Bharat Bandh: सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ विभिन्न केंद्रीय ट्रे़ड यूनियनों और उनके सहयोगी गठबंधनों द्वारा 9 जुलाई, 2025 को देशभर में भारत बंद का आह्वान किया गया है। इसके तहत विभिन्न सेक्टरों में बड़ी संख्या में कार्यरत कर्मचारी हड़ताल के लिए तैयार हैं। हड़ताल में मुख्य रूप से विपक्षी दल व ग्रामीण आबादी के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, यह सवाल बनता है कि क्या भारत बंद संवैधानिक है या फिर यह असंवैधानिक है। जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
क्या होता है भारत बंद
भारत बंद एक प्रकार से हड़ताल का स्वरूप है। यह स्वरूप मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई देशों में अपनाया जाता है। इसके तहत विभिन्न सेक्टरों में कार्यरत कर्मचारी दिन में एक निश्चित अवधि के लिए काम न कर अपना विरोध जताते हैं। भारत में इस तरह के आयोजन मुख्य रूप से राजनीतिक सहयोग से किए जाते हैं।
क्या भारत बंद संवैधानिक है
देश में आयोजित होने वाली हड़ताल या बंद करने को कई बार संघ या यूनियन बनाने के मौलिक अधिकार यानि कि संविधान के अनुच्छेद 19(1) से जोड़ दिया जाता है। हालांकि, इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि हड़ताल कभी भी असंवैधानिक नहीं हो सकती है। विरोध करने का अधिकार एक मूल्यवान अधिकार है। ऐसे में इसे असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता है।
1961 में यह रहा था फैसला
साल 1961 में सुप्रीम कोर्ट ने कामेश्वर प्रसाद बनाम बिहार राज्य के मामले में यह स्पष्ट कहा था कि अनुच्छेद(1)(सी) की व्याख्या से यह पता चलेगा कि ट्रेड यूनियनों के पास हड़ताल करने का मौलिक अधिकार है। वहीं, अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ मामले में हड़ताल के साथ अनुच्छेद(19)(1) में दिए गए संघों के गठन के विचार को खारिज किया। कोर्ट ने यह भी कहा भी कहा था कि हड़ताल को मौलिक अधिकार नहीं कहा जा सकता है।
बीआर सिंह बनाम भारत संघ मामला
आपको बता दें कि बीआर सिंह व अन्य बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि हड़ताल एक मौलिक अधिकार नहीं है। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि सार्वजनिक व्यवस्था को बिना बाधित किए संघ बनाना एक अधिकार के रूप में हो सकता है।
पढ़ेंःकुछ नोटों पर नंबर के साथ क्यों छपा होता है (*), यहां जानें असली वजह
Comments
All Comments (0)
Join the conversation