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भारत का सबसे पुराना मंदिर कौन-सा है, जानें

Last Updated: May 27, 2025, 18:15 IST

बिहार के मुंडेश्वरी पहाड़ियों में स्थित यह प्राचीन मंदिर आध्यात्मिक और स्थापत्य महत्त्व का चमत्कार है। यह मंदिर अपनी दुर्लभ अष्टकोणीय डिजाइन और लगभग 2,000 वर्षों से निरंतर पूजा के लिए जाना जाता है। इसमें शिव और शक्ति दोनों का सम्मान किया जाता है। इतिहास और रीति-रिवाजों से समृद्ध यह मंदिर श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करता है। यही वजह है कि यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खास बात यह है कि यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं। 

सबसे पुराना मंदिर
सबसे पुराना मंदिर

बिहार की मुंडेश्वरी पहाड़ियों पर स्थित मुंडेश्वरी देवी मंदिर भारत के सांस्कृतिक और स्थापत्य इतिहास में  प्रमाणित प्रतीक के रूप में खड़ा है। यह विश्व का सबसे पुराना हिन्दू मंदिर है, जिसकी स्थापना 108 ई. में हुई थी, हालांकि वर्तमान संरचना के कुछ हिस्सों का पुनर्निर्माण बाद में किया गया होगा। 

वास्तुकला की मुख्य विशेषताएं

अद्वितीय अष्टकोणीय वास्तुकला: इस मंदिर में एक अनोखा अष्टकोणीय आकार है, जो इसे भारतीय मंदिरों से अलग करता है। पूरी तरह पत्थर से निर्मित यह मंदिर नागर वास्तुकला को दर्शाता है, जिसमें उत्कृष्ट नक्काशी भी शामिल है।

चतुर्मुखलिंगम: इसके मध्य में चार मुखों वाला शिवलिंग स्थापित है, जो भगवान शिव की सर्वव्यापी प्रकृति को दर्शाता है।

आध्यात्मिक महत्त्व

भगवान शिव और शक्ति (मां मुंडेश्वरी) को समर्पित यह मंदिर पुरुष और स्त्री ऊर्जा की पूरक पूजा को दर्शाता है। मंदिर में गणेश, विष्णु और सूर्य की मूर्तियां भी हैं, जो हिंदू पूजा की प्रकृति की ओर इशारा करती हैं।

मुंडेश्वरी देवी मंदिर के बारे में 5 रोचक तथ्य

 

तथ्य

विवरण

निरंतर उपासना

यहां लगभग 2,000 वर्षों से निर्बाध रूप से अनुष्ठान सम्पन्न होते रहे हैं।

तांत्रिक साधनाएं

देवी मुंडेश्वरी की पूजा तांत्रिक रूप में की जाती है, जिससे इसके अनुष्ठानों में रहस्यवाद जुड़ जाता है।

फेस्टिव हब

रामनवमी और नवरात्रि जैसे त्यौहारों पर प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु आते हैं।

ऐतिहासिक शिलालेख

चौथी शताब्दी ई. के प्राचीन शिलालेख इसके गौरवशाली अतीत को उजागर करते हैं।

संरक्षित स्मारक

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1915 से इस स्थल की सुरक्षा की है।

एक जीवित विरासत

सदियों पुराना होने के बावजूद, मंदिर में आज भी गतिविधियां जारी हैं। तीर्थयात्री यहां वर्ष भर एकत्रित होते हैं, विशेषकर प्रमुख त्योहारों के दौरान यह भीड़ रहती है। इसके अनुष्ठान और सांस्कृतिक महत्त्व इसे भारत की प्राचीन परंपराओं और आधुनिक वास्तुकला के बीच एक जीवंत सेतु बनाते हैं।

कब और कहां पहुंचें

- स्थान: रामगढ़ गांव, कैमूर जिला, बिहार

-ऊंचाई: समुद्र तल से 608 फीट ऊपर

-यात्रा के लिए सर्वोत्तम समय: शिवरात्रि या नवरात्रि जैसे त्यौहारों के दौरान, एक अद्भुत अनुभव के लिए।

मुंडेश्वरी देवी मंदिर महज एक ऐतिहासिक स्थल नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक आश्रय है, जो समय के साथ भी कायम है। चाहे आप एक भक्त हों या एक जिज्ञासु यात्री, यह मंदिर भारत की समृद्ध विरासत की एक यूनिक झलक प्रस्तुत करता है।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: May 27, 2025, 18:14 IST

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