इंडियन स्टूडेंट्स को मिलते हैं ईस्टर्न यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ने के अनेक लाभ

एशियाई यूनिवर्सिटीज़ के लिए विश्व के अनेक देशों के स्टूडेंट्स सहित इंडियन स्टूडेंट्स की यह लगातार बढ़ती हुई प्राथमिकता कोरी अफवाह नहीं बल्कि एक स्वयं-सिद्ध तथ्य है.    

Eastern University Study Benefits for Indian Students
Eastern University Study Benefits for Indian Students

इन दिनों अनेक एशियाई यूनिवर्सिटीज़ विदेशों में पढ़ने के इच्छुक इंडियन स्टूडेंट्स के लिए पॉकेट-फ्रेंडली और घर के करीब एक अत्यधिक वांछनीय अध्ययन स्थल हैं.

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के साथ ही कई अप्रत्याशित बदलावों के बीच, पश्चिमी से एशियाई देशों में वैश्विक ज्ञान प्राथमिकता के बदलाव ने कई लोगों को हैरान कर दिया है. कुछ समय पहले तक, दुनिया भर के स्टूडेंट्स UK, US, कनाडा और फ़्रांस की विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ को विदेशों में अपने वांछित अध्ययन स्थल के तौर पर चुनते थे. लेकिन कोविड -19 ने कई स्टूडेंट्स की इस पसंद को इन दिनों बदल दिया है.

एशियाई यूनिवर्सिटीज़ के लिए विश्व के अनेक देशों के स्टूडेंट्स सहित इंडियन स्टूडेंट्स की यह लगातार बढ़ती हुई प्राथमिकता कोरी अफवाह नहीं बल्कि एक स्वयं-सिद्ध तथ्य है क्योंकि कई एशियाई यूनिवर्सिटीज़ ने वर्ष, 2016 में सिर्फ एक चौथाई के मुकाबले में टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग, 2021 में लगभग एक तिहाई तक जगह बनाई है. यह लेटेस्ट डाटा स्पष्ट तौर पर यह दर्शाता है कि, दुनिया के सबसे युवा और सबसे गतिशील विश्वविद्यालय ईस्टर्न कॉन्टिनेंट  एशिया में स्थित हैं. नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर, टॉप 10 यूनिवर्सिटीज़ की यंग यूनिवर्सिटी रैंकिंग, 2021 में टॉप स्लॉट पर है.

एशियाई महाद्वीप ने वर्ष, 2021 में अपने प्रतिनिधित्व में आश्चर्यजनक वृद्धि दर्ज की है और लगभग  32% एशियाई यूनिवर्सिटीज़ ने इस वर्ष रैंकिंग में अपनी जगह बनाई है. यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि वर्ष, 2016 की रैंकिंग के दौरान एशिया महाद्वीप का प्रतिनिधित्व केवल 26% था. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी लेटेस्ट डाटा के मुताबिक वर्ष, 2021 में चीन में पढ़ने वाले इंडियन स्टूडेंट्स की संख्या 23,000 है, जबकि सिंगापुर में पढ़ने वाले इंडियन स्टूडेंट्स की संख्या 1,500 है.

एशियाई यूनिवर्सिटीज़ का महत्त्व बढ़ने के प्रमुख कारण

विभिन्न एशियाई यूनिवर्सिटीज़ कोरोना वायरस महामारी के कुछ समय पहले से ही इंडियन स्टूडेंट्स सहित विश्व के अनेक देशों के स्टूडेंट्स के बीच लोकप्रियता हासिल कर रही हैं. वार्षिक टाइम्स हायर एजुकेशन की वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के विभिन्न एडिशन्स में उच्च शिक्षा के लिए पश्चिमी देशों की विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ का महत्त्व लगातार कम हो रहा है.

चीन विशेष रूप से विदेशों से अनुसंधान प्रतिभा (रिसर्च टैलेंट्स) को आकर्षित कर रहा है. विश्व स्तर की रैंकिंग इस वृद्धि की पुष्टि करती है, क्योंकि दुनिया के शीर्ष 200 में चीन की यूनिवर्सिटीज़ की संख्या वर्ष, 2016 में सिर्फ 02 से बढ़कर वर्ष, 2021 में 07 हो गई है. वर्ष, 2021 में पहली बार बीजिंग की सिंघुआ विश्वविद्यालय ने दुनिया की टॉप 20 यूनिवर्सिटीज़ में स्थान हासिल करके इतिहास रच दिया है.

