शत्रु सम्पत्ति अधिनियम क्या है और इससे भारत सरकार को क्या फायदे हैं?

शत्रु सम्पत्ति अधिनियम, 1968; पाकिस्तान से 1965 में हुए युद्ध के बाद पारित हुआ था. इस अधिनियम के अनुसार जो लोग 1947 के विभाजन या 1965 में और 1971 में पाकिस्तान के साथ लड़ाई के बाद पाकिस्तान चले गए और वहां की नागरिकता ले ली थी, उनकी सारी अचल संपत्ति 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दी गई थी और भारत सरकार ने जब्त कर ली थी. शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968; शत्रु की संपत्ति की देखभाल का अधिकार संपत्ति के लीगल वारिस या लीगल प्रतिनिधि को देता है.
Nov 12, 2018 16:16 IST
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    भारत को लगभग 200 वर्षों के अंग्रेजी शासन के बाद 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी, लेकिन इस आजादी के साथ साथ देश भारत की भूमि से एक हिस्सा अलग हो गया था जिसे पाकिस्तान का नाम दिया गया था. इस बंटवारे में लाखों लोग भारत से पाकिस्तान गए और पाकिस्तान से भारत आये. देश छोड़ने वाले लोगों ने अपनी जमीन, मकान, कम्पनियाँ शेयर और बैंक बैलेंस जैसी मूल्यवान चीजों को भी छोड़ दिया था.

    वर्ष 1947 के बंटवारे के अलावा 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भी बहुत से लोगों ने चीन और पाकिस्तान की ओर कूंच किया और वहां की नागरिकता ले ली थी. देश छोड़ने वाले बहुत से ऐसे ही भारतीय लोगों ने चीन और पाकिस्तान छोड़ दिया था. चीन और पाकिस्तान ने भारत के लोगों की संपत्तियों को जब्त कर लिया था. इसी कारण भारत सरकार ने भी ऐसा ही कदम उठाया था.

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    पुराना शत्रु सम्पत्ति अधिनियम, 1968 क्या है?

    शत्रु सम्पत्ति अधिनियम,1968 भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जिसके अनुसार शत्रु सम्पत्ति पर भारत सरकार का अधिकार होगा. शत्रु सम्पत्ति अधिनियम,1968; पाकिस्तान से 1965 में हुए युद्ध के बाद पारित हुआ था. इस अधिनियम के अनुसार जो लोग 1947 के विभाजन या 1965 में और 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान चले गए और वहां की नागरिकता ले ली थी, उनकी सारी अचल संपत्ति 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दी गई थी. उसके बाद पहली बार उन भारतीय नागरिकों को संपत्ति के आधार पर 'शत्रु' की श्रेणी में रखा गया, जिनके पूर्वज किसी ‘शत्रु’ राष्ट्र के नागरिक रहे हों.

    शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968; शत्रु की संपत्ति की देखभाल और हस्तांतरण का अधिकार संपत्ति के लीगल वारिस या लीगल प्रतिनिधि को देता है.

    नया शत्रु सम्पत्ति अधिनियम, 2017 क्या कहता है?

    भारत के राष्ट्रपति ने 7 जनवरी 2016 को शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 में बदलाव के लिए अध्यादेश पारित किया था लेकिन केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजजू ने शत्रु संपत्ति (संशोधन और सत्यापन) विधेयक संसद में पेश किया और इस बिल को राज्य सभा द्वारा 10 मार्च 2017 को पास किया गया था जबकि लोक सभा ने इसे 14 मार्च 2017 को पास कर दिया है.

    नए कानून के हिसाब से शत्रु सम्पत्ति की परिभाषा अब बदल गयी है, अब वे लोग भी शत्रु हैं जो भले ही भारत के नागरिक हैं लेकिन जिन्हें विरासत में ऐसी संपत्ति मिली है जो कि किसी पाकिस्तानी नागरिक के नाम है.

    इसी संशोधन ने सरकार को ऐसी संपत्ति बेचने का भी अधिकार दे दिया है अर्थात अब शत्रु संपत्ति का मालिकाना हक़ भारत सरकार के पास चला गया है. इसी बदलाब के कारण अब राजा महमूदाबाद की सारी की सारी संपत्ति भारत सरकार की हो गयी है.

    नए कानून में निम्न मुख्य परिवर्तन किये गए हैं;

    1. कस्टोडियन को ऐसी प्रॉपर्टी का मालिक मान लिया गया है और ये 1968 से ही प्रभावी हो गया है.

    2. अब भारत के नागरिक शत्रु संपत्ति को किसी को विरासत में नहीं दे सकते हैं.

    3. अब तक जितनी संपत्तियां बेची जा चुकीं हैं उन्हें गैर कानूनी घोषित करार दिया जा चुका है.

    4. दीवानी अदालतों को अधिकत्तर मामलों में शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों पर सुनवाई का कोई हक़ नहीं होगा.

    5. शत्रु संपत्ति के मामले की सुनवाई सिर्फ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में ही होगी.

    6. शत्रु संपत्ति की बिक्री गृह मंत्रालय या कस्टोडियन ऑफ़ एनिमी प्रॉपर्टी ऑफ़ इंडिया (CEPI) की देखरेख में ही की जाएगी.

