नोटबंदी का एक साल: फायदे और नुकसान का विस्तृत आकलन

Nov 21, 2017, 02:05 IST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर 2016 को पूरे देश में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया था. इस नोटबंदी के बाद पूरे देश में अफरातफरी मच गयी थी. इस लेख में हमने इस नोटबंदी के देश को हुए फायदे और नुकसान के बारे में बताया है.

Demonetisation in India
Demonetisation in India

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर 2016 को पूरे देश में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया था. इस कदम का पीछे मुख्य मकसद काले धन को ख़त्म करना था. इस लेख में इस नोटबंदी से होने वाले फायदे और नुकसानों के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी है.
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नोटबंदी के फायदे इस प्रकार है:
1.डिजिटल लेनदेन की संख्या में वृद्धि: एक नोट में, वित्त मंत्रालय ने कहा कि डिजिटल लेनदेन की संख्या अक्टूबर 2016 और मई 2017 के बीच 56% बढ़कर 1.1 अरब हो गयी है. डिजिटल लेनदेन की संख्या बढ़ने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रिज़र्व बैंक को बार बार नए नोट कम मात्रा में छापने पड़ेंगे जिससे सरकार का नोटों की छपाई का खर्चा बचेगा. सरकार ने डिजिटल लेनदेन की संख्या को बढ़ाने के लिए भीम एप और UPI एप लांच किये हैं.
2. सरकार की आय में वृद्धि: डिजिटल लेन देन के बढ़ने से अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, कर चोरी कम होगी इस कारण ज्यादा से ज्यादा लोग टैक्स के दायरे में आयेंगे इससे सरकार की कर आय में वृद्धि होगी. इस बात की पुष्टि वित्त मंत्रालय के आकड़ों से हो चुकी है.
3. काला धन रोकने में मदद: नोटबंदी के साथ साथ सरकार ने काले धन को पैदा करने के कई स्रोंतों जैसे मकान खरीदने और बेचने के दौरान होने वाली पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन लेन देन के माध्यम से करने के नियम बना दिए हैं. अब 3 लाख रूपये से अधिक का कोई भी लेन देन नकद मुद्रा में नही होगा. इससे मकानों की कीमतों में कमी आएगी जिससे मध्य वर्ग के लोगों का “अपना घर” होने का सपना पूरा होगा.
4. भ्रष्टाचार में कमी: जिन भ्रष्ट लोगों ने अवैध तरीके से धन कमाया होता है उनका धन डूब जाता है क्योंकि जब ऐसे लोग बैंक में नोट जमा करने जाते हैं तो उनसे उनकी आय का स्रोत पूछा जाता है और यहीं पर वे पकडे जाते हैं. सरकार ने नोटबंदी के दौरान एक सीमा से अधिक धन जमा काराने वालों को नोटिस जारी कर उनसे आय के  स्रोत के बारे में पूछना शुरू कर दिया है.

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5. नकली नोटों की संख्या में कमी: नोटबंदी के मुख्य कारणों में यह कारण शामिल था. नोटबंदी से जिन लोगों के पास नकली मुद्रा होती है वह स्वतः नष्ट हो जाती है.
6. नकदी की मात्रा में कमी: बैंकिंग प्रणाली में नकदी की मात्रा 17% से नीचे आ गई है इसका मतलब है कि अब लोगों ने ऑनलाइन लेनदेन करना पसंद कर लिया है. इस नयी शुरुआत से भ्रष्टाचार को कम करने में मदद मिलेगी.
7. सस्ता लोन: नोटबंदी से बहुत बड़ी मात्रा में बैंकों के पास धन लौटकर आया जिससे बैंकों के पास मुद्रा की पूर्ती ज्यादा हो गयी है इस कारण अब पर्सनल लोन, वाहन लोन और होम लोन सस्ते हो गए हैं. जो पर्सनल लोन पहले 18% से 20% की ब्याज दर मिलता था अब वह 12% पर मिल रहा है.
8. लंबित भुगतान चुकता हुए: नोटबंदी से पहले भारत सरकार की कम्पनियों और निजी कंपनियों को उनके कई सालों से लंबित/भुगतान नही मिल पा रहे थे जैसे कि बिजली के बिल इत्यादि, वे सभी उधार इस नोटबंदी के कारण ही चुकता किये गए थे.
9. आतंकी गतिविधियों में कमी: नोटबंदी के समय में देश में आतंकी और उग्रवादी गतिविधियों में कमी आ गयी थी क्योंकि देश में बहुत सी आतंकी घटनाएँ सिर्फ रुपये के लालच के कारण ही की जातीं हैं. दुर्भाग्यवश नए नोटों के फिर से बाजार में आ जाने के बाद अब हालात पहले की ही तरह ख़राब हो गए हैं.

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10. हवाला कारोबार पर रोक भी नोटबंदी के समय ही लगी थी. हवाला कारोबार में रुपया दो पक्षों की मांग पर एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है.

