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IAS उम्मीदवार से IAS अधिकारी बनने का सफर

एक छात्र का जीवन, जो कॉलेज के दिनों या नौकरी के दिनों में सभी प्रकार की मस्ती से भरा था वह एकदम से थम सा जाता है। उम्मीदवार जल्द ही खुद को अनगिनत किताबों और पुस्तकों में डूबा लेता है। उसने कभी भी इतना गहन और लगन के साथ पढ़ाई नहीं की थी लेकिन तैयारी की यह अवधि बहुत लंबी होती है। लंबे समय तक अनुशासित होकर पढ़ाई करने में लोगों को काफी मुश्किल होती है। अलग– अलग विषयों  को पढ़ने का उत्साह और जिज्ञासा धीरे– धीरे खत्म हो जाता है। सिविल सेवक बनने की धुन खत्म होने लगती है और नकारात्मक विचारों में बदलने लगती है। इस प्रकार की अनिश्चित सोच को संभालना और अपने सपने को बनाए रखने की दृढ़ता उम्मीदवार को सफल बनाती है।

Dec 14, 2016 10:40 IST
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Aspirant to IAS Officer

भारत के अधिकांश छात्रों में पढ़ाई के दौरान कभी– न– कभी सिविल सेवा परीक्षा पास करने की इच्छा जरूर होती है। इन इच्छाओं को आमतौर पर कॉलेज के दिनों में या तो उनके माता– पिता पोषित करते हैं या किसी सफल उम्मीदवार या अपने सहयोगियों से उन्हें प्रेरणा मिलती है। इसके अलावा ज्यादातर औसत भारतीय करिअर की बेहतर संभावनाओं, स्थायी नौकरी, उच्च सामाजिक मूल्य औऱ समकालीन समय में सत्ता की भावना के कारण आईएएस उम्मीदवार बन भी जाते हैं। यह लेख ऐसे ही उम्मीदवार की कहानी बताता है जो इतना भाग्यशाली रहा कि अपने आईएएस उम्मीदवार के टैग को आईएएस अधिकारी से बदल के दिखा दिया।

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भारत भर में ऐसे छात्रों की काफी संख्या है जो बिना किसी व्यावसायिक कोचिंग संस्थान की मदद के खुद के बूते सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हैं। हालांकि, ज्यादातर आईएएस उम्मीदवार दिल्ली में पुराना राजेन्द्र नगर या मुखर्जी नगर के आस–पास स्थित किसी कोचिंग संस्था में नजर आते है। साथ ही ये संस्थान जीएस, वैकल्पिक विषयों, टेस्ट सीरिज, निबंध और अन्य विषयों के लिए काफी फीस भी लेते हैं।

IAS Exam Preparationआईएएस की तैयारी के दौरान जीवन

कई उम्मीदवार अपने कॉलेज के समय से ही तैयारी करना शुरु कर देते हैं, आमतौर पर छात्र जिस परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहे होते हैं उसकी प्राथमिक परीक्षा से करीब एक वर्ष पहले से ही अनुशासित एवं सतत पढ़ाई शुरु कर देते हैं। प्री टेस्ट के लिए यह उल्टी गिनती का समय होता है जो किसी की भी तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण, अहम और चुनौती भरा चरण होता है।

एक छात्र का जीवन, जो कॉलेज के दिनों या नौकरी के दिनों में सभी प्रकार की मस्ती से भरा था वह एकदम से थम सा जाता है। उम्मीदवार जल्द ही खुद को अनगिनत किताबों और पुस्तकों में डूबा लेता है। उसने कभी भी इतना गहन और लगन के साथ पढ़ाई नहीं की होती है। लंबे समय तक अनुशासित होकर पढ़ाई करने में लोगों को काफी मुश्किल होती है। सिविल सेवक बनने की धुन खत्म होने लगती है और नकारात्मक विचारों में बदलने लगती है। इस प्रकार की अनिश्चित सोच को संभालना और अपने सपने को बनाए रखने की दृढ़ता उम्मीदवार को सफल बनाती है।

