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IAS अधिकारी द्वारा अधिकृत पद

सिविल सर्विसेज देश में अनेकता में एकता के अनिवार्य भावना का प्रतिनिधित्व करता है। यहां हम एक आईएएस अधिकारी द्वारा अधिकृत कुछ प्रमुख पदनाम और पदों एवं उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों के बारे में बता रहे हैं।

 

Jan 10, 2017 18:13 IST
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Civil Service code“आईसीएस इस्पात की वह फ्रेम है जिस पर भारत में हमारी सरकार और हमारे प्रशासन की पूरी संरचना टिकी हुई है"- डेविड लॉयड जॉर्ज (भूतपूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री), 1935

सिविल सर्विस को भारत में प्रशासन के हॉलमार्क के तौर पर माना जाता है। संविधान के अनुसार एक अखिल भारतीय सेवा होनी चाहिए जिसमें अखिल भारतीय आधार पर भर्ती की जाएगी। भर्तियां सामान्य योग्यताओं के साथ एक समान वेतनमान वाली होंगी और इनके सदस्य अकेले पूरे संघ में इन रणनीतिक पदों पर नियुक्त किए जा सकते हैं। इसलिए सिविल सर्विसेस हमारे देश की अनिवार्य भावना –  अनेकता में एकता का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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सिविल सेवक भारत में स्थायी नौकरशाह होते हैं और भारत सरकार के कार्यकारी शाखा के अविभाज्य हिस्सा का निर्माण करते हैं। इसलिए प्रशासन में निरंतरता प्रदान करते हैं। ये केंद्र सरकार, राज्यों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में मुख्य एवं रणनीतिक पदों पर काम करते हैं।  
वर्तमान में आईएएस में भर्ती के तीन तरीके हैं:
•    प्रत्येक वर्ष यूपीएससी द्वारा आयोजित किए जाने वाले लोक सेवा परीक्षा द्वारा;
•    राज्य लोक सेवा अधिकारियों का आईएएस में प्रोमोशन के द्वारा और  
•    गैर– राज्यकीय सिविल सेवा अधिकारियों के चयन द्वारा।

मोटे तौर पर 66 (1/3%) पद सीधी (डायरेक्ट) भर्ती के लिए और 33 (1/3%) पद प्रोमोशन कोटा के लिए होता है।  
सीधी भर्ती के आईएएस अधिकारियों को राज्य कैडरों/ संयुक्त राज्य कैडरों में उनके रैंक, प्रदर्शन और रिक्ति की उपलब्धता के आधार पर नियुक्त किया जाता है। ज्यादातर आईएएस अधिकारी राज्य प्रशासन में अपने करिअर की शुरुआत उप–प्रभागीय मजिस्ट्रेट के रूप में उप– प्रभागीय स्तर से करते हैं। उन्हें उनके प्रभार वाले क्षेत्रों में सामान्य प्रशासन और विकास कार्य के साथ –साथ इलाके में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने का काम दिया जाता है।

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फील्ड पोस्टिंग के दौरान आईएएस अधिकारियों को मिलने वाले पद इस प्रकार होते हैं:
1)    एसडीओ/ एसडीएम/ ज्वाइंट कलेक्टर/ मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ)
2)    जिला मजिस्ट्रेट/ जिला कलेक्टर/ उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर)
3)    संभागीय आयुक्त (डिविजनल कमिश्नर)
4)    राजस्व बोर्ड के सदस्य
5)   राजस्व अध्यक्ष (Chairman of Revenue)

उपरोक्त उल्लिखित पदों के अलावा एक आईएएस अधिकारी को स्वायत्त संगठनों/ अधीनस्थ संगठनों/ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू)/ संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठनों/ विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में विभिन्न पदों पर नियुक्त किया जा सकता है। ये केंद्र सरकार में मंत्रियों के व्यक्तिगत सचिवों के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे सकते हैं। निर्धारित अवधि के लिए निजी संगठनों में आईएएस अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर भी भेजने का प्रावधान है।
निम्नलिखित तालिका सर्विस ग्रेड और नौकरी के वर्षों के संदर्भ में एक आईएएस अधिकारी द्वारा राज्य सरकार और केंद्र सरकार के अधीन, जिन पदों पर वह रहता है, के बारे में बताती है।

ग्रेड

राज्य सरकार या केंद्र सरकार के अधीन पद 

जूनियर टाइम स्केल

(शुरुआती वर्ष )

 

एक जिले के सब– डिविजन में सब–डिविजनल मजिस्ट्रेट/ राज्य सचिवालय (प्रवेश स्तर पर) में सेक्शन अधिकारी/ भारत सरकार में असिस्टेंट डायरेक्टर

सीनियर टाइम स्केल

(चौथा वर्ष)

 

एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट/ एडिशनल कलेक्टर/ एक जिले का एडिशनल डिप्टी कमिश्नर या राज्य सरकार में अवर सचिव (अंडर सेक्रेटरी)

 

जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड

(छठा वर्ष)

 

डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट/ कलेक्टर/ जिले का डिप्टी कमिश्नर या राज्य सरकार में एडिशनल सेक्रेटरी या भारत सरकार में ज्वाइंट डायरेक्टर/ डिप्टी सेक्रेटरी

 

सेलेक्शन ग्रेड

(दसवां वर्ष)

 

डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट/ कलेक्टर/ जिले का डिप्टी कमिश्नर या राज्य सरकार में विशेष सचिव या भारत सरकार में डायरेक्टर

 

सुपर टाइम स्केल

(17– सत्रहवां वर्ष)

 

डिविजन में डिविजनल कमिश्नर या राज्य सरकार में सचिव या भारत सरकार में संयुक्त सचिव

 

सुपर टाइम स्केल से उपर

(24– चौबीसवां वर्ष)

 

राज्य सरकार में प्रधान सचिव या भारत सरकार में अवर सचिव (एडिशनल सेक्रेटरी)

 

एपेक्स स्केल

(31–इक्त्तीसवां वर्ष)

 

राज्यों में मुख्य सचिव या भारत सरकार में सचिव

 

कैबिनेट सेक्रेटरी ग्रेड

(35– पैंतीसवां वर्ष)

भारत के कैबिनेट सचिव (सिर्फ एक पद) 

 

**स्थानीय प्रशासनिक कारणों की वजह से अलग– अलग राज्यों में पद अलग– अलग हो सकते हैं।

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सिविल सेवक की सबसे उंची रैंक कैबिनेट सेक्रेटरी की होती है। वह सिविल सर्विसेस बोर्ड का पदेन अध्यक्ष होता है जो भारतीय प्रशासनिक सेवा का प्रमुख और भारत सरकार के नियमों के अधीन आने वाले सभी सिविल सेवाओँ का प्रमुख होता है। भारत के वरीयता क्रम में वह 11वें स्थान पर होता है जो खुद में बहुत सम्मान की बात होती है।

सिविल सेवा कौशलों और हर दिन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता से लैस है और सिविल सेवक निष्पक्ष एवं सभ्य माहौल में काम करते हैं, को सुनिश्चित करने की जवाबदेही पद पर काम करने वाले व्यक्ति की ही होती है। एक आईएएस अधिकारी के काम के दायरे में मोटे तौर पर निम्नलिखित कार्य आते हैं–  राजस्व का संग्रह करना और राजस्व से संबंधित मामलों में अदालत के जैसे काम करना, कानून  और व्यवस्था बनाए रखना, कार्यकारी मजिस्ट्रेट के तौर पर काम करना, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ)/ जिला विकास आयुक्त के तौर पर काम करना, राज्य एवं केंद्र सरकार की नीतियों के कार्यन्वयन का पर्यवेक्षण करना, नीतियों के कार्यान्वयन को देखने के लिए संबंधित स्थानों पर जाना और वित्तीय औचित्य के मानदंडों के आधार पर सार्वजनिक कोष के खर्च का पर्यवेक्षण करना।Functions of an IAS

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इसके अलावा एक आईएएस अधिकारी को नीति निर्माण और ज्वाइंट सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी जैसे विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में नीतियों को अंतिम रूप देने हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।

किसी भी लोकतंत्र में मंत्री या संसद के सदस्य लोगों के प्रति जवाबदेह होते हैं और सिविल सेवकों को मंत्रियों के प्रति जवाबदेह होना होता है। इसलिए एक निष्पक्ष सिविल सेवक न सिर्फ वर्तमान सरकार के प्रति बल्कि उस देश के संविधान के प्रति भी जिम्मेदार होता है जिसकी उसने शपथ ली थी।

वे सरकार के दैनिक कार्यों को भी संभालते हैं। इसमें संबंधित मंत्रालय के प्रभारी मंत्री के परामर्श से नीतियों का निर्माण एवं कार्यान्वयन भी शामिल है। राजनेताओं को सलाह देना सिविल सेवकों के लिए संवैधानिक आदेश है।

मोटे तौर पर कहें तो एक आईएएस अधिकारी अपने क्षेत्र में कानून एवं व्यवस्था, राजस्व प्रशासन और सामान्य प्रशासन बनाए रखने के लिए  जिम्मेदार होता है। नौकरशाही की एक स्थायी लॉबी होने का प्रमुख कारण यह है कि ये अच्छे निष्पादन एवं प्रतिपादन कौशलों द्वारा जनता और सरकार के बीच मध्यस्थ के तौर पर काम करता है।

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