    7. अब शत्रु संपत्ति का ट्रान्सफर किसी और को नहीं किया जा सकेगा और यह नियम 1968 के पहले और बाद में हस्तांतरित हुई संपत्ति के ऊपर भी लागू होगा.

    8. बिक्री द्वारा प्राप्त रकम को वित्त मंत्रालय द्वारा संरक्षित सरकारी खाते में विनिवेश आय के रूप में जमा किया जायेगा.

    कितनी शत्रु संपत्तियां भारत में हैं?

    यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि भारत में अभी कुल 9,280 शत्रु संपत्तियां हैं अभी तक 6,289 शत्रु संपत्तियों का सर्वे कर लिया गया है और बाकी 2,991 संपत्तियों का सर्वे किया जा रहा है.' गृह मंत्री ने आदेश दिया कि ऐसी संपत्तियां जिनमें कोई बसा नहीं है, उन्हें खाली करा लिया जाए ताकि जल्द उनकी बोली लगवाई जा सके. भारत में सबसे अधिक शत्रु संपत्तियां पाकिस्तान जाने वाले लोगों की हैं.

    देश में सबसे ज्यादा 4,991 संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में ऐसी 2,735 प्रॉपर्टीज हैं और राजधानी दिल्ली में ऐसी 487 संपत्तियां है. इनमें से 126 संपत्तियां उन लोगों की हैं, जिन्होंने चीन की नागरिकता ले ली. चीन के नागरिकों से जुड़ी सबसे अधिक 57 शत्रु संपत्तियां मेघायल में हैं, जबकि 29 पश्चिम बंगाल में हैं और असम में ऐसी 7 संपत्तियां हैं.

    वर्तमान में CEPI की कस्टडी में 996 कंपनियों के 20,323 शेयर धारकों के 6.5 करोड़ से अधिक शेयर हैं. इन 996 कंपनियों में अभी भी 588 कम्पनियाँ कार्यरत हैं.  इन शेयरों को बेचने की प्रक्रिया को वैकल्पिक तंत्र (Alternative Mechanism) द्वारा अप्रूवल दिया जाना जरूरी है जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री करेंगे हालाँकि इसमें गृह मंत्री और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री भी शामिल होंगे.

    शत्रु सम्पत्ति अधिनियम से भारत सरकार को क्या फायदे हैं?

    शत्रु सम्पत्ति अधिनियम, 1968 में बदलाव से भारत सरकार को दशकों तक निष्क्रिय पड़ी संपत्तियों से लगभग 3000 करोड़ रुपये मिलेंगे जिसका उपयोग देश के आधारभूत ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है. इसके अलावा भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल ताकतों को भी यह संदेश जायेगा कि भारत के खिलाफ उनके प्रयास उनको सामाजिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर देंगे.

    शत्रु सम्पत्ति अधिनियम, 1968 में बदलाव क्यों किया गया है?

    महमूदाबाद रियासत के राजा अमीर अहमद खान भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद 1957 में पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन उनकी पत्नी और बेटा (मुहम्मद आमिर मुहम्मद खान या राजा महमूदाबाद) यहीं भारत में रह गए उन्होंने भारत की अपनी नागरिकता को भी नहीं छोड़ा.

    AMEER AHMAD KHAN

    (राजा महमूदाबाद)

    जब 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने लगा, तब शत्रु संपत्ति (निगरानी और पंजीकरण) आदेश 1968 जारी किया गया. साल 1973 में वर्तमान राजा महमूदाबाद के पिता की लंदन में मौत हो गई.

    पिता की मौत के बाद भारत में स्थित उनकी पूरी संपत्ति का अधिकार वर्तमान राजा महमूदाबाद को मिल गया लेकिन सरकार ने उनकी संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था. हालाँकि महमूदाबाद का दावा था कि वह भारतीय नागरिक हैं और इसके कारण उनके पुश्तैनी जायदाद पर उनका कानूनी अधिकार है.

    मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और सुप्रीम कोर्ट ने फैसला इनके पक्ष में दिया तो साल 2005 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद उनकी कई संपत्तियां उन्हें सौंप दी गई थीं.

    लेकिन भारत सरकार को महसूस हुआ कि यदि इस तरह से शत्रु संपत्ति भारत सरकार के हाथ से फिसलती गयी तो सरकार को बहुत आर्थिक नुकसान होगा इसलिए सरकार ने शत्रु सम्पत्ति अधिनियम, 1968 में बदलाव किया था.

    राजा महमूदाबाद की संपत्ति

    महमूदाबाद के राजा के पास उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करीब 936 संपत्तियां हैं. उत्तर प्रदेश में उनकी प्रमुख संपत्तियों में शामिल हैं; गोलागंज में मौजूद मलका जमानिया, लखनऊ में बटलर पैलेस, हजरतगंज में महमूदाबाद मेंशन, हलवासिया कोर्ट, लारी बिल्डिंग शामिल हैं. इसके अलावा सीतापुर में एसपी आवास, डीएम आवास, सीएमओ आवास और लखीमपुर खीरी एसपी बंगला उनकी संपत्तियां हैं.

    उम्मीद है कि ऊपर दिए गए लेख के आधार पर आप जान गए होंगे की शत्रु संपत्ति किसे कहते हैं , सरकार ने इस संपत्ति के मालिकाना हक़ में बदलाव के लिए क्यों कानून बनाया है और भारत सरकार को इससे क्या फायदे होंगे.

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