आप डिजिटल युग से बहुत पहले के समय के बारे में सोचें, जब ज्ञान जीवंत चर्चाओं, विद्वत्तापूर्ण बहसों और गहन शिक्षाओं के माध्यम से प्राप्त होता था। इस कड़ी में भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय बौद्धिक शक्ति के केंद्र थे, जो गणित और खगोल विज्ञान के साथ-साथ दर्शनशास्त्र और चिकित्सा के अध्ययन में रुचि रखने वाले दूर-दूर के देशों के विद्वानों को आकर्षित करते थे।
इस ऐतिहासिक युग में भारत के संस्थान लिस्ट में टॉप पर रहे और उन्नत पाठ्यक्रम, विविध शिक्षा व भव्य स्थापत्य कला के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध हुए। इस लेख के माध्यम से आइए हम प्राचीन शिक्षा के आठ केंद्रों द्वारा निर्मित समृद्ध विरासत के बारे में जानेंगे।
नालंदा विश्वविद्यालय
नालंदा विश्वविद्यालय विश्व का सबसे प्रसिद्ध प्राचीन विश्वविद्यालय था, जो वर्तमान बिहार में स्थित था। यह विश्वविद्यालय लगभग 425 ई. से 1205 ई. तक खुला रहा और बौद्ध शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र था। विश्वविद्यालय अपने प्रवेश के बारे में बहुत चयनात्मक था और छात्र प्रतिष्ठित विद्वानों से शिक्षा लेने के लिए विभिन्न देशों से आते थे। यहां का पाठ्यक्रम बड़ा था और यहां समृद्ध शैक्षणिक जीवन था। चीनी यात्री ह्वेन त्सांग और यिजिंग ने इसका दस्तावेजीकरण किया है।
तक्षशिला
तक्षशिला, जो आधुनिक पाकिस्तान प्रांत में स्थित है, संभवतः भारत के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक था। ऐसा माना जाता है कि इसका विकास 600 ई.पू. से 500 ई.पू. के बीच हुआ। इसने चिकित्सा, गणित और सैन्य विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों में शिक्षा प्रदान की। विदेशी हमलों के कारण इसके पतन से पहले इसका प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय
8वीं शताब्दी के अंत में राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित विक्रमशिला विश्वविद्यालय बिहार का एक अन्य महत्त्वपूर्ण संस्थान था। यह एक ऐसा संस्थान था, जो बौद्ध अध्ययन में विशेषज्ञता रखता था तथा इसमें संरचित डिग्रियां प्रदान की जाती थीं। विश्वविद्यालय में छह कॉलेज थे, जो तर्कशास्त्र, तत्वमीमांसा और बौद्ध धर्म के अनुष्ठान जैसे विषयों में विशेषज्ञता रखते थे।
ओदंतपुरी विश्वविद्यालय
ओदंतपुरी बिहार में 8वीं से 12वीं शताब्दी तक अस्तित्व में था और इसे पाल वंश का संरक्षण भी प्राप्त था। यह अपने समय में बौद्ध शिक्षा और दर्शन का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र था।
वल्लभी विश्वविद्यालय
वल्लभी विश्वविद्यालय वर्तमान भावनगर में स्थित था और मैत्रक वंश के संरक्षण में लगभग 600 ई. से 1200 ई. तक फला-फूला। यह अर्थशास्त्र और कृषि जैसे विषयों के साथ-साथ बौद्ध दर्शन पढ़ाने के लिए प्रसिद्ध हो गया था।
सोमपुरा महाविहार
सोमपुरा महाविहार वर्तमान बांग्लादेश में लगभग 800 ई. से 1200 ई. तक अस्तित्व में था। अपने वास्तुशिल्पीय महत्त्व और बौद्ध साहित्य को समर्पित विशाल पुस्तकालय के कारण इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
जगदला विश्वविद्यालय
11वीं शताब्दी के अंत में राजा रामपाल द्वारा स्थापित जगदला विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म में अपने विद्वत्तापूर्ण योगदान के लिए जाना जाता था। साथ ही, इसने तिब्बती भाषा में ग्रंथों के अनुवाद में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
नागार्जुन विद्यापीठ
नागार्जुन विद्यापीठ लगभग 600 ई. में कृष्णा नदी के तट पर विकसित हुई। इस संस्थान ने बौद्ध दर्शन और विभिन्न वैज्ञानिक विषयों में रुचि रखने वाले छात्रों का बहुत ध्यान आकर्षित किया।
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