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जानिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NAI) के क्या कार्य हैं?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भारत में आतंक का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित एक केंद्रीय एजेंसी है. NIA का गठन एनआईए अधिनियम, 2008 के तहत किया गया था. इसे 2008 में मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए केंद्रीय एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था. एजेंसी में 649 कर्मचारी हैं और यह एजेंसी गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है.
Jul 19, 2019 13:01 IST
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Rajnath Singh Addressing NIA Seminar
Rajnath Singh Addressing NIA Seminar

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) केंद्रीय काउंटर टेररिज्म लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी के रूप में कार्य करती है. एजेंसी राज्यों की विशेष अनुमति के बिना देश भर में किसी भी आतंकवाद संबंधित मामले की जांच करने के लिए अधिकृत है. हालांकि राज्य सरकार, केंद्र सरकार से मामले की जांच NIA को सौंपने का अनुरोध कर सकती है.

NIA का विजन
"आतंकवाद में उत्कृष्टता के मानकों को निर्धारित करना और उच्च प्रशिक्षित, साझेदारी उन्मुख कार्यबल विकसित करके राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों की जांच करना"

हेड क्वार्टर और क्षेत्रीय शाखाएँ:
मुख्यालय: नई दिल्ली
क्षेत्रीय शाखाएँ हैं;
1. हैदराबाद
2. गुवाहाटी
3. कोचि
4. लखनऊ
5. मुंबई
6. कोलकाता
7. रायपुर
8. जम्मू

NIA में कौन काम करता है?

NIA के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय राजस्व सेवा, राज्य पुलिस, आयकर के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों जैसे CRPF, ITBP, BSF आदि से भी चुना जाता है.
इसके अलावा परीक्षा के माध्यम से NIA में नए चेहरे भी भर्ती किए जाते हैं.

NIA के संस्थापक महानिदेशक राधा विनोद राजू थे, और उन्होंने 31 जनवरी 2010 तक सेवा की थी. वर्तमान में  Y. C.मोदी NIA के प्रमुख हैं जो 2017 से इस पद पर कार्यरत हैं.

NIA के मुख्य कार्य हैं;
एनआईए ने अब तक 244 मामले दर्ज किए हैं और जांच की है. आरोप पत्र प्रस्तुत करने के बाद, 37 मामलों को या तो पूर्ण रूप से आंशिक रूप से सुलझा लिया गया है जबकि 35 मामलों में सजा हुई है. इस आतंकवाद-रोधी एजेंसी के द्वारा 92% मामलों में सजा दिला दी जाती है जो कि बहुत ही अच्छी बात है. इसका दूसरा मतलब यह है कि जिसको भी
NIA ने अपने निशाने पर लिया हा उसको सजा अवश्य हुई है.

1. आतंकवाद से संबंधित मामलों की जांच करना या आतंकवाद का मुकाबला करने की रणनीति बनाना

2. अन्य देशों में आतंकवाद से संबंधित कानूनों का अध्ययन और विश्लेषण करना और नियमित रूप से भारत में मौजूदा कानूनों की प्रभावकारिता का मूल्यांकन करना और आवश्यक प्रतीत होने पर परिवर्तनों का प्रस्ताव करना
3. भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, अखंडता और राज्य की सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने वाले अपराधियों की जांच करना और उन पर मुकदमा चलाना
4. विदेशी राज्यों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध कायम करना.
5. अंतर्राष्ट्रीय संधियों, समझौतों, सम्मेलनों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों, इसकी एजेंसियों और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की संधियों को लागू करवाना.

NIA ने भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल कई आतंकी संगठनों को बैन कर दिया है. इन संगठनों के नाम इस प्रकार हैं;

1. जैश-ए-मोहम्मद / तहरीक-ए-फुरकान
2. लश्कर-ए-तैयबा / पासबान-ए-अहले हदीस
3. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA)
4. जम्मू और कश्मीर इस्लामिक फ्रंट
5. स्टुडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी)
6. बब्बर खालसा इंटरनेशनल
7. खालिस्तान कमांडो फोर्स
8. हरकत-उल-मुजाहिदीन या हरकत-उल-अंसार या हरकत-उल-जेहाद-ए-इस्लामी या अंसार-उल-उम्मा (एयूयू)
9. हिज्ब-उल-मुजाहिदीन / हिज्ब-उल-मुजाहिदीन पीर पंजाल रेजिमेंट
10. यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा)
11. नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड इन असम (NDFB)
12. मणिपुर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (MPLF)
13. आल त्रिपुरा टाइगर फोर्स
14. नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा
15. लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (LTTE)
16. तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी (TNLA)
17. टैमिल नेशनल रिट्रीवल ट्रूप्स (TNRT)
18. अखिल भारत नेपाली एकता समाज (ABNES)

अंत में यह निष्कर्ष कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) आतंकवाद का मुकाबला करने में बहुत अच्छा काम कर रही है. शायद यही कारण है कि देश में नागरिक ठिकानों में आतंकी हमले कम हो गये हैं. केंद्र सरकार इसके अधिकारों को और भी व्यापक बनाने के लिए संसद में कानून पास करने पर विचार कर रही है जो कि वर्तमान कानून से बहुत ही ज्यादा सख्त होगा. लेकिन राजनीतिक दल इस कानून का भी "पोटा" की तरह दुरूपयोग होने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं.

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