Plasma Therapy: क्या है प्लाज्मा थेरेपी और कोविड-19 से उबरने में ये कितनी कारगर है?

आइए इस लेख में जानते हैं कि क्या है प्लाज्मा थेरेपी, कौन प्लाज्मा डोनेट कर सकता है और कोविड-19 से उबरने में ये कितनी कारगर है।
Created On: Apr 20, 2021 17:26 IST
Modified On: Apr 20, 2021 17:41 IST
Plasma Therapy
Plasma Therapy

भारत में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ने चारों ओर त्राहि-त्राहि मचा दी है। कोविड-19 संक्रमण के मामले हर दिन पुराना रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। ऐसे में इन दिनों प्लाज्मा थेरेपी चर्चा में है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी लोगों से प्लाज्मा डोनेट करने की अपील की है। लेकिन क्या आप प्लाज्मा थेरेपी के बारे में जानते हैं? आइए इस लेख में जानते हैं कि क्या है प्लाज्मा थेरेपी, कैसे काम करती है, कौन प्लाज्मा डोनेट कर सकता है और कोविड-19 से उबरने में ये कितनी कारगर है?

क्या होता है प्लाज्मा?

विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे रक्त में रेड बल्ड सेल्स, व्हाइट बल्ड सेल्स और पीला तरल भाग मौजूद होता है। रक्त में मौजूद पीले तरल भाग को ही प्लाज्मा कहते हैं। इसका 92 फीसदी भाग पानी होता है। प्लाज्मा में पानी के अलावा प्रोटीन, ग्लूकोस मिनरल, हार्मोंस, कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद होते हैं। हमारे रक्त में तकरीबन 55 प्रतिशत प्लाज्मा मौजूद होता है। 

प्लाज्मा थेरेपी क्या है?

'कायलसेंट प्लाज्मा थेरेपी' को आम भाषा में प्लाज्मा थेरेपी भी कहा जाता है। इस थेरेपी की मदद से कोविड-19 से संक्रमित मरीजों का इलाज किया जाता है। इसमें स्वस्थ्य व्यक्ति के शरीर से प्लाज्मा निकालकर संक्रमित व्यक्ति के शरीर में इंजेक्शन की मदद से इंजेक्ट किया जाता है। प्लाज्मा में बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ मौजूद होती हैं, जो रोगी को बीमारी से उबरने में मदद करती हैं। 

कैसे काम करती है प्लाज्मा थेरेपी?

जब एक कोविड-19 से ठीक हुए व्यक्ति का प्लाजमा संक्रमित व्यक्ति के शरीर में जाता है, तो प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडीज़ ठीक उसी तरह बीमारी से लड़ती हैं जैसे पहले लड़ी होती हैं। इससे संक्रमित व्यक्ति को बीमारी से उबरने में मदद मिलती है। 

क्या आप अपना प्लाजमा दान कर सकते हैं?

कोविड-19 महामारी के दौर में आप प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं, अगर आप नीचे दिए गए सभी मापदंडों में फिट बैठते हैं। 

1- कोविड-19 से संक्रमण से ठीक होने के तकरीबन दो हफ्ते बाद।

2- 18 से 60 वर्ष की आयु के बीच के व्यक्ति।

3- 50 कि.ग्रा. वजन होने के साथ-साथ किसी भी संक्रमण या अन्य बीमारियों से पीड़ित न हो।

4- हीमोग्लोबिन काउंट 8 से ऊपर हो।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूर्व में प्रेगनेन्ट महिलाएं, कैंसर, हाइपरटेंशन, ब्लड प्रेशर, हार्ट और किडनी से जुड़ी बीमारी वाले लोग प्लाज्मा दान नहीं कर सकते हैं।

प्लाज्मा दान करने के नियमों में बदलाव

प्लाज्मा की बढ़ती मांग के चलते प्लाज्मा डोनेट करने के नियमों में बदलाव किया गया है। पहले जो व्यक्ति बीते तीन महीनों में कोविड-19 से रिकवर हुआ होता था, वो प्लाज्मा डोनेट कर सकता था। लेकिन मौजूदा नियमों के मुताबिक, बीते 6 महीनों में कोविड-19 से रिकवर हुआ व्यक्ति भी अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। 

प्लाज्मा थेरेपी कोविड-19 को ठीक करने में कितनी कारगर है?

भारत में बढ़ते कोविड-19 के मामलों की वजह से प्लाज्मा थेरेपी की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि प्लाज्मा थेरेपी कोविड-19 के इलाज में ज़्यादा प्रभावी नहीं है और मृत्यु दर को कम करने में असमर्थ है। ICMR ने भी पिछले साल जारी की गई अपनी रिपोर्ट में कहा था कि प्लाज्मा थेरेपी COVID-19 से जुड़ी मौतों को कम करने में मदद नहीं करती और मृत्यु दर में कमी या गंभीर कोरोनोवायरस में प्रगति से जुड़ी नहीं है।

कुछ अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्लाज्मा थेरेपी को कोविड-19 के इलाज के लिए प्राथमिक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और केवल स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल दवाओं के साथ ही किया जाना चाहिए। ऐसे व्यक्ति जो पहले से ही वेंटिलेटर पर हैं या मल्टीआर्गन फेल हैं, उन्हें प्लाज्मा थेरेपी से कोविड-19 में कोई फायदा नहीं होगा। 

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