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नोटबंदी की कमियां और उससे नुकसान
नोटबंदी से पहले अर्थव्यवस्था में 500 रुपये के नोटों की संख्या 17165 मिलियन थी और 1000 के नोटों की संख्या 6858 मिलियन थी जिनकी कुल बाजार कीमत 15.44 लाख करोड़ थी. नोटबंदी के बाद जून 2017 में RBI ने बताया कि लोगों ने अर्थव्यवस्था में उपलब्ध कुल रकम 15.44 लाख करोड़ में से 15.28 लाख करोड़ (कुल मुद्रा पूर्ती का 99%) नोट सफ़ेद धन के रूप में जमा करा दिया है अर्थात सिर्फ 16000 करोड़ रुपये की रकम ही लौटकर नही आई है. आसान शब्दों में कहा जाये तो सरकार को केवल 16000 करोड़ का काला धन ही मिला है.
1. अपेक्षित परिणाम नही मिले: रिज़र्व बैंक ने कहा है कि नोटबंदी के बाद 16000 करोड़ रुपये की रकम वापस बैंकों में नही आई है जो कि एक तरह से सरकार का फायदा है लेकिन रिज़र्व बैंक को नए नोटों की छपाई करने में 7,965 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े है. इस प्रकार सरकार को नोटबंदी से 8035 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ हुआ है.
2. भ्रष्टाचार में कमी नही आई है: सरकार का दावा है कि नोटबंदी को भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए की गयी थी जो कि अपने उद्येश्य में सफल होती नही दिखी है क्योंकि सरकारी ऑफिसों में भ्रष्टाचार में कोई कमी नही आई है.
3. आतंकबाद में कमी का तर्क: कुछ लोगों का मानना है कि नोटबंदी से कश्मीर में आतंकी गतिविधियाँ कम हो गयी है, यह तर्क भी केवल कुछ समय के लिए (जब तक नयी मुद्रा का प्रसार नही हुआ था) ही सही था, नोटबंदी से आतंकबाद में लम्बे समय तक कमी नही आई है; कश्मीर में सेना के साथ रोज होती आतंकी मुठभेड़ इसका सबूत हैं.

4. नोट छपाई की लागत: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016 में छपाई नोट की लागत बढ़कर 7,965 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2016 में 3,421 करोड़ रुपये से बढ़ी थी.

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image source:Business Standard
5. नकली नोटों में कमी का तर्क: समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2010 में 7.62 लाख नकली नोटों का पता लगाया था, जो कि वित्त वर्ष 2016 में 6.32 लाख था. इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों जिनमे राजधानी दिल्ली भी शामिल है, इन जगहों पर एटीएम से नकली नोट निकलने की ख़बरें सभी ने सुनी होंगी. इसलिए नकली नोटों की समस्या जस की तस बनी हुई है.
6. रोजगार में कमी: नोटबंदी से बहुत बड़ी संख्या में लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था यही कारण है कि वर्तमान समय में बेरोजगारी अपने सर्वोच्च स्तर पर है.

unemployment rate india 2017
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7. जीडीपी विकास दर में कमी: नोटबंदी के दौरान बहुत से उद्योग धंधों में काम काज ठप्प रहा था जिससे देश के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बहुत गिरावट आई थी और इसी कारण देश की विकास दर जो कि सितम्बर 2016 में 7.5% के स्तर पर थी वो नवम्बर 2016 की नोटबंदी के बाद जून 2017 में 5.7% के स्तर पर आ गयी थी. इस प्रकार नोटबंदी से भारत की विकास दर लगभग 1.5% कम हो गयी है.

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ज्ञातव्य है कि भारत रक्षा क्षेत्र में अपने जीडीपी का 1.5% के लगभग ही खर्च करता है.
नोटबंदी के कम सफल होने के पीछे एक सबसे बड़ा कारण जन धन योजना में खोले गए खाते थे.अमीर लोगों ने इन भोले गरीबों का एक बार फिर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया और इनके खातों में काला धन जमा कराकर उसे सफ़ेद कर लिया. नोटबंदी के 100 दिन के अन्दर 2.25 करोड़ जनधन खाते खोले गए और इनमे 3 महीने के अंदर 19500 करोड़ रुपये जमा कराये गए. इस नोटबंदी के कारण ही जनधन खातों में जीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या घटकर 21% रह गयी है. जन धन योजना अपने आप में एक बहुत ही बढ़िया और क्रांतिकारी योजना थी लेकिन भ्रष्ट लोगों ने इसे भी अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर लिया है.
सारांश रूप में यह कहा जा सकता है कि देश की भ्रष्ट मशीनरी को ठीक करने के लिए नोटबंदी एक साहसिक कदम था जिसे जनता के बहुत बड़े हिस्से का समर्थन भी मिला है. लेकिन यदि इस योजना को कुछ तैयारी के साथ लागू किया जाता तो इसके परिणाम उम्मीद के अनुसार होते. हालाँकि यह उम्मीद की जाती है कि इस साहसिक कदम के दूरगामी परिणाम जनता के सामने जरूर  आयेंगे.

Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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