IAS बनने के लिए उपयुक्त जीवनशैली

IAS प्री लिम्स की तैयारी

अध्ययन के पहले चरण में किसी को भी सिविल सेवा परीक्षा के लगभग सभी विषयों को पढ़ना होता है। सामान्य अध्ययन के अलावा उसे अगले वर्ष होने वाली मुख्य परीक्षा के अपने वैकल्पिक विषय की तैयारी भी बहुत अच्छी तरह से करनी होती है। जैसे ही प्राथमिक पेपर का समय करीब आते जाता है, मुख्य परीक्षा का पाठ्यक्रम पीछे छूट जाता है और उम्मीदवार आने वाली बहुवैकल्पिक प्रश्नों वाली परीक्षा में अधिक से अधिक अंक लाने की तैयारी में जुट जाते हैं। करेंट अफेयर्स को रटना, प्रैक्टिस सेट्स को हल करना, पिछले वर्षों के प्रश्नों को देखना आदि कुछ ऐसे काम है जो गंभीर उम्मीदवार प्राथमिक परीक्षा से कुछ दिन पहले आमतौर पर करते हैं।

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प्राथमिक परीक्षा में लाखों उम्मीदवारों में से कुछ हजार छात्रों को चुना जाता है। इनमें वैसे उम्मीदवार भी होते हैं जिन्हें प्राथमिक परीक्षा में अपनी सफलता पर संदेह होता है और जो प्राथमिक परीक्षा के बाद से नतीजे आने तक लगभग दो माह का समय बर्बाद कर चुके होते हैं। प्राथमिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के बीच करेंट अफेयर्स और वैकल्पिक विषय में अधिकतम समय जाता है । आखिरकार वह सप्ताह आता है जिसमें कठिन मेहनत करने वाले सभी लोग 5 दिनों में 27 घंटों तक चलने वाली एक– के– बाद एक 9 पेपरों वाली परीक्षा में अपनी किस्मत आजमाते हैं।

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IAS मुख्य परीक्षा की तैयारी

मुख्य परीक्षा के बाद की अवधि उम्मीदवार को काफी हद तक राहत महसूस कराती है। यह संभवतः वह चरण है जहां ज्यादातर उम्मीदवार अपना जीवन काफी सहजता से जीते हैं। हालांकि, नतीजे घोषित होने की तारीख पर अटकलों के साथ तनाव बढ़ने लगता है। अंत से पहले के ये नतीजे काफी मायने रखता है क्योंकि सफल होने के लिए अंतिम चयन का अवसर  2.5:1 के करीब रह जाता है। प्राथमिक परीक्षा के अंतिम नतीजों के जैसे ही यह नतीजे भी काफी असहज भावनाओं के साथ आते हैं।

असफल रहने वाले उम्मीदवार फिर से शुरुआत करने का दर्द महसूस करते हैं जबकि व्यक्तिगत परीक्षा के लिए बुलाए जाने वाले उम्मीदवार अपना विस्तृत आवेदन फॉर्म (डीएएफ) देखते हैं, हाल के करेंट अफेयर्स से खुद को अपडेट करते हैं और मॉक इंटरव्यू की सीरिज का हिस्सा बनते हैं। यह तैयारी का अंतिम चरण है, जिसका नतीजा शायद पूरे जीवन का सबसे मीठा नतीजा हो सकता है। आखिरकार 'डी' डे आता है, जिसका प्रत्येक आईएएस उम्मीदवार सपना देखता है। उम्मीदवार थोड़े उत्साह, थोड़े डर, थोड़ी घबराहट और थोड़ी खुशी के साथ व्यक्तित्व परीक्षा में शामिल होता है।

साक्षात्कार की सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने एक सप्ताह के भीतर सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी परीक्षा के नतीजे खबरों के सभी स्रोतों में ब्रेकिंग न्यूज बन कर आते हैं। कठिन प्रयास, दृढ़ संकल्प, समर्पण और त्याग एक आईएएस उम्मीदवार को आईएएस अधिकारी बना देता है।

