क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड फिल्मों में पहने गए कपड़ों का बाद में क्या होता है?

फिल्मों में इस्तेमाल किये गए कपड़ों पर उस फिल्म के प्रोडूसर का हक़ होता है. कई बार इन कपड़ों को चैरिटी के लिए नीलाम कर दिया जाता है और इससे प्राप्त रुपयों को समाज सेवा के लिए इस्तेमाल किया जाता है. सलमान के एक फैन ने उनका तौलिया 1.5 लाख में खरीदा था. सलमान ने यह तौलिया फिल्म ‘मुझसे शादी करोगी’ में इस्तेमाल किया था.
Nov 19, 2018 18:28 IST
    Bollywood Movie

    वर्तमान में, भारतीय फिल्म उद्योग का कुल राजस्व 13,800 करोड़ रुपये (2.1 अरब डॉलर) है जो कि 2020 तक लगभग 12% की दर से बढ़ता हुआ 23,800 करोड़ रुपये का हो जायेगा. अगर म्यूजिक, टीवी, फिल्म और अन्य सम्बंधित उद्योगों को एक साथ मिला दिया जाए तो इसका कुल आकार वर्ष 2017 में 22 अरब डॉलर था जो कि 2020 तक बढ़कर 31.1 अरब डॉलर हो जायेगा.

    बॉलीवुड की फिल्मों को दौलत, शोहरत, ग्लैमर और फैशन की दुनिया कहा जाता है. फिल्म ‘हीरोइन’ में करीना कपूर ने 130 ड्रेस पहनकर अनोखा रिकॉर्ड बनाया था, तो वहीं 'एक्शन रिप्ले' में ऐश्वर्या राय ने 125 कॉस्ट्यूम पहने थे. फिल्म ‘रामलीला’ में दीपिका पादुकोण ने 30 किलो का लहंगा पहना था और फिल्म 'कमबख्त इश्क' के एक गाने में करीना कपूर ने ब्लैक कलर की ड्रैस पहनी थी. खबरों के मुताबिक इस ड्रैस की कीमत 8 लाख थी.

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    इसके अलावा अपने देखा होगा कि एक गाने में ही हीरो और हेरोइन कई ड्रेस बदल लेते हैं. लेकिन आपने इन सभी फिल्म स्टार्स को फिल्मों में पहने गए कपड़ों को दुबारा किसी और फिल्म में पहने नहीं देखा होगा. आखिर इन कपड़ों के क्या होता है क्या इनको बेकार या उतरन समझकर फेक दिया या फिर बाजार में बेच दिया जाता है.

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    आइये इस लेख के माध्यम से इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानते हैं.

    कपड़ों का खर्च कौन उठाता है?

    प्रोडूसर या निर्माता वह व्यक्ति होता है जो फिल्मों में निवेश करता है अर्थात किसी फिल्म के बनने में होने वाले सभी खर्चों को वहन करता है. एक निर्माता जो फिल्म बनाने में निवेश करता है उसे फिल्म का "बजट" कहा जाता है. इसमें अभिनेताओं को दिया जाने वाला शुल्क, तकनीशियनों, क्रू मेम्बर के आने-जाने, खाने और रहने और एक्टर्स द्वारा पहने गए कपड़ों का खर्चा भी शामिल होता है. इन खर्चों के अलावा फिल्म बनने के बाद इसके प्रमोशन पर किया जाने वाला खर्चा भी इसमें शामिल होता है.

    तो स्पष्ट है कि किसी फिल्म में इस्तेमाल किये गए सभी कपड़ों के खर्च को उस फिल्म का प्रोडूसर या निर्माता वहन करता है.

