2022 तक भारत से प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने की क्या योजना है?

मानव ने प्लास्टिक का निर्माण अपनी सुविधा के लिए किया था परन्तु अब ये ही मानव जीवन के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी खतरा बन गया है. प्लास्टिक का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा महासागरों में फैला हुआ है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं कि 2022 तक किस प्रकार प्लास्टिक प्रदूष्ण को खत्म किया जा सकता है, इसके लिए क्या-क्या घोषणा की गई है.
Oct 3, 2018 17:48 IST
    How India will abolish single-use plastic by 2022?

    हम सब जानते हैं कि प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जो कभी खत्म नहीं होता है यानी हजारों सालों तक ज्यों का त्यों रहता है. विज्ञान की तरक्की के साथ प्लास्टिक का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि मानव ने प्लास्टिक का निर्माण अपनी सुविधा के लिए किया था परन्तु अब ये ही मानव जीवन के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी खतरा बन गया है. प्लास्टिक का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा महासागरों में फैला हुआ है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं कि 2022 तक किस प्रकार प्लास्टिक प्रदूष्ण को खत्म किया जा सकता है, इसके लिए क्या-क्या घोषणा की गई है.

    प्लास्टिक क्या है?

    प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जिसे विभिन्न आकारों में ढाला जा सकता है. प्लास्टिक शब्द यूनानी ‘प्लैतिकोस’ से बना है जिसका अर्थ है किसी भी आकार में ढाल देना. प्लास्टिक अच्छे प्रतिरोधी होते हैं क्योंकि बिजली का उनपर कोई प्रभाव नहीं होता है और पॉलीमर से बने होते हैं. 1856 में पहला मानव निर्मित प्लास्टिक ब्रिटिश रसायनज्ञ अलेक्जेंडर पाक्स द्वारा बनाया गया था. 1907 में आधुनिक प्लास्टिक बैकेलाइट का आविष्कार हुआ था.

    प्लास्टिक कितने प्रकार के होते हैं:

    प्राक्रतिक प्लास्टिक (Natural Plastic): वह प्लास्टिक है जो गर्म किए जाने पर मुलायम और ठंडा किए जाने पर कठोर हो जाती है. जैसे: लाख

    क्रत्रिम प्लास्टिक (Artificial Plastic): यह वह प्लास्टिक है जिसे रसायनिक तरीके से तैयार किया जाता है. यह दो प्रकार की होती है:

    थर्मो प्लास्टिक (Thermo Plastic) : इस तरह की प्लास्टिक गर्म करने पर मुलायम और ठंडा करने पर कठोर हो जाती है. कार्बनिक यौगिक के अंत में एक द्विबन्ध के कारण, उनके योगशील बहुलीकरण से थर्मोप्लास्टिक बनती है. जैसे पॉलीएथिलीन (Polyethylene), पॉली विनाइल क्लोराइड (PVC), पॉली स्टाइरीन (Polystyrene), नायलॉन (Nylon) टेफ्लॉन (Teflon) इत्यादि.

    थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (Thermosetting Plastics): इस तरह की प्लास्टिक को पहली बार गर्म करते समय मुलायम हो जाती है और फिर इसे इच्छित आकार में ढाल दिया जाता है. इसे फिर से गर्म करके मुलायम नहीं बनाया जा सकता है. जैसे वीटल (veetal), बैकेलाइट (Bakelite) इत्यादि.

    विश्व पर्यावरण दिवस 2018

    इस बार पर्यावरण दिवस पर भारत ने मेजबानी की थी. इस बार का थीम था "बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन". इसी अवसर पर भारत ने 2022 तक प्लास्टिक का सिंगल यूज को समाप्त करने की घोषणा की. देखा जाए तो यह डिस्पोजेबल प्लास्टिक के खिलाफ यह असाधारण और महत्वकांशी कार्यवाही है. इससे दुनिया में 130 करोड़ लोगों और व्यवसायों से प्लास्टिक प्रवाह को काफी हद तक रोका जा सकता है.

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    प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाए जा रहे हैं?

    पैन इंडिया द्वारा प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए सार्वजनिक स्थलो, राष्ट्रीय संपदाओ, जंगलों और समुद्री तटों पर साफ-सफाई के अभियान आरम्भ किये गए हैं. पूरे देश में लगभग 100 स्मारकों को भी शामिल किया गया है ताकि प्लास्टिक और कूड़े को हटाया जा सके. साथ ही पर्यटन मंत्रालय ने सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा होने वाले प्लास्टिक ढेर को समाप्त करने के लिए प्रण लिया. सभी राज्य अपनी तरफ से प्लास्टिक से हुए प्रदूषण को रोकने में लग गए हैं. कुछ पहल नगर पालिका, राज्य प्रशाशन और आम जनता द्वारा भी की जा रही है, प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए.

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    Source: www. recycleforwestsussex.org.com

    1. केरल में सरकारी कार्यालयों में पुनर्नवीनीकरण का उपयोग

    केरल के काई सरकारी कार्यालय प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने में अपने तरीके से योगदान दे रहे हैं. इन कर्मचारियों ने यहां पर प्लास्टिक की बोतलों और डिस्पोजेबल वाले चाय के कप का उपयोग करना बंद कर दिया है और स्टील के बर्तनों का उपयोग करना शुरू किया है. इस अभियान को सरकारी कार्यालयों के लिए सुचतवा मिशन और हरित केरल मिशन द्वारा बनाया गया था. इसका उद्देश्य सरकारी विभागों में स्वच्छ वातावरण को बनाना है.

