मत्स्य पालन करीब तीन दशकों से भारत में भोजन, आर्थिक वृद्धि एवं रोजगार आदि की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है. वर्तमान में यह कृषि के उप शाखा के रूप में काफी तेजी से बढ़ रहा है. वर्तमान में यह कृषि (मत्स्य पालन) भारत के कृषिगत सकल घरेलू उत्पाद के 4.6% भाग को सम्मिलित करता है. इसके अलावा यह लगभग लगभग 11 लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सुरक्षा प्रदान कर रहा हैं. साथ ही वार्षिक रूप से करीब 7,300 करोड़ की विदेशी मुद्रा के अर्जन में भी सहभागिता निभा रहा है. अर्थात यह कुल कृषि के निर्यात के करीब 1/5 भाग को सम्मिलित करता है. मत्स्य पालन में वर्तमान में जंगली मछली का उत्पादन या मछली पालन में विदेशी मछलियों का उत्पादन किया जा रहा है.
मत्स्य पालन (वाणिज्यिक-उतपादन, जीवन-निर्वाह या मनोरंजन) के सन्दर्भ में काफी तेजी से बढ़ रहा है. इसके अंतर्गत ताजे पानी या खारे पानी का मछली की खेती की जा रही है. कुल मछली उत्पदान के 53% अर्थात (6.4 मिलियन टन) में से 3.0 मिलियन टन समुद्री मछलियों का उत्पादन होता है जबकि 3.4 मिलियन टन अंतर्देशीय मछलियों का उत्पादन किया जाता है. प्रतिशत के सन्दर्भ की बात करें तो यह आँकड़ा समुद्री मछलियों के सन्दर्भ में 2.2% वार्षिक है जबकि अंतर्देशीय मछलियों के सन्दर्भ में 6.6% वार्षिक है. 90 के दशक के दौरान मछलियों के उत्पादन की सालाना विकास दर4.12% रही थी.
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