भारत चाय उत्पादन में दूसरे स्थान पर आता है। यहां जितना चाय का उत्पादन होता है, उतना ही यहां चाय का सेवन भी किया जाता है। यही वजह है कि भारतीयों के बीच पेय पदार्थों में चाय का अहम स्थान है।
सुबह की शुरुआत हो या फिर गपशप वाली शाम, चाय के साथ बातों का पुराना रिश्ता रहा है। भारत के हर घर में आपको चाय के सेवन वाले लोग मिल जाएंगे। भारत के अलग-अलग राज्यों में चाय का उत्पादन होता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत के किस राज्य को चाय का कटोरा कहा जाता है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
उत्तर भारत में 83 फीसदी चाय का उत्पादन
पूरे भारत में सबसे अधिक चाय का उत्पान उत्तर भारत में होता है। शेष 17 फीसदी चाय का उत्पादन दक्षिण भारत में भी होता है। ऐसे में देशभर में चाय की आपूर्ति उत्तर और दक्षिण भारत से की जाती है।
किस राज्य को कहते हैं चाय का कटोरा
अब सवाल है कि भारत में किस राज्य को चाय का कटोरा कहा जाता है। आपको बता दें कि असम राज्य को चाय का कटोरा कहा जाता है।
क्यों कहा जाता है चाय का कटोरा
असम, भारत में सबसे अधिक चाय उत्पादन करने वाला राज्य है। यहां पूरे भारत की करीब 50 फीसदी से अधिक चाय का उत्पादन होता है। इस वजह से इसे चाय का कटोरा भी कहा जाता है। असम की चाय की पहचान सिर्फ भारत में नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसकी अपनी पहचान है।
असम में होती है दो तरह की चाय
असम राज्य में दो तरह की चाय का उत्पादन होता है, जो कि इस प्रकार हैः
सीटीसी- इस चाय को क्रश,टीयर और कर्ल नाम से जाना जाता है, जो कि चाय का एक सामान्य प्रकार है। इसमें चाय को छोटे-छोटे दानों में परिवर्तित किया जाता है, जिसका इस्तेमाल हमारे घरों में दूध वाली चाय बनाने में किया जाता है। इस चाय की कीमत कम होती है।
ऑर्थोडॉक्स चाय- यह चाय अपनी बेहतर गुणवत्ता और सुगंध के लिए जानी जाती है। भारत में यह चाय महंगी होती है। वहीं, इस चाय का मुख्य रूप से निर्यात किया जाता है। आपको बता दें कि ऑर्थोडॉक्स चाय को असम में भौगोलिक संकेतक भी मिला हुआ है।
किसे दिया जाता है चाय का श्रेय
असम में चाय के लिए स्कॉटिश व्यक्ति रॉबर्ट ब्रुश को दिया जाता है। उन्होंने 1823 में यहां चाय के पौधे की खोज की थी, जिसके बाद ब्रिटिश ने यहां चाय के बगानों का विस्तार किया और असम भारत में सबसे अधिक चाय उत्पादन वाला राज्य बन गया।
पढ़ेंः फोन उठाते ही क्यों बोला जाता है Hello, जानें
Comments
All Comments (0)
Join the conversation