वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) क्या है?

वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) साँझा वैश्विक पर्यावरण लाभों को प्राप्त करने के उपायों के बढ़ते खर्च को पूरा करने के लिए नये और अतिरिक्त अनुदान और रियायती कोष प्रदान करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु एक तंत्र के रूप में कार्य करता है। इस लेख में हमने इस लेख में हमने वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) और उसके कार्य शैली के बारे में बताया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
May 25, 2018 14:33 IST
    What is Global Environmental Facility (GEF)? HN

    वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) साँझा वैश्विक पर्यावरण लाभों को प्राप्त करने के उपायों के बढ़ते खर्च को पूरा करने के लिए नये और अतिरिक्त अनुदान और रियायती कोष प्रदान करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय  सहयोग हेतु एक तंत्र के रूप में कार्य करता है। इसकी स्थापना अक्टूबर 1991 में विश्व बैंक के साथ एक पायलट कार्यक्रम के रूप में की गई थी ताकि वैश्विक पर्यावरण की सुरक्षा में सहायता मिल सके और पर्यावरणीय स्थिरता विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

    1992 रियो अर्थ शिखर सम्मेलन के दौरान पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने में मदद करने के उद्देश्य से स्थायी, अलग संस्थान बन गया था। इसे स्वतंत्र रूप से एक वित्तीय संगठन के रूप में संचालित किया जाता है जो जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय जल, भूमि क्षरण, ओजोन परत, लगातार कार्बनिक प्रदूषक (पीओपी), पारा, टिकाऊ वन प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ शहरों से संबंधित परियोजनाओं के लिए अनुदान प्रदान करता है।

    वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) के कामकाज की शैली

    1. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, बहुपक्षीय विकास बैंकों, राष्ट्रीय संस्थाओं और अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों सहित दुनिया भर में सबसे चुनौतीपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दों को हल करने के लिए दुनिया भर में काम कर रहे 18 एजेंसियों के साथ इसकी अनूठी साझेदारी है। वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों को संबोधित करने वाले 183 देशों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और निजी क्षेत्र की वैश्विक भागीदारी है।

    2. यह पात्र देशो को पांच मुख्या क्षेत्रो में अनुदान देता है: जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, भूमि अवक्रमण, अंतरराष्ट्रीय जल, रशयन एवं कचरा। यह जैविक विविधता पर सम्मलेन (सीबीडी), जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट ढांचा सम्मलेन (युएनएफसीसीसी), स्थायी जैविक पप्रदूषको पर स्टॉकहोल्म सम्मलेन (पीओपीएस), बंजर से मुकाबला के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन (यूएनसीसीडी), मरकरी के विषय में मिनामाटा सम्मलेन के लिए वित्तपोषक तंर के रूप में भी काम करता है तथा ओजोन परत नष्ट करने वाले पदार्थो पर मोंट्रियल प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन में भी मदद करता है।

    3. यह बहु-हितधारक गठजोड़ों के समर्थन के माध्यम से पारिस्थितिक तंत्र को संरक्षित करने, हरित नगर निर्माण, खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने और समृद्ध तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक नवप्रवर्तनक और उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।

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    वैश्विक पर्यावरण सुविधा के कार्य क्षेत्र (जीईएफ)

    यह जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन (शमन और अनुकूलन), रसायन, अंतर्राष्ट्रीय जल, भूमि क्षरण, टिकाऊ वन प्रबंधन / आरईडीडी +, ओजोन परत की कमी सहित सात मुख्य क्षेत्रों में काम करता है।

    भारत और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ)

    भारत दुनिया में विकासशील देश में से एक है जो 1991 में अपनी स्थापना के बाद से जीईएफ का भागीदार रहा है। इसने जीईएफ को आकार देने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। भारत जीईएफ का दाता और प्राप्तकर्ता दोनों है।

    अभी हाल में ही पर्यावरण की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्‍याओं के समाधान के उद्देश्‍य को लेकर संयुक्‍त राष्‍ट्र की सहायक वैश्विक पर्यावरण सुविधा ने 'हरित शहरी कार्यप्रणालियों' को प्रोत्‍साहन देने के लिए चार भारतीय शहरों में पायलट परियोजनाओं को प्रारंभ करने पर सहमति जताई है। भारत की यात्रा पर आईं जीईएफ की मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी और अध्‍यक्ष डॉ. नाको इशी और शहरी विकास मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू के बीच आज एक बैठक के दौरान इस संदर्भ में एक समझौते पर सहमति बनी।

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