कोलोन इंफेक्शन एक क्रोनिक पाचन बीमारी है जो कोलोन के अंदरूनी परत की सूजन को संदर्भित करती है. इसे कोलाइटिस भी कहा जाता है जो कि बड़ी आंत है. कोलाइटिस होने के विभिन्न कारण हैं जिनमें इंफेक्शन, इंफ्लामेटरी बोवेल डिजीज (inflammatory bowel disease, IBD), इस्केमिक कोलाइटिस (ischemic colitis), एलर्जी से रिएक्शन (allergic reactions) और माइक्रोस्कोपिक कोलाइटिस (microscopic colitis) शामिल हैं.
अधिकतर कोलोन इंफेक्शन ऐसा भोजन का सेवन करने से होता है जिसे पचाने में हनारे पाचन तंत्र को काफी मेहनत करनी पड़ती है. या ऐसा कह सकते है कि भोजन हमारे शरीर में सही से पच नहीं पाता है. इस तरह का वेस्ट फ़ूड कोलोन में जमा होने लगता है और साथ ही रसायनिक तत्व जो कि पाचनतंत्र में इस तरह के खाने को पचाने में बनते हैं वे भी अलग-अलग तरह से जमा होने लगते हैं और नुक्सान पहुँचाने लगते हैं. इतना ही नहीं जब इस प्रकार की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है तो कोलोन में बलगम या कफ जमा हो जाता है और मल त्याग करते वक्त काफी दिक्कतें आने लगती हैं.
आइये कोलोन इंफेक्शन होने के कारणों के बारे में जानते हैं
कई अन्य स्थितियां हैं जो कोलोन की सूजन का कारण बन सकती हैं जैसे:
इंफेक्शन (Infection)
कोलाइटिस संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया और परजीवी के कारण हो सकता है. संक्रामक कोलाइटिस से पीड़ित व्यक्ति को डायरिया, बुखार और मल के नमूने के परीक्षण में साल्मोनेला (salmonella), कैम्पिलोबेक्टर (campylobacter) और ई.कोलाई (Escherichia coli) सहित एंटेरोपैथोजेन (enteropathogens) के लिए सकारात्मक परीक्षण होता है. यह संक्रमण के कारण पर निर्भर करता है; यह दूषित पानी, खाद्य जनित बीमारी या खराब स्वच्छता से अनुबंधित भी हो सकता है. आपको बता दें कि Pseudomembranous colitis नाम का एक और प्रकार का संक्रामक कोलाइटिस है. बैक्टीरिया के अतिवृष्टि के कारण इसे एंटीबायोटिक-संबंधित कोलाइटिस के रूप में भी जाना जाता है.
इंफ्लामेटरी बोवेल डिजीज (Inflammatory Bowel Disease, IBD)
यह एक कोलोन संक्रमण का अधिक सामान्य रूप है. जब पाचनतंत्र में सूजन आ जाती है, तो IBD होता है. मूल रूप से, यह एक बिमारी है. कई बीमारीयां IBD के अंतर्गत आती हैं, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
क्रोहन रोग (Crohn's disease): जब संक्रमण पाचन तंत्र की आंतरिक परत में होता है. इस स्थिति को Crohn's disease के रूप में जाना जाता है. इस संक्रमण में, पाचनतंत्र का कोई भी हिस्सा संक्रमित हो सकता है. लेकिन आमतौर पर या सबसे अधिक बार यह इलियम में विकसित होता है यानी छोटी आंत का अंतिम भाग.
अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative colitis): कोलोन और मलाशय के सबसे भीतरी परत में पुरानी सूजन या काफी टाइम से सूजन और अल्सर होता है. इस कोलाइटिस से पीड़ित लोगों में पेट के कैंसर का खतरा अधिक होता है.