    पुराने कपड़ों को कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है जैसे;

    1. यशराज प्रोडक्शन में बनी फिल्मों में सारे कॉस्ट्यूम पेटी में बंद करके रख लिए जाते हैं. हर पेटी पर लेबल लगा होता है, जिससे पता चल जाता है कि किस फिल्म में किस लीड स्टार और सपोर्टिंग एक्टर ने कौन-कौन से कपड़े पहने थे. इसके बाद जब कभी इसी प्रकार के कपड़ों की जरूरत पड़ती है तो इन्हीं कपड़ों को दुबारा अदल बदल (मिक्स मैच) करके इस्तेमाल कर लिया जाता है.

    यहाँ पर उदाहरण के तौर पर बता दें कि ऐश्वर्या राय ने 'बंटी और बबली' के गाने 'कंजरा रे' वाले आइटम सॉंग में जो चोली पहनी थी उसे 2010 में आई फिल्म बैंड बाजा बारात' में एक बैकग्राउंड डांसर को पहनाया गया था.

    2. कई बार कपड़ों को चैरिटी के लिए नीलाम कर दिया जाता है और इससे प्राप्त रुपयों को समाज सेवा के लिए इस्तेमाल किया जाता है. सलमान के एक फैन ने उनका तौलिया डेढ़ लाख में खरीदा था. सलमान ने यह तौलिया फिल्म ‘मुझसे शादी करोगी’ में इस्तेमाल किया था.

    रजनीकांत और ऐश्वर्या राय की फिल्म रोबोट के कुछ आउटफिट नीलाम किए गए थे और इससे मिले पैसों को चैरिटी के लिए दिया गया था. इसके अलावा फिल्म ‘देवदास’ में माधुरी दीक्षित ने जो हरे रंग का लहंगा पहना था वह लहंगा 3 करोड़ में बिका था.

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    3. कुछ डिज़ाइनर ऐसे होते हैं कि फिल्म में इस्तेमाल हुए कपड़ों को वापस ले लेते हैं. इससे इन डिज़ाइनर के कपड़ों का विज्ञापन भी हो जाता है और फिर बाद में उन्हें बाजार में बेच दिया जाता है. बताते चलें कि मनीष मल्होत्रा, अंजू मोदी और ऋतू बैरी ज्यादातर फिल्मों के लिए अपने डिजाइन किए कपड़े वापस ले लेते हैं.

    4. कई बार किसी एक्टर या एक्ट्रेस को कोई ड्रैस पसंद आ जाए या फिर कोई आउटफिट अपने हिसाब से डिजाइन करवाएं तो वह उन्हें अपने पास रख लेते है. ये लोग भले ही इन कपड़ों को सार्वजनिक तौर पर भले ही कभी इस्तेमाल न करें लेकिन याद के तौर पर इन्हें अपने पास रख लेते हैं. जैसे फिल्म 'कमबख्त इश्क' के एक गाने में करीना कपूर ने ब्लैक कलर की ड्रैस पहनी थी, इस ड्रैस की कीमत 8 लाख थी. फिल्म के प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला ने वो ड्रैस करीना कपूर को गिफ्ट कर दी थी.

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    5. कुछ प्रोड्यूसर सप्लायर को कपड़ों का कांटेक्ट दे देते हैं. टीवी प्रोड्यूसर राजन शाही ने बाताया कि वह किसी कपड़े के सप्लायर से टाइ-अप कर लेते हैं, जिसके बाद वह हर मौके के हिसाब से कपड़े मंगवाते हैं और उन्हें इस्तेमाल करने के बाद कपड़ों को वापस भिजवा दिया जाता है. अर्थात फिल्म की शूटिंग के बाद सप्लायर को कपड़े वापिस लौटा दिए जाते हैं जिससे उन्हें कम कीमत चुकानी पड़ती है.

    ऊपर दिए गए बिन्दुओं के आधार पर यह स्पष्ट है कि फिल्मों में इस्तेमाल किये गए कपड़ों को बेकार समझकर फेका नहीं जाता है बल्कि इनको अन्य फिल्मों में या फिर चैरिटी के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है. उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ने के बाद अब आपको उपर दिए गए प्रश्नों का जवाब मिल गया होगा.

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