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पॉज़िटिव इंडिया: आखिर क्या है सफ़लता का राज़? जानिये शिव खेड़ा से

जीवन में सफलता पाना हर एक का सपना होता है. पर आखिर वह क्या राज़ है जिसे जान कर आप ये सपना साकार कर सकते हैं? आइये जानते हैं मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा से.

 

 

Mar 23, 2020 11:28 IST
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Positive India: what is the secrete of success? Know from Shiv Khera
Positive India: what is the secrete of success? Know from Shiv Khera

शिव खेड़ा विश्वप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर हैं जिन्होंने जीवन में कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करके सफ़लता हासिल की है. आज भारत सहित दुनिया भर के देशों में रहने वाले करोड़ों लोग कोरोना वायरस अर्थात कोविड 19 के संक्रमण से बचने के लिए ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ को फ़ॉलो करते हुए घर पर रहकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं. ऐसे समय में पॉज़िटिव मोटिवेशन हमारे हौंसले बुलंद रखने में काफी कारगर सिद्ध होती है. शिव खेड़ा के मोटिवेशनल विचार आपको जीवन जीने का एक नया अंदाज़ सिखाते हैं बशर्ते उनकी महत्वपूर्ण सलाह को अपने जीवन में अप्लाई करें. आइये जानते हैं उनसे सफ़लता के कुछ राज़:

सफ़ल लोग “इच्छा” नहीं “इरादा” करते हैं

कई लोग बहुत कोशिश के बाद भी सफ़ल नहीं हो पाते. ऐसा क्यों होता है! शिव खेड़ा सफ़लता का राज़ बताते हुए कहते हैं कि, “आपकी सफ़ल होने की इच्छा है, इरादा नहीं है. इच्छा का सौदा हो सकता है मगर इरादे का सौदा नहीं हो सकता. जिंदगी में जब भी मुश्किलें आती हैं, इच्छा कमजोर पड़ जाती है मगर इरादा और मजबूत हो जाता है.” इसलिए, सफ़ल इंसान वे होते हैं जिनका इरादा पक्का होता है. शिव खेड़ा ने भी अपने करियर के शुरू के वर्षों में बहुत ज्यादा आर्थिक और व्यक्तिगत संकटों का डट कर मुकाबला किया है और आज दुनिया भर में सम्मान हासिल किया है. कोल माइंस के मालिक होने से लेकर सड़क पर आ जाना, पिता की मृत्यु के बाद घर-घर जा कर वैक्यूम क्लीनर बेचना, गाड़ियां साफ़ करना, ऐसी कई मुश्किलों का सामना शिव खेड़ा को करना पड़ा. फिर एक दिन शिव खेड़ा ने डॉ. पील, जिन्होंने ‘पॉवर ऑफ़ पॉज़िटिव थिंकिंग’ किताब लिखी है, की कॉन्फ्रेंस अटेंड की जिससे उनकी सोच और जीवन जीने का अंदाज़ बदल गया.

सफ़ल लोग समस्याओं से भागते नहीं, उनका सामना करते हैं

इस कॉन्फ्रेंस के वक्त डॉ. पील 85 साल के थे और उनका कद 5 फीट 1 इंच से ज्यादा नहीं था मगर उनमें आत्मविश्वास और नम्रता की जरा भी कमी नहीं थी. शिव खेड़ा ने उस दिन ये एहसास किया कि इंसान का कद उसकी गर्दन से नीचे नहीं बल्कि ऊपर होता है. डॉ. पील ने अपनी कॉन्फ्रेंस में एक बेहतरीन उदाहरण देते हुए कहा कि, प्रॉब्लम्स हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा होती हैं. जब तक हमारा जीवन है, तब तक तो हमारे जीवन में प्रॉब्लम्स आती ही रहेंगी. अगर किसी के जीवन में समस्याएं नहीं हैं तो केवल उनके जो कब्रिस्थान में दफ़न हैं अर्थात जब तक जीवन है, तब तक समस्याएं रहेंगी. जब आपके जीवन में समस्याएं कम होने लगें तो समझना कि अब आपके जीवन को खतरा है और तब आप अपने ईश्वर से प्रार्थना करना कि हमारा भरोसा कम हो रहा है, आप कोई समस्या ही भेज दो.

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सफ़ल लोग कर्म करते हैं और जिसको बदल नहीं सकते उसको स्वीकार करते हैं

आज देश-दुनिया की स्थिति देखते हुए हम यह सोच रहे हैं कि क्या जीवन में सब-कुछ हमारे काबू में है? बहुत-सी बातें हमारे अख्तियार से बाहर भी हैं.......हमारा जहां जन्म हुआ, यह हमारा फैसला नहीं था, हम ने अपने माता-पिता को नहीं चुना और न ही हमारे माता-पिता ने हमें चुना. इसी तरह, हम अपना कद या त्वचा के रंग को नहीं बदल सकते. कई लोग अपाहिज पैदा होते हैं और कई अच्छे लोगों के साथ बुरे हादसे भी हो जाते हैं. उनका कसूर तो सिर्फ भगवान ही जानते हैं. बहुत से लोग ऐसी चीज़ों के साथ संघर्ष करते रहते हैं, जो वे बदल ही नहीं सकते हैं और फिर उन लोगों के जीवन में तनाव बढ़ जाता है जिससे उनके जीवन में प्रोडक्टिविटी और आपसी संबंध, यह सब-कुछ खत्म हो जाता है. इसलिए जो हम बदल नहीं सकते हैं, उसे ईश्वर की सौगात समझ कर स्वीकार कर लेना चाहिए. जो कुछ हम बदल सकते हैं, उसे जरुर बदलना चाहिए. इसलिए, अपने जीवन में सभी परिस्थितियों को बेहतरीन तरीके से हैंडल करने के लिए हमें अपने जीवन में मैडिटेशन और योगा को अपनी डेली लाइफ में अपनाना चाहिए क्योंकि मैडिटेशन से हमारा मन शांत रहता है और योगा भी हमारे तन-मन को हेल्दी रखने के लिए बहुत जरुरी है.

सफलता का राज़| Shiv Khera | Safalta Ki Raah Par | Episode 1

अपनी किताबें – ‘यू कैन विन’ और ‘यू कैन अचीव मोर’ लिखते समय शिव खेड़ा ने इसी सोच को कुछ और आगे बढ़ाया और अपनी किताब में लिखा कि, - जिंदगी एक फैसला भी है और समझौता भी. हमें ऐसा लगता है कि ये दोनों आपस में टकरा रहे हैं पर ऐसा बिलकुल नहीं है. कैसे? अगर लोग सच्चाई और ईमानदारी पर चलते हैं तो उनकी क्रेडिबिलिटी बढ़ जाती है. उनका एक्सरसाइज करने का फैसला उन्हें सेहतमंद रखेगा. हम सब एक फैसला लेने तक आजाद हैं, उसके बाद फैसला हमें नियंत्रित करता है. हमें ताश के पत्ते कौन से मिलते हैं, इसका फैसला हम नहीं कर सकते, मगर हम उनसे कैसे खेलते हैं, इसका फैसला हम जरुर कर सकते हैं.

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इस श्रृंखला में अगली बार हम शिव खेड़ा से जानेंगे कि एक विजेता को जीत के द्वार तक कौन ले जाता है – किस्मत या मेहनत? आपको क्या लगता है? हमारे साथ अपने विचार जरुर साझा करें. हम जल्दी लौटेंगे इस श्रृंखला की अगली कड़ी के साथ.

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