ये तीन बातें बन सकती हैं छात्रों में डिप्रेशन की वजह; हम बतायेंगे इनसे बचने के सरल तरीके

Mar 12, 2019 17:35 IST

    आज इस आर्टिकल में हम चर्चा करेंगे छात्रों में डिप्रेशन के मुख्य तीन कारणों के बारे में तथा साथ ही साथ हम आपको इससे बचने के उपाय भी बतायेंगे. तो आइये एक-एक कर के जानते हैं कि छात्रों में डिप्रेशन के कारण क्या हैं तथा इसके निवारण के लिए छात्रों तथा अभिभावकों की क्या भूमिका निभानी चाहिए?

    reasons of depression in school students
    reasons of depression in school students

    आज इस आर्टिकल में हम चर्चा करेंगे छात्रों में डिप्रेशन के मुख्य तीन कारणों के बारे में तथा साथ ही साथ हम आपको इससे बचने के उपाय भी बतायेंगे. दरअसल डिप्रेशन में होने के कारण केवल आप मानसिक रूप से ही नहीं बल्कि शारीरिक रूप से भी प्रभावित होते हैं , साथ ही मानसिक तनाव के कारण अक्सर छात्र अपने आप को सबसे अलग रखने लगते है. यहाँ तक की किसी काम को करने में भी असमर्थ हो जाते हैं, जिस कारण तनाव इतना बढ़ जाता है कि छात्र आत्महत्या तक कर बैठते हैं.

    परन्तु क्या आप जानते हैं कि डिप्रेशन की समस्या का इलाज आपके हाथ में ही है. इसका सबसे आसान उपाय है कि आप अपने अंदर बदलाव लाएं, किसी भी समस्या को अपने ऊपर हावी न होने दें, उसका समाधान करने की कोशिश करें, उसे अपने दोस्तों अपने परिवार के साथ शेयर करें, हो सके तो अपने आप को थोड़ा ब्रेक दें.

    तो आइये एक-एक कर के जानते हैं कि छात्रों में डिप्रेशन के कारण क्या हैं तथा इसके निवारण के लिए छात्रों तथा अभिभावकों की क्या भूमिका होनी चाहिए?

    1. परीक्षा/शैक्षिक दबाव (Exam/Academic Pressure):

    अक्सर देखा गया है कि छात्र एग्जाम के प्रेशर में या पढ़ाई के बढ़ते दबाव के कारण डिप्रेशन में आ जाते हैं. आज कल बढ़ती हुई प्रतियोगिता की होड़ में छात्रों पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है. अर्थात वह अपनी अपेक्षा के विपरीत खुद को देखते ही असमर्थ महसूस करने लगते हैं. ऐसे समय में चाहिए ही पेरेंट्स छात्रों को पूरा सहयोग करें. उन पर अपनी महत्वाकांक्षाओं का बोझ डालनें के बजाय उन्हें समझाएं की कोई प्रतियोगिता परीक्षा या किसी विषय को लेकर तनाव लेने की जगह निसंदेह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें.

    शैक्षिक दबाव का कई बार कारण खुद अभिभावक भी बन जाते हैं क्यूंकि अक्सर छात्रों पर उनके पेरेंट्स द्वारा अच्छे मार्क्स प्राप्त करने का दबाव होता है, जबकि इसकी जगह पेरेंट्स को अपने बच्चे को प्रोत्साहित करना चाहिए की वह केवल पढ़ाई में अपना 100% दें और अच्छी शिक्षा प्राप्त करें. एग्जाम के मार्क्स तथा पास या फेल होना जीवन का एक हिस्सा है और इससे सीख लेकर आगे अच्छा करने का प्रयतन करना चाहिए.

    साथ ही यह भी देखा गया है कि कई बार छात्र अपनी रूचि के अनुसार शैक्षिक करियर में आगे नहीं बढ़ पाते हैं जिस कारण उन्हें उनके अपेक्षा के अनुकूल सफलता ना मिलने के कारण वह तनाव में आ जाते हैं. ऐसी परिस्तिथि में छात्रों को खुल कर अपनी रूचि के बारे में अपने पेरेंट्स को समझाना चाहिए, भविष्य में उसका स्कोप कितना है, इस बारे में उनसे चर्चा करनी चाहिए.

