गैस सिलेंडर पर लिखे हुए नंबर का क्या मतलब होता है

अधिकतर लोगों के घरों में गैस सिलेंडर इस्तेमाल होता है परन्तु क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि सिलेंडर पर एक कोड या नंबर लिखा होता है, इसका क्या मतलब है, यह क्यों दिया जाता है आदि के बारे में इस लेख के माध्यम से अध्ययन करेंगे.
Feb 19, 2018 19:07 IST
    What is the meaning of number on Gas Cylinder?

    गैस सिलेंडर हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. अधिकतर सबकी रसोई में यह होता है जिसकी मदद से खाना पकता है. रसोई में कोई भी छोटा हो या बढ़ा आसानी से गैस सिलेंडर को इस्तेमाल कर लेता है. लेकिन इसे इस्तेमाल करते वक्त काफी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ये जानलेवा भी साबित हो सकता है. परन्तु गैस सिलेंडर लेते वक्त क्या आपने उस पर लिखे नंबर के बारे में ध्यान दिया है, आखिर इस नंबर का क्या मतलब होता है. यह सिलेंडर पर क्यों दिया जाता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते है.
    कभी–कभी सुनने को मिलता है कि गैस सिलेंडर लीक हो गया या फट गया. ये कैसे होता है. जिस गैस सिलेंडर को घर में इस्तेमाल करते है उसको सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए. गैस सिलेंडर लेते वक्त देखना चाहिए की वो कही से टूटा-फूटा न हो, पुराना न हो आदि.
    गैस सिलेंडर पर लिखे कोड या नंबर का क्या मतलब है
    क्या आपने कभी गौर किया है कि गैस सिलेंडर पर कुछ नंबर लिखा होता है. गैस सिलेंडर में रेगुलेटर के पास तीन पट्टियां होती हैं या यू कहे की तीन छोटे पिल्लर्स होते हैं. उन्हीं में से किसी एक पट्टी पर A, B, C, D के साथ कुछ नंबर भी लिखा रहते है. गैस की कंपनियां इन अल्फाबेट्स को बारह महीनों के हिसाब से चार भागों में बांट देती हैं.

    Meaning of the number written on gas cylinder
    Source: www.timemail.com
    A - जनवरी से मार्च तक,
    B - अप्रैल से जून तक,
    C - जुलाई से सितंबर तक और
    D - अक्टूबर से दिसंबर तक होता है.
    यानी सिलेंडरों पर लिखा कोड या इन लेटर की सहायता से टेस्टिंग का महीना दर्शाता है. साथ ही आगे लिखा नंबर किस साल में टेस्टिंग होनी है, ईयर का होता है. उदाहरण के लिए: B-17 का मतलब है कि गैस सिलेंडर अप्रैल से जून 2017 तक टेस्टिंग के लिए भेजा जाना चाहिए या गैस सिलेंडर का टेस्टिंग पीरियड अप्रैल से जून 2017 तक है. इसी प्रकार A-14 का मतलब है की गैस सिलेंडर का टेस्टिंग पीरियड जनवरी से मार्च 2014 तक है आदि. इस डेट के बाद अगर गैस सिलेंडर का उपयोग किया जाता है तो सिलेंडर का वॉल्व लीक तो नहीं कर रहा है चेक करले और यदि लिया गया सिलेंडर की डेट पुरानी है तो उसको गैस एजेंसी में जाकर बदलवा सकते हैं.

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    आइये देखते है गैस सिलेंडर कैसे बनते हैं और कैसे होती है इनकी टेस्टिंग  
    LPG गैस सिलेंडर को BIS 3196 मानक के हिसाब से बनाया जाता है. क्या आप जानते हैं कि गैस सिलेंडरों को वही कंपनियां बना सकती हैं जिनके पास BIS लाइसेंस के साथ CCOE यानी चीफ कंट्रोलर ऑफ एक्स्प्लोसिव से अनुमोदन (approval) मिला हो. जब सिलेंडर बनता है तो हर लेवल पर टेस्ट होता हैं. BIS कोड्स ऐंड गैस सिलेंडर रूल्स, 2004 के हिसाब से, सिलेंडर को बांटने से पहले टेस्ट होता है. 10 साल के बाद सारे नए सिलेंडरों को बड़ी टेस्टिंग के लिए भेजा जाता हैं. फिर 5 साल के बाद भी उसी प्रकार टेस्टिंग होती है. जब गैस सिलेंडर प्रेशर टेस्ट को पास कर लेते हैं तभी सर्कुलेशन में लाए जाते हैं.
    आमतौर पर एक गैस सिलेंडर की 15 साल तक की लाइफ होती है और उस समय के दौरान अनिवार्य परीक्षण (tests) दो बार आयोजित किए जाते हैं. सिलेंडर के लीकेज को पानी भरकर जलविद्युत परीक्षण (hydro test) के जरिये जांचा जाता है और साथ ही एक और टेस्ट किया जाता है जिसमें आमतौर पर  जो सिलेंडर में दबाव होता है उसका पांच गुना अधिक दबाव दिया जाता है. यदि सिलेंडर इन परीक्षणों में से किसी में भी विफल रहता है, तो इसे नष्ट  कर दिया जाता है. प्रत्येक दिन, उपयोग में कुल सिलेंडरों का 1.25% परीक्षणों के लिए निकाला जाता है और इनमें से एक छोटा प्रतिशत समाप्त हो जाता है.
    ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि पूरी जांच के बाद ही गैस सिलेंडर आपके पास पहुंचता है परन्तु इसमें कोई हर्ज नहीं है कि गैस सिलेंडर लेने से पहले एक बार उसकी जांच करलें. वो कहते है न सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी.

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