भारत में किस मुगल शासक ने सबसे लंबे समय तक शासन किया है, जानें नाम
भारत में मुगलों ने 331 सालों तक राज किया है। इस दौरान मुगल काल में अलग-अलग शासक बदलते गए, जिन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार किया। हालांकि, कुछ शासक थोड़े समय के लिए शासन कर सके, जबकि कुछ शासकों ने बहुत लंबे समय तक शासन किया। इस लेख में हम भारत में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले मुगल शासक के बारे में जानेंगे।
भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां अलग-अलग सम्राज्यों का शासन देखने को मिलता है, जिसमें गुप्त और मौर्य काल से लेकर मराठा, मुगल और ब्रिटिश काल शामिल है। देश में मुगलों ने 331 सालों तक शासन किया।
साल 1526 से शुरू हुआ यह सफर 1857 में समाप्त हुआ। इस दौरान भारत में अलग-अलग मुगल शासक रहे, जिन्होंने अपने काल में साम्राज्य का विस्तार किया। इनमें कुछ शासक लंबे समय तक सत्ता में रहे, तो कुछ शासक कुछ ही समय में गद्दी से उतर गए। इस लेख में हम भारत में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले मुगल शासक के बारे में जानेंगे।
किस मुगल शासक ने सबसे लंबे समय तक किया शासन
भारत में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला मुगल शासक औरंगजेब है। औरंगजेब ने 1658 से 1707(49 वर्ष) तक शासन किया। उन्होंने न सिर्फ सबसे लंबे समय तक शासन किया, बल्कि मुगल साम्राज्य का सबसे अधिक विस्तार भी किया।
कैसे प्राप्त की सत्ता की गद्दी
औरंगजेब ने 1658 में धर्मत और सामूगढ़ के युद्धों में अपने भाई दारा शिकोह को हरा दिया था। वहीं, औरंगजेब ने अपने पिता यानि कि शाहजहां को आगरा के किले में कैद कर खुद को सम्राट घोषित कर दिया था। औरंगजेब का दो बार राज्याभिषेक हुआ था। पहला 1658 में हुआ, तो दूसरा 1659 में किया गया था।
कहां तक किया साम्राज्य का विस्तार
औरंगजेब ने अपने शासनकाल में पश्चिम में अफगानिस्तान और पूर्व में असम तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया। वहीं, औरंगजेब का सबसे बड़ा अभियान दक्षिण में रहा, जहां औरंगजेब द्वारा बीजापुर और गोलकुंडा को जीता गया था।
कब हुई औरंगजेब की मृत्यु
औरंगजेब की मृत्यु 3 मार्च, 1707 को हुई थी। उन्होंने 88 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। अपने अंतिम दिनों में वह उम्र संबंधी बीमारी व तनाव से जूझ रहे थे। औरंगजेब का मकबरा महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के पास खुल्दाबाद में है, जहां उन्हें एक ऊपर से खुली हुई कब्र में दफनाया गया है, जिसके ऊपर कोई छत नहीं है।
कैसे हुआ मुगल शासन का पतन
औरंगजेब ने करीब 25 वर्षों तक दक्षिण भारत में डेरा डाले रखा, जिससे मुगलिया खजाने पर असर पड़ा और उत्तर भारत में शक्ति कमजोर पड़ी। वहीं, औरंगजेब की धार्मिक नीतियों का भी विभिन्न समुदायों द्वारा विरोध किया गया। साथ ही, औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसका साम्राज्य बेटों में बांट दिया गया, जिससे गृहयुद्ध शुरू हुआ और केंद्रीय सत्ता कमजोर पड़ी।
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