वैश्विक शिक्षा केंद्र बनने की सिंगापुर की महत्वाकांक्षाएं भी इन दिनों साकार हो रही हैं, इस देश में अब दुनिया के कुछ सबसे तेजी से बढ़ते विश्वविद्यालय हैं. सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी को दुनिया की टॉप 50 यूनिवर्सिटीज़ में स्थान दिया गया है. एशिया महाद्वीप के प्रभावशाली विकास को आगे बढ़ाते हुए, हांगकांग का प्रतिनिधित्व 03 से 05 इंस्टीट्यूशन्स तक बढ़ गया है जबकि, दक्षिण कोरिया के 04 से बढ़कर 07 इंस्टीट्यूशन्स टॉप रैंकिंग में शामिल हो गये हैं.

इसी तरह, लेटेस्ट डाटा US और UK के महत्त्व में बदलाव की गवाही देता है. हालांकि ये देश अभी भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख संस्थान बने हुए हैं लेकिन यह बदलाव पश्चिम से पूर्व की ओर शक्ति संतुलन दर्शा रहा है.

पश्चिमी दुनिया में टैलेंटेड स्टूडेंट्स के प्रवाह में नाटकीय गिरावट के अनेक प्रमुख कारणों में, कोरोना वायरस महामारी द्वारा लाए गए यात्रा पर अल्पकालिक शारीरिक प्रतिबंधों के साथ-साथ, पूर्व में उच्च शिक्षा के बढ़ते अवसर हैं. इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा, सुरक्षा और शांति, जलवायु संकट की चुनौतियों का समाधान भी इस क्षेत्र को दुनिया के बाकी हिस्सों से ऊपर उठाने में मदद कर रहे हैं.

इंडियन स्टूडेंट्स को ईस्टर्न यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ने पर मिलने वाले अनेक लाभ

स्कॉलरशिप मिलने में आसानी: विदेश में पढ़ाई का सपना बहुत हद तक स्टूडेंट्स की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है. अधिकांश इंडियन स्टूडेंट्स के लिए फॉरेन एजुकेशन काफी महंगी होती है. ईस्टर्न यूनिवर्सिटीज़ में दी जाने वाली स्कॉलरशिप टैलेंटेड स्टूडेंट्स के लिए बहुत बड़ा आश्वासन है. सिंगापुर और हांगकांग जैसे एशियाई देश पश्चिमी दुनिया की तुलना में स्कॉलरशिप देने में ज्यादा उदार हैं.

कम एजुकेशनल फ़ीस: एशियाई/ ईस्टर्न यूनिवर्सिटीज़ में अध्ययन की लागत पश्चिमी देशों, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में काफी कम है. पश्चिमी देशों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने वाली अनेक एशियाई यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स अपने घर के करीब आ रहे हैं.

मिलते हैं जॉब के अनेक शानदार अवसर: इन्वेस्टमेंट पर लाभ और आकर्षक जॉब ऑफर्स की पेशकश ऐसे महत्वपूर्ण कारक हैं जो स्टूडेंट्स को किसी विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ने का फैसला करते समय काफी प्रभावित करते हैं. इंडियन स्टूडेंट्स के लिए US में स्टडी और वर्क वीजा हासिल करना एक कठिन परीक्षा है. जहां तक UK का संबंध है, आर्थिक दृष्टिकोण धूमिल बना हुआ है.

इंडियन स्टूडेंट्स को मिलने वाले कुछ अन्य लाभ

ज्यादा ट्यूशन फीस, बजट में कटौती और छंटनी के भारी नुकसान के कारण कोरोना वायरस महामारी के दौरान पश्चिमी यूनिवर्सिटीज़ से स्टूडेंट्स को विमुख कर दिया है. इसी तरह, पूर्वी एशिया में विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ पर इसका बहुत कम प्रभाव पड़ा है. इन दिनों एशियाई यूनिवर्सिटीज़ में न केवल इंडियन स्टूडेंट्स बल्कि दुनिया-भर के कई स्टूडेंट्स की भारी आमद देखी जा सकती है.

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