आईएएस बनने की प्रेरक कहानियाँ

चुने जाने का एहसास

एक आम उम्मीदवार अचानक ही सेलिब्रिटी बन जाता है। उसके फोन की घंटी लगातार बजती रहती है, सभी प्रकार के अनजान लोग उसकी इस शानदार सफलता पर बधाई देने के लिए उनसे संपर्क करने लगते हैं। हर कोई आप में अपना विश्वास होने का दावा करने लगता है और आपको याद दिलाता है कि वह बचपन से ही आपकी ऐसी सफलता की भविष्यवाणी करते आए हैं। अचानक सफल उम्मीदवार को रोजाना दर्जनों फ्रेंड रिक्वेस्ट मिलने लगते हैं, उसका फोटो हर जगह भेजा जाने लगता है, पत्रकार अपने विशेष अंक के लिए उनका साक्षात्कार लेने हेतु लगातार फोन करने लगते हैं और कोचिंग संस्थान अपने खुद के प्रचार के लिए उनसे संपर्क करते हैं।

Tina-Dabi-IASमाता– पिता की भावनाएं

इस नए सफल अधिकारी के माता– पिता संभवतः इस ग्रह के सबसे खुशनसीब व्यक्ति बन जाते हैं। उन्होंने काफी समय पहले यह सपना देखा था और उनके आंखों से आंसू निकलना थामे नहीं थमता । उन्हें अपने बच्चे पर वाकई गर्व होता है। स्कूल के शिक्षक, कॉलेज के शिक्षक, ट्यूशन वाले शिक्षक सभी अपना आशिर्वाद और शुभकामनाओं की वर्षा कर देते हैं। यह नया और बेहद सफल व्यक्ति जल्द ही अलग– अलग स्कूल और कॉलेज के छात्रों को, व्यावसायिक कोचिंग संस्थानों की कार्यशालाओं और यहां तक कि ब्लॉग्स और 'webinars' के जरिए संबोधित करने लगता है। यह सारा लाड़ प्यार मसूरी में फाउंडेशन कोर्स शुरु होने से पहले तक चलता है।

आईएएस अधिकारी बनने के बाद का जीवन

पुराना सपना आखिरकार मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में पहुंचने के साथ पूरा हो जाता है।  100 दिनों तक चलने वाला फाउंडेशन कोर्स अगस्त या सितंबर में शुरु होता है। प्रशिक्षण के इस चरण में कई प्रकार के अनुशासित और नियमित प्रशिक्षण दिए जाते हैं। दिन की शुरुआत सुबह के व्यायाम से होती है, जिसे लगभग हर कोई नापसंद करता है। कक्षा ठीक सुबह 9:00 बजे शुरु हो जाती है और शाम 5 बजे तक चलती है। इस दौरान 1 घंटे का दोपहर के भोजन का अवकाश और ½ घंटे का चाय का अवकाश मिलता है।

IAS अधिकारी का वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधाएं

प्रशिक्षु अधिकारियों (ओटी) को आमतौर पर प्रशासन के लिए अनिवार्य कानून, प्रबंधन, लेखांकन, इतिहास, राजनीति और अर्थशास्त्र पढ़ाया जाता है। ज्यादातर स्थायी शिक्षक ( जिनमें आईएएस अधिकारी, केंद्रीय सिविल सेवक और विशेषज्ञ शिक्षाविद् होते हैं) हैं लेकिन कुछ प्रख्यात और प्रतिष्ठित व्यक्ति भी अक्सर अकादमी में गेस्ट लेक्चर देने के लिए आते रहते हैं। इस कोर्स में आईएफएस, आईपीएस, आईआरएस, आईआरटीएस और ऐसे ही अन्य सेवाओं के उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाता है। फाउंडेशन कोर्स में कई प्रकार की सुखद स्मृतियां बनती हैं और नियमित कक्षाओं, एलबीएसएनएए के इलाके में ट्रेकिंग, खेलों और सांस्कृतिक शामों का हिस्सा बनने के साथ– साथ  भविष्य के लिए काफी संभावनाएं बनाईं जाती हैं।

