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जैव विविधता संरक्षण पर सारांश

जैव विविधता का आशय जीनो, जातियों एवं पारितंत्रो की समग्रता हैl जैव विविधता शब्द का प्रयोग पहली बार आर. एफ दसमान ने 1968 में किया थाl इसकी सामाजिक प्रासंगिकता इसलिए है क्योंकि नई फसलें हो या औषधियाँ, पेट्रोलियम स्थानापन्न तथा  जैव नाशको एवं अन्य उत्पादों के रूप में संपत्ति के शक्तिशाली  स्रोत  का प्रतिनिधत्व करता हैl जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता वाले मुख्य कारकों के बारे में इस लेख में चर्चा की गई हैl
Jun 6, 2017 13:02 IST
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जैव विविधता का आशय जीनो, जातियों एवं पारितंत्रो की समग्रता हैl जैव विविधता शब्द का प्रयोग पहली बार आर. एफ दसमान ने 1968 में किया थाl इसकी सामाजिक प्रासंगिकता इसलिए है क्योंकि यह नई फसलें, औषधियाँ, पेट्रोलियम स्थानापन्न तथा  जैव नाशको एवं अन्य उत्पादों के रूप में संपत्ति के शक्तिशाली  स्रोत  का प्रतिनिधत्व करता हैl जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता वाले मुख्य कारकों के बारे में नीचे चर्चा की गई है:

 Biodiversity Conservation

Source: cdn.slidesharecdn.com

जैव विविधता संरक्षण आवश्यकता के कारक

1. पारिस्थितिक आवश्यकता (Ecological Necessity): यह जैव-विज्ञान का एक प्रसिद्ध तथ्य है कि सभी जीवों का अपना खाद्य-श्रृंखला होता है और अबातीय पर्यावरण में ही एक दुसरे के संपर्क में रहते हैंl इसलिए, अपने मूल रूप में वन्य जीवन को संरक्षित करके प्रकृति के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

2. जीवविज्ञान आवश्यकता (Biology Necessity): फसलों की पैदावार और पशु उत्पाद की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इसलिए, फसलों और जानवरों से उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक ने आनुवांशिक संशोधन पर काम किया। प्रजनन कार्यक्रम के माध्यम से यह संशोधन हमारी आवश्यकता है, लेकिन यथासंभव मूल वन्य जीवों की रक्षा के लिए और संरक्षित करने के लिए आवश्यक है।

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3. आर्थिक आवश्यकता (Economic Necessity): वन्य जीवन, पौधों, जानवरों और सूक्ष्म जीवों के सभी तीन रूपों में अलग-अलग आर्थिक मूल्य हैं। पौधे हमें लकड़ी, कागज, लुगदी, रबड़, ड्रग्स, फाइबर, कोयला आदि देता है, जबकि पशु हमें पौष्टिक भोजन, रेशम, ऊन, चमड़े, शहद, एसीटोन, सिरका, मीथेन आदि देता है। इसलिए, स्थिरता के रास्ते में संसाधनों को अनुकूलित करना बहुत महत्वपूर्ण हैl

4. वैज्ञानिक आवश्यकता (Scientific Necessity): शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए जैव विविधता को संरक्षित करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए: - विज्ञान के कारण जैविक और दवा दोनों को बढ़ावा देने के लिए गिनी-सूअर, खरगोश, बंदरों, कुत्तों, मेंढ़कों और मछली का उपयोग वैज्ञानिक समुदाय द्वारा किया गया है। इसलिए, यह वन्यजीव संरक्षण के लिए एक कारण है।

5. सांस्कृतिक आवश्यकता (Cultural Necessity): सांस्कृतिक विविधता को भी जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है क्योंकि दुनिया के अधिकांश हिस्सों में साहित्य और धर्म प्रकृति पर भारी निर्भर करते हैं। कुछ पौधों का धर्म से अटूट नाता है। उदाहरण के लिए- हिंदू धर्म में तुलसी, याक का तिब्बत में धार्मिक स्थान, ईसाई में टर्की का और सुअर का इस्लाम में निषिद्ध है।

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6. नैतिक आवश्यकता (Ethical Necessity): जैव विविधता के संरक्षण के लिए नैतिकता का होना बहुत जरूरी है क्योंकि मानवों के अनैतिक कार्यो की वजह से बहुत से प्रजाति विलुप्त के कगार पर हैंl

7. सौन्दर्यपरक एवं सांकृतिक आवश्यकता (Aesthetic Necessity): जैव विविधता का सौन्दर्य में योगदान है l उदाहरण के तौर पे पारिस्थितिक पर्यटन, पक्षी निरक्षण, वन्य जीवन, पालतू जीवों की देखभाल, बागवानी इत्यादि l मानव के सम्पूर्ण इतिहास में लोगो ने जैव विविधता के महत्व को मानव जाति के अस्तित्व से सांस्कृतिक एवं धार्मिक विश्वास के माध्यम से जोड़ता हैl

यह जैव विविधता का संरक्षण करना जरूरी है क्योंकि हमने पौधों, जानवरों और सूक्ष्म जीवों की प्रजातियों के किसी भी मूल्यवान उपयोग की खोज नहीं की है, ये हो सकता है कि आने वाली पीढ़ी इष्टतम और साथ ही प्रजातियों के मूल्यवान भी सीखें। ऊपर बताए गए सभी कारकों में वन्यजीव के महत्व को और इसके संरक्षण की आवश्यकता को दर्शाया गया है।

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