हिमालयी नदियां को भारत की जीवनदायिनी कहा जाता है। ये नदियां हिमालय पर्वत की ऊंची चोटियों से निकलती हैं और और देश के विशाल भूभाग को सींचती हुई समुद्र तक अपना रास्ता तय करती हैं। दूसरी तरफ, भारत में जब भी बात नदियों की होती है, तो इनका सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक महत्त्व बढ़ जाता है ।
उत्तर भारत में कई प्रमुख नदियों का प्रवाह होता है, हालांकि क्या आप जानते हैं कि हिमालयी नदियों में सबसे पश्चिमी नदी कौन-सी है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
उत्तर भारत में हिमालयी नदियां
सबसे पहले हम उत्तर भारत की प्रमुख नदियों के बारे में जान लेते हैं, तो आपको बता दें कि यह यमुना, गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, सतलुज और ब्यास नदी है। इन नदियों में गंगा और यमुना उत्तर भारत में सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से अधिक महत्त्व रखती हैं।
हिमालयी सबसे पश्चिमी नदी
अब हम यह जान लेते हैं कि हिमालयी सबसे पश्चिमी नदी कौन-सी है ? आपको बता दें कि यह सिंधु नदी है। यह भारत में सबसे पहली नदी के तौर पर जानी जाती है।
कहां से निकलती है नदी
सिंधु नदी का उद्गम कैलाश पर्वत से होता है, जो कि बोखुर के निकट हिमालय से निकलती है। इसकी कुल लंबाई 2880 किलोमीटर है, जिसमें से 1114 किलोमीटर सिर्फ भारत में ही पूरा करती है।
तिब्बत में इस नाम से जानी जाती है नदी
तिब्बत में सिंधु नदी सिंगी खंबान और शेरमुख नाम से जानी जाती है।
बाएं और दाएं तरफ की सहायक नदियां
अब हम सिंधु नदी के बाएं और दाएं तरफ की नदियों की बारे में जानेंगे। आपको बता दें कि सिंधु के बाएं तरफ की नदियां गिलगित, श्योक और काबुल नदी है, जबकि दाएं तरफ की नदियां पंचनद(सतलुज, झेलम, चेनाब, सतलज और व्यास) जांस्कर है।
कहां होता है नदी का अंत
हर नदी का कहीं न कहीं अंत होता है। इस कड़ी में सिंधु नदी भी का अंत होता है। आपको बता दें कि यह नदी भारत से निकलने के बाद पाकिस्तान पहुंचती है और यहां के बाद कराची शहर के पूर्व में अरब सागर में जाकर मिल जाती है।
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