प्रयागराज अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्व के कारण मेलों और उत्सवों का केंद्र रहा है। यहां कुंभ से लेकर अन्य प्रमुख मेले लगते हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आस्था के साथ पहुंचते हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि प्रयागराज में कुंभ के अलावा कौन-कौन-से मेलों का आयोजन किया जाता है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
कुंभ मेला (Kumbh Mela)
महत्व: कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है, जिसे यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया गया है।
स्थान: त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
आयोजन: हर 12 वर्ष में एक बार (आठवें वर्ष अर्धकुंभ और 144वें वर्ष महाकुंभ)
विशेषता: दुनिया भर से करोड़ों श्रद्धालु और साधु-संत यहां पवित्र स्नान के लिए आते हैं।
अर्धकुंभ मेला (Ardh Kumbh Mela)
महत्व: कुंभ मेले के ठीक छह साल बाद अर्धकुंभ का आयोजन होता है।
स्थान: त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
विशेषता: इसमें भी कुंभ की तरह स्नान, संतों का प्रवचन और भव्य आयोजन होते हैं।
पिछला आयोजन: 2019
माघ मेला (Magh Mela)
महत्त्व: इसे मिनी कुंभ भी कहा जाता है, जो माघ मास में संगम तट पर लगता है।
स्थान: त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
आयोजन: हर साल मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक (जनवरी-फरवरी)
विशेषता: कल्पवास करने वाले श्रद्धालु पूरे एक महीने तक यहां स्नान, ध्यान और सत्संग करते हैं।
कार्तिक मेला (Kartik Mela)
महत्त्व: यह दीपावली के बाद कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान के लिए आयोजित किया जाता है।
स्थान: संगम तट
विशेषता: इस दिन गंगा स्नान और दीपदान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
झूला मेला (Jhula Mela)
महत्त्व: यह भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के झूला उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
स्थान: बड़े हनुमान मंदिर, अलोपीबाग, दारागंज, श्रृंगवेरपुर
आयोजन: श्रावण मास (जुलाई-अगस्त)
विशेषता: इस मेले में भगवान को झूला झुलाने की परंपरा है, साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
-सुलेमसराय का ऊंट मेला (Sulemsarai Camel Fair)
महत्त्व: यह उत्तर भारत के प्रसिद्ध पशु मेलों में से एक है, जहां ऊंट, घोड़े और अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री होती है।
स्थान: सुलेमसराय, प्रयागराज
आयोजन: अक्टूबर-नवंबर
हनुमान जयंती मेला (Hanuman Jayanti Mela)
महत्त्व: यह भगवान हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
-स्थान: बड़े हनुमान मंदिर, संगम तट
-आयोजन: चैत्र पूर्णिमा
-विशेषता: इस मेले में हजारों श्रद्धालु दर्शन करने और हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाने आते हैं।
-नागवासुकी मेला (Nag Vasuki Mela)
-महत्त्व: नाग पंचमी के अवसर पर नागराज की पूजा की जाती है।स्थान: नागवासुकी मंदिर, दारागंज
-आयोजन: श्रावण मास
-विशेषता: यहां नागराज की विशेष पूजा होती है और हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
Comments
All Comments (0)
Join the conversation