कल्पना चावला: जीवनी, एजुकेशन, अन्तरिक्ष अभियान और मृत्यु

अन्तरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला का जन्म 1 जुलाई, 1961 करनाल, हरियाणा में हुआ था. उन्होंने अंतरिक्ष में 31 दिन,14 घंटे, 54 मिनट का समय बिताया था. कल्पना चावला की मृत्यु 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने से हुई थी. आइये इस लेख में कल्पना चावले से जुडी बहुत सी बातों को जानते हैं.
Created On: Nov 27, 2019 11:37 IST
Modified On: Nov 27, 2019 13:21 IST
Kalpana Chawla in Space shuttle
Kalpana Chawla in Space shuttle

कल्पना चावला के बारे में व्यक्तिगत जानकारी

पूरा नाम: कल्पना चावला 

जन्म तिथि और स्थान: 1 जुलाई, 1961 (नासा के अनुसार), करनाल, हरियाणा, भारत

पिता का नाम: बनारसी लाल चावला 

माता का नाम: संजयोती देवी

पति: जीन-पियरे हैरिसन

निक नेम: मोंटू (चार भाई बहनो में सबसे छोटी)

निधन: 1 फरवरी, 2003 (42 वर्ष)

अंतरिक्ष एजेंसी: नासा

प्रोफेशन: अंतरिक्ष यात्री

अन्तरिक्ष मिशन: STS-87, STS-107

अंतरिक्ष में बिताया समय: 31 दिन,14 घंटे, 54 मिनट

शिक्षा: 

1. प्रारंभिक शिक्षा टैगोर पब्लिक स्कूल करनाल, हरियाणा 

2. एरो स्पेस इंजीनियरिंग, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, 1982

3. एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री, 1984

4. एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी, कोलोराडो विश्वविद्यालय, 1988

अन्तरिक्ष की दुनिया में कदम 
कल्पना चावला का नाम ही था  "idea" or "imagination. अपने नाम के अनुरूप ही कल्पना को अन्तरिक्ष की दुनिया बचपन से ही पसंद थी और उन्होंने उसी के अनुरूप अपनी पढाई एयरोस्पेस इंजीनियरिंग से शुरू की थी.

अपनी आगे की पढाई के लिए वह अमेरिका चली गईं और 1984 में टेक्सस यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की फिर इसी विषय में 1988 में पीएचडी भी कम्पलीट किया था.

उन्होंने उसी वर्ष नासा के एम्स रिसर्च सेंटर  (Ames Research Center) में काम करना शुरू किया, जो पावर-लिफ्ट कम्प्यूटेशनल तरल गतिकी पर काम कर रहा था.

वर्ष 1995 में कल्पना नासा में अंतरिक्ष यात्री के तौर पर शामिल हुईं थीं. कल्पना चावला का पहला स्पेस मिशन 19 नवंबर 1997 में शुरू हुआ.  कल्पना अन्तरिक्ष में अंतरिक्ष यान कोलंबिया से  STS-87 फ्लाइट से गयी थी. इस अंतरिक्ष यान  ने केवल दो सप्ताह में पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं कीं थीं. कल्पना चावला ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला और राकेश शर्मा के बाद दूसरी भारतीय थीं.

वर्ष 2000 में, चावला को अंतरिक्ष में अपनी दूसरी यात्रा के लिए चुना गया था. इस बार भी कल्पना STS-107 अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम में मिशन स्पेशलिस्ट के तौर पर काम कर रहीं थीं.

मिशन में कई बार देरी हुई, और आखिरकार 16 जनवरी 2003 को अंतरिक्ष शटल कोलंबिया लांच किया गया. यह एक विज्ञान और अनुसन्धान आधारित मिशन था. इसमें पूरी टीम ने 24 घंटों दो शिफ्ट में काम किया था. कुल 16 दिन की उड़ान के दौरान, चालक दल ने 80 से अधिक प्रयोग पूरे किए थे. 

दुर्घटना का समय और कारण 

1 फरवरी, 2003 की सुबह, अंतरिक्ष यान कोलंबिया को वापस पृथ्वी पर कैनेडी स्पेस सेंटर पर उतरना था. लेकिन लॉन्च के समय, ताप को नियंत्रित करने वाले इन्सुलेशन का एक अटैची के आकार का टुकड़ा टूट गया था और शटल की थर्मल संरक्षण प्रणाली को नुकसान पहुंचा था, जो कि शटल को गर्म होने से बचाती है. 

जैसे ही शटल वायुमंडल से गुज़री, इसमें गर्म हवा भर गयी जिससे यह अत्यधिक गर्म हो गया, शटल गोल-गोल लुड़कने लगा और अंततः कई टुकड़ों में टूट गया. जमीन पर गिरने से पहले शटल, टेक्सास और लुइसियाना पर टूट गया था. यह सब एक मिनट से कम समय में हो गया और अन्तरिक्ष यान में सवार सभी अन्तरिक्ष यात्रियों की मौत हो गयी थी. यदि यह हादसा 16 मिनट और टल जाता तो सभी यात्री वापस सुरक्षित उतर जाते. 
अंतरिक्ष शटल कोलंबिया में ये लोग गए थे; अंतरिक्ष शटल कोलंबिया में कल्पना चावला सहित कुल 7 लोग सवार  थे.

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इनके नाम हैं;
कल्पना चावला, रिक हसबैंड, विलियम सी. मैककूल, डेविड एम. ब्राउन, , माइकल पी. एंडरसन, लॉरेल क्लार्क, इलन रेमन

भले ही आज कल्पना चावला हमारे बीच ना हों लेकिन उन्होंने पूरे विश्व को यह सन्देश दिया है कि भारत की प्रतिभा दुनिया के हर कौने में मौजूद है. भारत सहित अमेरिका ने कल्पना के सम्मान में कई पुरस्कारों की घोषणा की है.

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