जानें अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन या ISA में 121 देश शामिल हैं. इनमे से लगभग 80% वे देश है जो कि कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित हैं. अर्थात ये देश सूर्य से सबसे कम दूरी पर स्थित हैं और इन देशों में साल भर सौर ऊर्जा बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध रहती है. ISA का लक्ष्य 2030 तक 1 ट्रिलियन वाट (1000 गीगावाट) सौर ऊर्जा उत्पादन का है. ISA का मुख्यालय गुडगाँव (हरियाणा) में स्थित होगा.
Oct 5, 2018 17:00 IST
    International Solar Alliance

    ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों में वे स्रोत शामिल किये जाते हैं जो कि एक बार इस्तेमाल हो जाने पर दुबारा इस्तेमाल करने लायक हो जाते हैं. नवीकरणीय उर्जा स्रोतों के नाम हैं; सूर्य ऊर्जा, पनचक्की उर्जा, भूतापीय ऊर्जा और बायोमास (इसमें इथेनॉल, बायोडीजल आते हैं).

    ज्ञातव्य है कि वर्तमान में भारत के पास नवीकरणीय स्रोतों (Renewable sources) से 58.30 गीगावाट उर्जा उत्पादन की क्षमता है जो कि भारत की कुल ऊर्जा उत्पादन का लगभग 18.5% है. अर्थात भारत की उर्जा जरुरत  अभी भी ऐसे स्रोतों पर आधारित है जो कि दुबारा इस्तेमाल नही किये जा सकते हैं. इसलिए समय की मांग के अनुसार भारत को ऐसे वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों की खोज करनी होगी जो कि लम्बे समय तक इस्तेमाल किये जा सकें या अगली पीढ़ी के लिए भी काम आ सकें.
    भारत के प्रधानमन्त्री मोदी जी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का पहला शिखर सम्मेलन नयी दिल्ली में 11 मार्च 2018 को आयोजित किया था.
    इस लेख में हम इस अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में विस्तार से बता रहे हैं.
    अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की प्रष्ठभूमि क्या है?

    चैंपियंस ऑफ अर्थ पुरस्कार विजेताओं की सूची
    भारत ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance-ISA) की पहल की थी. इसकी शुरुआत संयुक्त रूप से पेरिस में 30 नवम्बर, 2015 को संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान कोप-21 (Conference of Parties-21) से अलग भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्राँस के तत्कालीन राष्ट्रपति ने की थी.
    फ़्रांस, इस अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के सफल होने के लिए 2022  तक 5600 करोड़ रुपये का फंड देगा जिससे सदस्य देशों में अन्य सोलर प्रोजेक्ट शुरू किये जायेंगे.

    अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के उद्येश्य क्या हैं?
    1. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का उद्येश्य ऐसे देशों (जो आंशिक तौर पर कर्क रेखा और मकर रेखा के मार्ग में पड़ते है) को एक मंच पर लाना है जो कि स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ पर्यावरण, स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छ जलवायु का समर्थन करते हों.

    2. इस संगठन का उद्देश्य; सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करना है.

    3. यह संगठन सौर ऊर्जा के विकास और उपयोग में तेज़ी को बढ़ावा देगा ताकि वर्तमान और भावी पीढ़ी को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान की जा सके.

    4. ISA का लक्ष्य 2030 तक 1 ट्रिलियन वाट (1000 गीगावाट) सौर ऊर्जा उत्पादन का है, जिस पर अनुमानतः 1 ट्रिलियन डॉलर का खर्च आयेगा.
    ISA के सदस्य देशों में कर्क रेखा से मकर रेखा के बीच पड़ने वाले लगभग 100 देशों में पूरे साल अच्छी धूप खिली रहती है. यदि ये देश सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा दें तो न केवल ये अपनी अधिकांश ऊर्जा ज़रूरतें पूरी कर सकेंगे, बल्कि दुनिया के कार्बन उत्सर्जन में भी जबर्दस्त कटौती देखने को मिलेगी.

    international solar alliance members
    अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में कितने देश शामिल हैं?

    अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन या ISA में 121 देश शामिल हैं. इनमे से लगभग 80% वे देश है जो कि कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित हैं. अर्थात ये देश सूर्य से सबसे कम दूरी पर स्थित हैं और इन देशों में साल भर सौर ऊर्जा बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध रहती है.
    ISA; दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में से एक बन गया है और 2 साल के अन्दर इस पहल के लिए 61 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं.

    हस्ताक्षर करने वाले मुख्य देश हैं:-- भारत, फ्राँस, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्राजील, वेनेजुएला, बुर्किना फासो, कंबोडिया, चिली, कोस्टा रिका, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, कोमोरोस, बेनिन,  कोट डि आइवरी, जिबूती, क्यूबा, डोमिनिकन गणराज्य, इथोपिया, इक्वेटोरियल गयाना, घाना, फिजी, गैबॉन, , गिनी, गिनी बिसाउ,  किरिबाती, लाइबेरिया, मेडागास्कर, मलावी, माली, मॉरीशस, नॉरू, सेनेगल, सोमालिया, नाइजर, नाइजीरिया, पेरू, रवांडा, , सेशेल्स, दक्षिण सूडान, सूडान, तंज़ानिया, टोंगा, वानूअतू, टोगोलीज़ गणराज्य, तुवालु और संयुक्त अरब अमीरात.

    अनुमोदन करने वाले मुख्य देश हैं:- भारत, फ्राँस, ऑस्ट्रेलिया, माली, मॉरीशस, गिनी कोमोरोस, क्यूबा, फिजी, बांग्लादेश घाना, नाइजर मलावी, नॉरू, , पेरू, सेशेल्स, सोमालिया, दक्षिण सूडान और तुवालु.
    इस अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में भारत की क्या भूमिका है?
    अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) पहला अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका सचिवालय भारत में होगा. इससे अंतरराष्ट्रीय पर भारत के कद में बढ़ोत्तरी होगी. 11 मार्च 2018 को इस सम्मलेन को संबोधित करते हुए प्रधानमन्त्री मोदी ने कहा कि “भारत; 2022 तक 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन करने का लक्ष्य रखता है, जो कि ISA के लक्ष्य का दसवां हिस्सा होगा. "भारत 2022 तक नवीकरणीय स्रोतों से 175 गीगावॉट बिजली का उत्पादन करेगा और 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादित की जाने लगेगी.
    सारांश
    यह उम्मीद की जाती है कि यदि यह संगठन अपने उद्येश्यों के प्राप्त करने के सफल हो जाता है तो यह ना सिर्फ वर्तमान पीढ़ी के लिए स्वच्छ ईंधन का स्रोत होगा बल्कि आगे आने वाली पीढ़ियों की भी स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा.

    जानें क्यों अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा एक सीधी रेखा नहीं है

    Loading...

    Register to get FREE updates

      All Fields Mandatory
    • (Ex:9123456789)
    • Please Select Your Interest
    • Please specify

    • ajax-loader
    • A verifcation code has been sent to
      your mobile number

      Please enter the verification code below

    Loading...
    Loading...