसके एक वर्ष बाद लॉन्च किया गया और चंद्रमा की सफलतापूर्वक परिक्रमा करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन गया.

    सर्वेयर स्पेस प्रोब (1966-68) चंद्रमा की सतह पर नियंत्रित लैंडिंग करने वाला पहला नासा स्पेसक्राफ्ट था. सर्वेयर ने चंद्रमा की सतह के भूभाग का पता लगाया और साथ ही मिट्टी के नमूनों के चित्र भेजें, जिससे चंद्रमा में चट्टान और वहां की मिट्टी की प्रकृति का विश्लेषण किया जा सका.

    20 जुलाई, 1969 को, नील आर्मस्ट्रांग और एडविन "बज़" एल्ड्रिन चांद पर पहुंचने वाले पहले लोग बने जब उनके अपोलो 11 चंद्र लैंडर ने ट्राईक्विलिटी के सागर को छुआ था. 1972 में अपोलो परियोजना समाप्त होने से पहले, पांच अन्य मिशनों और एक दर्जन लोगों ने चंद्रमा का दौरा किया गया था.

    लेकिन 1994 में नासा ने फिर से चंद्रमा पर ध्यान केंद्रित किया. क्लेमेंटाइन मिशन (Clementine mission) पराबैंगनी से अवरक्त तक दृश्यमान प्रकाश के अलावा अन्य तरंग दैर्ध्य में चंद्रमा की सतह को मैप करने में सफल रहा.

    बाद में, लूनर प्रोस्पेक्टर (1999) (Lunar Prospector) ने चंद्र ध्रुवों पर बर्फ के संभावित सबूतों की तलाश में चंद्रमा की परिक्रमा की. इस प्रकार से कई मिशनों को चांद पर लॉन्च किया गया.

    चीन लगातार मून मिशनों को लॉन्च करता रहा है और देखा जाए तो 2018 में, चीन ने किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक रॉकेट लॉन्च किए और अब चांग’ई 4 को चांद की पिछली सतह पर लॉन्च करने वाला पहला देश बन गया है. चीन 2030 तक astronauts  को भी चंद्रमा पर उतारना चाहता है.

    तो अब आप जान गए होंगे कि चीन ने चांग’ई 4 नामक स्पेसक्राफ्ट को चाँद के पिछली सतह पर भेज कर एक नया इतिहास रच दिया है.

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