    साथ ही साथ पेरेंट्स को भी यह सलाह है कि वह अपने बच्चे की रूचि के अनुसार ही उनके शैक्षिक करियर को चुने, जिसमें उनका बच्चा अच्छी तरह आगे बढ़ सकें.

    2. रैगिंग:

    अक्सर स्कूलों तथा कॉलेजों में सीनियर छात्र अपने जूनियर्स के साथ रैगिंग करते हैं. कई बार ऐसी घटनाएँ भी सामने आई हैं कि किसी स्कूल के छात्र ने रैगिंग से तंग आ कर आत्महत्या कर ली.

    स्कूलों, होस्टल्स तथा अन्य संस्थानों में सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर्स के साथ की जाने वाली रैगिंग भी एक अपराध है जो कि सभी संस्थानों में वर्जित भी है. साथ ही साथ इसके लिए संस्थानों में हेल्पलाइन नंबर्स भी उपलब्ध कराए जाते हैं. इसके बावजूद ऐसी घटनाएँ आये दिन सुनी जाती हैं.

    हालाकी सीनियर छात्रों के जूनियर्स के साथ ओपन-अप होने के और भी तरीके हैं लेकिन अक्सर छात्र कुछ ऐसा रवैया अपना लेते हैं जिससे ना चाहते हुए भी उनके जूनियर्स तनाव में आ जाते हैं.

    ऐसे में अभिभावकों को हमेशा अपने बच्चों को यह सीख देनी चाहिए की वह अपने स्कूल या संस्थानों में दूसरों से कैसे पेश आयें. उन्हें अच्छी तरह समझाना चाहिए की रैगिंग से क्या गलत प्रभाव पड़ सकता हैं.

    दरअसल यह बात छात्रों को भी समझना बहुत आवश्यक है कि रैगिंग जैसा एक मज़ाक किस प्रकार दूसरे छात्र के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. उनके द्वारा किए जाने वाला मज़ाक दूसरे किसी छात्र की जीवनशैली को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है.

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    3. किशोरावस्था का प्रेम प्रसंग:

    अक्सर छात्र किशोरावस्था में प्रेम प्रसंग में पड़ जाते हैं लेकिन यदि कुछ समय बाद उनका यह रिश्ता नकारात्मकता की तरफ चला जाता है तो वह इस बात से दुखी होकर दिन प्रति दिन खुद को अकेला और असहाय महसूस करने लगते हैं.

    आम तौर पर छात्र ऐसी परिस्तिथि में अपने अभिभावकों से भी कोई चर्चा नहीं कर पाते हैं या फिर यदि इस विषय में पेरेंट्स को कुछ पता भी हो तो कई पेरेंट्स इस समस्या को समझने की बजाय अनावश्यक विवाद समझ कर छोड़ देते हैं.

    जबकि ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की इस मानसिक प्रविर्ती को सही तरीके से समझ कर उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की सलाह देनी चाहिए. यह एक ऐसी परिस्तिथि है जब पेरेंट्स को बच्चों के साथ एक मित्र की तरह उनकी बातों को समझ कर उन्हें जीवन की रूपरेखा से अवगत कराने की ज़रूरत होती है.

    निष्कर्ष:

    यहाँ हमने आपको डिप्रेशन के तीन कारण तथा उसके निवारण से अवगत कराया है जो कि आमतौर पर छात्रों के साथ बीतने वाली परिस्तिथि से सम्बंधित है. डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए सबसे पहले हर छात्र को खुद की जीवन-शैली को सही करना बहुत आवश्यक है. साथ ही साथ अभिभावकों को भी ऐसी परिस्तिथियों को समझने के लिए जागरूक होने की आवश्यकता है. आशा है कि हमारे बताये सुझाव से आपके जीवनशैली में जो बदलाव आये उसकी सीख आप आगे भी दूसरों को दे पाएंगे.

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