    2. केरल में जल निकायों में से प्लास्टिक के कचरे को निकालना

    कई बार हम न्यूज़ में या अखबारों में पढ़ते हैं कि समुद्री जीवों के मृत्यु का कारण है उनके अंदर पाए जाने वाली प्लास्टिक. हैना हैरान करने वाली बात. फिर भी हम लोग अकसर प्लास्टिक के कचरे को नदियों, तालाबों या समुंद्र में फेक देते हैं. इस परिस्थिति को नियंत्रित करने के लिए, केरल के सुचतवा मिशन ने एक परियोजना को शुरू किया है. इसके तहत 28 मछुआरों को नंद्कारा बंदरगाह से मछलियों को पकड़ने के अलावा प्लास्टिक निकायों से प्लास्टिक कचरे को भी निकालने के लिए नियुक्त किया गया है. इस मिशन से सरकार 10 महीनों के अंदर 25 टन प्लास्टिक कचरे को बाहर निकालने में कामयाब रही है.

    3. सड़क निर्माण के लिए प्लास्टिक का उपयोग

    मदुरै में थियागजर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर राजगोपालन वासुदेवन के प्रशंसनीय प्रयासों के कारण, प्लास्टिक का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाता है. हम आपको बता दें कि केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु राज्यों ने इस अनूठी तकनीक पर काम करना शुरू कर दिया है.

    4. सिक्किम में प्लास्टिक उपयोग पर नियंत्रण किया गया है.

    प्लास्टिक बैग के उपयोग और बिक्री को सीमित करने में इसकी सफलता अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा है. क्या आप जानते हैं कि सिक्किम में लोगो को प्लास्टिक के इस्तेमाल करने पर जुर्माना ना लगाकर बल्कि उससे होने वाली बीमारियों के बारे में अवगत कराने पर सफलता मिली है. साथ ही 1998 में यह पहला ऐसा राज्य बना जिसने प्लास्टिक से बनी डिस्पोजेबल प्लास्टिक बैग और सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतलों पर प्रतिबंध लगाया.

    5. प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग

    प्लास्टिक को इतने समय में भारत में खत्म करना असंभव काम है. इसका विकल्प यह है कि प्लास्टिक का उपयोग पारिस्थितिक अनुकिल तरीके से किया जाए ताकि देश के डंपिंग ग्राउंड पर बोझ कम हो सके. प्लास्टिक का उपयोग कपड़ा उद्योग के लिए धागे और कपड़े बनाने, निर्माण सामग्री और कई अन्य बेहतर उद्देश्यों के निर्माण में किया जा रहा है.

    6. “अपशिष्ट की सह-प्रसंस्करण” की तकनीक का गुजरात को अपनाना ताकि प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सके.

    सह-प्रसंस्करण औद्योगिक प्रक्रियाओं में अपशिष्ट सामग्री का उपयोग करने या प्राथमिक ईंधन या कच्चे माल के लिए उन्हें प्रतिस्थापित करने की प्रक्रिया है. वापी में पेपर मिलों ने अपने प्लास्टिक उपज को एकत्र किया और फिर उन्हें सीमेंट भठ्ठी को जलाने के लिए इस्तेमाल किया. सीमेंट उत्पादन में खतरनाक अपशिष्ट का यह सह-प्रसंस्करण इसके निपटारे के लिए पर्यावरण अनुकूल मजबूत विधि है.  

    7. आंध्र प्रदेश राज्य ने स्केल-आउट प्रोग्राम शुरू किया है ताकि पारंपरिक सिंथेटिक रसायनिक क्रषि को शून्य-बजट प्राक्रतिक खेती में 6 मिलियन खेतों को बदला जा सके.

    8. "बीट प्लास्टिक प्रदूषण" अभियान की पूर्वी दिल्ली में शुरुआत ताकि प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके.

    सतत पर्यावरण और पारिस्थितिकी विकास सोसाइटी (सीईईडीएस) ने दिल्ली में छात्रों, बच्चों, शिक्षकों, माता-पिता और समुदायों के बीच सुरक्षित पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए पूर्वी दिल्ली के छह-स्कूलों में एक अभियान शुरू किया है जिसे "बीट प्लास्टिक प्रदूषण" नाम दिया गया है.

    9. केरल के मछुआरों ने महासागरों में फेकी हुई प्लास्टिक को अपने जाल की मदद से बाहर निकाल कर कडलममा में कई सरकारी एजेंसियों की मदद से पहली बार रीसाइक्लिंग सेंटर को स्थापित किया है. रीसाइक्लिंग के बाद इसको सड़कों के ऊपर उपयोग करने के लिए स्थानीय निर्माताओं को बेच दिया जाता है.

    वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम के अनुसार भारत में सालाना 56 लाख टन प्लास्टिक कूड़ा पैदा होता है. दुनिया भर में जितना कूड़ा सालाना समुद्र में डम्प किया जाता है उसका 60 प्रतिशत भारत डम्प करता है और भारतीय रोजाना 15000 टन प्लास्टिक कचरें में फेंक देते हैं. कोका-कोला, इनफोसिस और हिलटन जैसी और भी बड़ी-बड़ी कंपनियों ने प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की शपथ ली है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि री-यूज, री-साइकिल, रिड्यूस इन तीन तरीकों को अपनाकर प्लास्टिक प्रदूषण में भारी कमी लाई जा सकती है. भारत सरकार ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए प्लास्टिक केरी बैग्स पर पूरी तरह पहले से ही बैन लगा रखा है.

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