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इसरो द्वारा एक साथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर रिकॉर्ड बनाने की तैयारी

अब तक इसरो द्वारा एक बार में अधिकतम 20 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया है| यह प्रक्षेपण 22 जून, 2016 को “ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान” PSLV-C34 के द्वारा किया गया था| लेकिन अब इसरो 15 फरवरी 2017 को एकसाथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर इतिहास रचने जा रहा है| यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केन्द्र से “ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV)” के द्वारा किया जाएगा| इस लेख में हम इसरो द्वारा प्रक्षेपित किए जाने वाले विभिन्न उपग्रहों का विवरण दे रहे हैं|
Feb 14, 2017 19:19 IST
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क्या आप जानते हैं कि अब तक इसरो द्वारा एक बार में अधिकतम 20 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया है| यह प्रक्षेपण 22 जून, 2016 को “ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान” PSLV-C34 के द्वारा किया गया था| लेकिन अब इसरो 15 फरवरी 2017 को एकसाथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर इतिहास रचने जा रहा है| यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केन्द्र से “ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV)” के द्वारा किया जाएगा| इस प्रक्षेपण के माध्यम से भारत पहली बार “शुक्र ग्रह” पर अपना अंतरिक्षयान भेज रहा है| विश्व के किसी अन्य देश ने अब तक इस तरह की कोशिश नहीं की है|

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 Source: www.tvindialive.in.com

इस संदर्भ में पिछला विश्व रिकॉर्ड रूस द्वारा बनाया गया था जब उसने एक संशोधित “अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल” के माध्यम से एक साथ 37 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया था| इसके अलावा अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी एक साथ 29 उपग्रहों को प्रक्षेपित किया था|

104 उपग्रहों के प्रक्षेपण मिशन के तहत 664 किलोग्राम के कुल वजन वाले 103 उपग्रहों के साथ-साथ पृथ्वी का अवलोकन करने के लिए 714 किलोग्राम वजन वाले कार्टोसैट-2 उपग्रह को भी प्रक्षेपित करने की योजना है| इन उपग्रहों को 505 किलोमीटर की दूरी पर “सूर्य के समकालिक कक्षा (SSO)” में प्रक्षेपित किया जाएगा। यह “एक्स्ट्रा लार्ज विन्यास” (XL configuration) के तहत 16वीं और PSLV की 39वीं उड़ान है।

 Sun Synchronous Orbit SSO

इन उपग्रहों के समूह में 101 छोटे उपग्रह शामिल हैं जिनमें से 2 भारत के, एक इसराइल, एक कजाकिस्तान, एक नीदरलैंड, एक स्विट्जरलैंड, एक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और 96 संयुक्त राज्य अमेरिका के उपग्रह हैं| PSLV-C37 के माध्यम से प्रक्षेपित होने वाले सभी उपग्रहों का कुल वजन 1378 किलोग्राम है और इस प्रक्षेपण मिशन के माध्यम से 101 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण इसरो और उसके व्यावसायिक शाखा “एंट्रिक्स” के बीच हुए एक वाणिज्यिक समझौते के तहत किया जा रहा है।

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इस मिशन के तहत प्रक्षेपित होने वाले उपग्रहों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:

कार्टोसेट-2D

Cartosat 2D

कार्टोसेट-2D प्रक्षेपण यान से अलग होने वाला पहला उपग्रह होगा और इसका वजन 714 किलोग्राम है| यह इस मिशन के माध्यम से प्रक्षेपित होने वाला सबसे भारी उपग्रह है| इस उपग्रह को 505 किमी की दूरी पर “सूर्य के समकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO)” में स्थापित किया जाएगा। कार्टोसेट-2D पृथ्वी के अवलोकन के लिए प्रक्षेपित किए गए कार्टोसेट श्रृंखला का पांचवां उपग्रह है| इस श्रृंखला में शामिल पिछले उपग्रहों के नाम क्रमशः कार्टोसेट-2, कार्टोसेट-2A, कार्टोसेट-2B और कार्टोसेट-2C हैं| इस उपग्रह में स्वतः रूप से ईंधन की आपूर्ति के लिए लिथियम आयन बैटरी और दो सौर पैनल भी लगे हुए हैं| इस उपग्रह की परिचालन अवधि 5 साल निर्धारित की गई है|

यह उपग्रह पैन्क्रोमैटिक और मल्टीस्पेक्ट्रल चित्र खींचने वाले सेंसर से सुसज्जित है जिसका इस्तेमाल “भूमि सूचना प्रणाली (LIS)” और “भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS)” से संबंधित सूचनाएं प्राप्त करने के लिए किया जाएगा| इसके अलावा यह उपग्रह रिमोट सेंसिंग सेवाएं भी प्रदान करेगा|

कार्टोसेट-2D से प्राप्त चित्रों का उपयोग कार्टोग्राफिक अनुप्रयोगों, शहरी और ग्रामीण विकास योजनाओं, तटीय भूमि के उपयोग की निगरानी, उपयोगिता प्रबंधन जैसे- सड़क नेटवर्क की निगरानी, जल वितरण, मानचित्रण और भूमि के उपयोग, प्राकृतिक और मानव निर्मित सुविधाओं की पहचान एवं परिवर्तन का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

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आईएनएस-1A

INS 1A

Source: www.space.skyrocket.de.com

यह इसरो का एक नैनो उपग्रह है जो क्यूबसैट मानक अवधारणा प्रणाली पर आधारित है और इसकी परिचालन अवधि केवल छह महीने निर्धारित की गई है| इस प्रणाली का उपयोग भविष्य के प्रयोगों, छात्रों द्वारा निर्मित उपग्रहों के प्रक्षेपण और प्रौद्योगिकी से संबंधित अंतरिक्ष उपकरणों के प्रदर्शन का विवरण देने के लिए किया जा सकता है। इस उपग्रह का वजन 8.4 किलोग्राम है और इसमें विज्ञान से संबंधित दो अंतरिक्ष उपकरण जुड़े हुए हैं|