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इस्केमिक कोलाइटिस (Ischemic colitis)
जब कोलोन के हिस्से में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है जिसके कारण ऑक्सीजन जोकि आवश्यक होती है वह पाचन तंत्र में कोशिकाओं के माध्यम से नहीं पहुंच पाती है. यह मुख्य रूप से संकुचित या अवरुद्ध धमनियों के कारण होता है. इस्केमिक कोलाइटिस भी कोलोन के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है लेकिन आमतौर पर, इससे पीड़ित व्यक्ति को पेट के बाईं ओर दर्द महसूस होता है. यह धीरे-धीरे या अचानक हो सकता है.
एलर्जी से रिएक्शन (Allergic reactions)
ऐसा देखा गया है कि वयस्कों की तुलना में शिशुओं में इस तरह की बीमारी अधिक होती है. यह लगभग 2 से 3 प्रतिशत शिशुओं को प्रभावित करती है. यह मूल रूप से गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन के कारण होने वाली सूजन होती है. इस संक्रमण से पीड़ित एक बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है, और उसके मल में रक्त या बलगम हो सकता है. एनीमिया और कुपोषण भी संभव हो सकता है.
यहीं आपको बता दें कि ईोसिनोफिलिक (Eosinophilic) कोलाइटिस एलर्जी कोलाइटिस के समान है. यह आमतौर पर शुरुआती बचपन में ही ठीक हो जाती है. लेकिन किशोरों और वयस्कों में, इस तरह की हालत अक्सर काफी पुरानी या क्रोनिक होती है.
माइक्रोस्कोपिक कोलाइटिस (Microscopic colitis)
जैसा कि नाम से पता चलता है, इसे केवल एक माइक्रोस्कोप के माध्यम से देखा जा सकता है. यह लिम्फोसाइटों (lymphocytes) में वृद्धि के कारण होता है जो कि कोलोन की परत में मौजूद श्वेत रक्त कोशिका है. यह दो प्रकार के होते हैं:
- लिम्फोसाइटिक कोलाइटिस (Lymphocytic colitis): इसमें लिम्फोसाइटों की संख्या अधिक होती है और ऊतक और कोलोन की परत मोटी हो जाती है.
- कोलेजनस कोलाइटिस (Collagenous colitis): इस प्रकार के रोग में कोलोन के परत के नीचे कोलेजन की परत सामान्य से अधिक मोटी होती है.
दवा-प्रेरित कोलाइटिस (Drug-induced colitis)
कुछ दवाओं के कारण, बीमारी हो सकती है जैसे कि nonsteroidal anti-inflammatory drugs (NSAIDs) और लोगों को कोलोन में सूजन आ जाती है.
कोलोन संक्रमण होने के लक्षण
जैसा कि ऊपर चर्चा की गई है कि विभिन्न प्रकार के कोलाइटिस होते हैं और सबके लक्ष्ण भी अलग-अलग होते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- बुखार
- डायरिया- रक्त के साथ या बिना
- जी मिचलाना
- पेट में दर्द और ऐंठन होना
- वजन घटना
- थकान
- सूजन
- बार-बार मल त्याग करना
- डिप्रेशन
- जोड़ों में दर्द और पीड़ा
- भूख में कमी आना या भूख कम लगना
- कोलोन ऊतक में सूजन का आना
- पेट मरोड़ना
इसलिए, हम कह सकते हैं कि प्रकार और गंभीरता के आधार पर कोलोन संक्रमण या कोलाइटिस विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं. बीमारी की अवधि के साथ कोलोरेक्टल (colorectal) कैंसर भी विकसित हो सकता है. इलाज किस प्रकार का दिया जाएगा यह बिमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है. इसमें एंटी-इंफ्लामेटरी दवाएं, एंटीबायोटिक्स, सप्लीमेंट्स, सर्जरी या ऑपरेशन, कीमोथेरपी इत्यादि जैसे उपचार दिए जा सकते हैं. शरीर की इम्युनिटी कम हो जाती है. व्यक्ति संक्रमण को आसानी से पकड़ सकता है और कभी-कभी यह संक्रमण जीवन के लिए खतरा भी बन जाता है. तो अब आप जान गए होंगे कि कोलोन इंफेक्शन क्या होता है, कैसे होता है और इसके क्या लक्ष्ण हो सकते हैं.
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