IAS Officers

अन्य सेवाओं के ओटी को उनके संबंधित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में शिफ्ट कर दिया जाता है और आईएएस ओटी को जल्द ही मसूरी से बहुत प्रसिद्ध तीन माह के 'भारत दर्शन' के लिए भेज दिया जाता है। आईएएस प्रशिक्षण का यह सबसे रोमांचक चरणों में से एक है क्योंकि उन्हें देश के हर कोने में ले जाया जाता है। भारत दर्शन से लौटने  के बाद आईएएस प्रशिक्षण का पहला चरण एलबीएसएनएए, मसूरी में शुरु होता है। यह करीब 26 सप्ताह तक चलता है। पहले चरण में ओटी को प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर प्रशिक्षित किया जाता है। उन्हें नौकरी के हर पहलू के बारे में बताया जाता है।

साथ ही उन्हें घुड़सवारी, पाककला, असैन्य मुकाबला, क्रिकेट, टेनिस, तैराकी और ऐसी ही अन्य गतिविधियों के सैंकड़ों विकल्पों में से पाठ्येत्तर गतिविधियों को चुनने का विकल्प दिया जाता है। प्रशिक्षण के सभी चरणों में यह सबसे कठिन और नीरस लगता है। इस चरण के दौरान सिर्फ अन्य विविध सेवाओं के ओटी 'संगम' में हिस्सा ले सकते हैं। यह अंतर सेवा मीट होता है जिनमें प्रशिक्षु खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, वाद– विवाद, प्रबंधन खेल और ऐसी ही अन्य गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। पहले चरण के बाद इन्हें राष्ट्रपति से मिलवाया जाता है।

भारत के 10 सर्वश्रेष्ठ IAS/IPS अधिकारी

दिल्ली से सभी ओटी अपने संबंधित कैडर में भेजे जाते हैं जहां वे राज्य विशेष के किसी भी जिले में भूमि और भूमि राजस्व विभाग, कृषि, सहकारिता, पंचायत, न्यायपालिका, पुलिस विभाग और राज्य सरकार के मंडल स्तर के कार्यालय में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। वे एलबीएसएनएए वापस जाते हैं, जहां वे संबद्ध जिले से संबंधित विभिन्न समस्याओं को साझा करते हैं और स्थिति  में किस प्रकार सुधार लाया जाए, पर चर्चा करते हैं।

tina dabi and AtharIAS Topper Tina Dabi और Athar Amir

दूसरे चरण को मूल रूप से इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इसमें इलाके में जाकर बीते एक वर्ष सीखी हुई बातों और दूसरे चरण के बाद दिल्ली में भारत सरकार के किसी मंत्रालय में सहायक सचिवों के तौर पर नियुक्त पूर्व ओटी को सिखाए गए तकनीकी निर्माण के साथ जिले के कार्यों से हुए अनुभव को समेकित किया जा सके। इस पोस्टिंग का उद्देश्य है भारत सरकार करिअर के आरंभिक चरण में आएएस अधिकारियों से किस प्रकार के काम करवाती है, का अनुभव प्रदान करना। दो वर्ष परिवीक्षा अवधि पूरा करने के बाद आईएएस परिवीक्षाधीन अधिकारी बतौर उप मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ( अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट या उप– कलेक्टर भी कहे जाते हैं) के तौर पर नियुक्त किए जाते हैं। बतौर एसडीएम वे कानून और व्यवस्था, सामान्य प्रशासन, राजस्व के काम और सौंपे गए विकास कार्य करते हैं ।

नौकरी के साथ IAS Exam की तैयारी कैसे करें ?

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