अहमदाबाद स्थित “अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC)” के द्वारा “सरफेस बाई डाइरेक्ट्रल रिफ्लेक्टेन्स डिस्ट्रीब्यूशन फंक्शन रेडियोमीटर (Surface Bidirectional Reflectance Distribution Function Radiometer (SBR) की सुविधा प्रदान की जाती है जो विभिन्न अंतरिक्षीय सतह पर सूर्य के प्रकाश की राशि के असामान्य वितरण को मापता है| “अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC)” “सिंगल इवेंट अपसेट मॉनीटर Single Event Upset Monitor (SEUM) की भी सुविधा प्रदान करता है जो वाणिज्यिक एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर उच्च ऊर्जा वाले अंतरिक्षीय विकिरण के प्रभाव का अध्ययन करता है|

आईएनएस-1B

इसका वजन लगभग 9.7 किलोग्राम है जिसमें अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC) द्वारा प्रायोगिक अंतरिक्ष उपकरण लगाए गए हैं जो एक छोटे पैकेज का उपयोग करके पृथ्वी के उच्च विभेदन (resolution) वाले चित्र खींचने में सहायता प्रदान करेगा| इस उपग्रह में “पृथ्वी के बहिर्मंडलीय लीमन अल्फा विश्लेषक (Earth Exosphere Lymann Alpha Analyser (EELA))” लगा हुआ है जो पृथ्वी के बहिर्मंडल में स्थित लीमन-अल्फा पृष्ठभूमि प्रवाह वाले तटस्थ हाइड्रोजन परमाणु को रिकॉर्ड करेंगे| इस उपग्रह की परिचालन अवधि 6 महीने निर्धारित की गई है|  

फ्लॉक-3p

Flock 3p

Source: www.space.skyrocket.de.com

ग्रहीय प्रयोगशाला से 88 उपग्रहों को जोड़े में प्रक्षेपित किया जाएगा। यह भारत द्वारा पृथ्वी की चित्र खींचने के लिए भेजे जाने वाले 100 उपग्रहों के मिशन का हिस्सा है और शेष 12 उपग्रह को भी PSLV-C34 के द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा| इन उपग्रहों में शामिल फ्लॉक-3p उपग्रह द्वारा प्राप्त तस्वीरों को वाणिज्यिक, मानवीय और पर्यावरणीय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा| इन उपग्रहों को 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर सूर्य के समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा|

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 पीईएएसएस (PEASS)

    PEASS                                           

Source: www. tnomediaprod.blob.core.windows.net.com

यह नीदरलैंड का एक नैनो उपग्रह है और इसका वजन लगभग 3 किलोग्राम है| यह एक “पीजो इलेक्ट्रिक स्मार्ट सैटेलाइट संरचना” है| यह उपग्रह अत्याधुनिक “स्मार्ट संरचनाओं”, जो संयुक्त पैनल, पीजोइलेक्ट्रिक सामग्री और नए सेंसर से युक्त होगा, उसका परीक्षण करेगा| इस उपग्रह का निर्माण यूरोपीय संघ द्वारा “डच अनुसंधान संस्थान TNO के नेतृत्व में किया गया है जो अंतरिक्ष से संबंधित नूतन जानकारियों की खोज करेंगे| यह उपग्रह भी PSLV के 88 उपग्रहों से मिल जाएगा और ग्रहीय प्रयोगशाला और एंट्रिक्स के बीच एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करेगा|

बीजीयू उपग्रह (BGUsat)

यह इजरायल का एक नैनो उपग्रह है और इसका वजन लगभग 4.3 किलोग्राम है| इस उपग्रह को “बेन गुरियन विश्वविद्यालय” के छात्रों के सहयोग से “इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज” द्वारा बनाया गया है| यह उपग्रह क्यूबसैट प्रणाली पर आधारित है और कैमरे, अंतरिक्षीय जीपीएस और ऑप्टिकल संचार प्रणाली से सुसज्जित है।

अल-फराबी-1

यह कजाकिस्तान का एक नैनो उपग्रह है और इसका वजन लगभग 1.7 किलोग्राम है| यह छात्रों द्वारा बनाया गया कजाकिस्तान का पहला उपग्रह है जिसे “अल-फराबी कजाख राष्ट्रीय विश्वविद्यालय” के छात्रों द्वारा बनाया गया है| इस उपग्रह में 3MP (Mega Pixal) सेंसर वाले अंतरिक्षीय उपकरण लगे हुए हैं और इसके चारों ओर सौर पैनल लगे हुए हैं। यह उपग्रह क्यूबसैट मानक पर आधारित है जो वायुमंडलीय विकिरण की माप करेगा|

नयिफ-1

यह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक नैनो उपग्रह है और इसका वजन लगभग 1.1 किलोग्राम है| इसे दुबई स्थित “मोहम्मद बिन राशिद अंतरिक्ष केन्द्र” और “अमेरिकी यूनिवर्सिटी ऑफ शारजाह (AUS)” द्वारा बनाया गया है| यह इस मिशन का सबसे छोटा और सबसे हल्का उपग्रह है| यह उपग्रह भी क्यूबसैट मानक पर आधारित है जो बड़ी मात्रा में पर्यावरण से संबंधित अंतरिक्षीय आंकड़ों को एकत्रित करेगा|

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