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चाबहार बंदरगाह का भारत के लिए क्या महत्व है?

चीन, भारत को ”स्ट्रिंग्स ऑफ़ पर्ल्स प्रोजेक्ट”के जरिये भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश कर रहा है. इसी के जबाब में भारत, ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के लिए 20 अरब डॉलर (करीब 1,363 अरब रुपए) की परियोजना शुरू करने के लिए 2015 में हस्ताक्षर कर चुका है. यह एक त्रिपक्षीय समझौता है जिसमे भारत और ईरान के साथ अफगानिस्तान भी शामिल है.
Dec 4, 2017 21:00 IST
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Importance of Chabahar Port for India
Importance of Chabahar Port for India

चीन, भारत को “स्ट्रिंग्स ऑफ़ पर्ल्स प्रोजेक्ट” के जरिये भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिश कर रहा है. हाल ही में चीन ने पाकिस्तान के “ग्वादर बंदरगाह” के विकास के लिए 46 अरब डॉलर (करीब 3,131 अरब रुपए) का निवेश किया है. इसी कारण भारत भी अमेरिका और चीन के विरोध के बावजूद ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने के लिए 20 अरब डॉलर (करीब 1,363 अरब रुपए) की परियोजना शुरू करने के लिए 2015 में हस्ताक्षर कर चुका है. यह एक त्रिपक्षीय समझौता है जिसमे भारत-ईरान के साथ अफगानिस्तान भी शामिल है.

Chabahar Port

चाबहार बंदरगाह के बारे में:-

चाबहार, ईरान में सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत का एक शहर है. यह एक मुक्त बन्दरगाह है और ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है. यह ईरान का सबसे दक्षिणी शहर है. इस नगर के अधिकांश लोग बलूच हैं और बलूची भाषा बोलते हैं. इतिहास में जाएं तो मध्य युगीन यात्री अल-बरूनी ने चाबहार को भारत का प्रवेश द्वार (मध्य एशिया से) भी कहा था. चाबहार का मतलब होता है चार झरने.

भारत के लिए इस समझौते का महत्व:-

यह बंदरगाह ईरान के लिए रणनीति की दृष्टि से बहुत होने के साथ-साथ भारत के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है. इसके माध्यम से भारत के लिए समुद्री और सड़क मार्ग से अफगानिस्तान पहुँचने का मार्ग प्रशस्त हो जायेगा और इस स्थान तक पहुँचने के लिए पाकिस्तान के रास्ते की आवश्यकता नहीं होगी. इस करार पर नितिन गडकरी व ईरान के परिवहन व शहरी विकास मंत्री डॉ. अब्बास अहमद ने दस्तखत किए थे.

Iran India Afghanistan Sign Transit

image source:Al-Masdar News

इस बंदरगाह का इस्तेमाल कच्चे तेल व यूरिया के परिवहन के लिए किया जाएगा. इससे भारत की परिवहन लागत में काफी बचत होगी. भारत का इरादा चाबहार में दो गोदी दस साल के लिए पट्टे पर लेने का है. इस बंदरगाह का विकास विशेष इकाई (एसपीवी) के जरिये किया जाएगा जो गोदियों (बर्थ) कंटेनर टर्मिनल व बहुउद्देशीय कार्गो टर्मिनल में बदलने के लिए 8.52 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी.

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इस परियोजना के तहत भारत को सिर्फ बंदगाह ही नहीं, इससे सटे इलाके में अन्य औद्योगिक इकाइयां भी स्थापित करनी हैं. चाबहार बंदरगाह विकसित करने से भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपनी पहुँच बढ़ाने में मदद मिलेगी. अभी भारत ऐसा नही कर पा रहा है क्योंकि पाकिस्तान अपनी जमीन को भारत को इस्तेमाल नही करने दे रहा है.

भारत की ओर से कौन कंपनी इसमें भाग लेगी

भारत सरकार द्वारा स्थापित एक कंपनी "ग्लोबल पोर्ट्स लिमिटेड" (आईजीपीएल), चाबहार परियोजना का निर्माण कार्य संभालेगी. आई जी पेट्रोकेमिकल्स ने पोर्ट चलाने के लिए एक कंपनी की स्थापना की अनुमति के लिए आवेदन किया था. इस योजना में आई जी पेट्रोकेमिकल्स दो नए टर्मिनलों का निर्माण करेगी जिसमे एक कंटेनर वाहिनियों के लिए और एक बहुउद्देशीय जहाजों के लिए है.

यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि चाबहार बंदरगाह से पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह भी महज 72 किलोमीटर दूर रह जाता है.

Gwadar Port

पिछले 20 साल में चाबहार में 1,800 कंपनियां पंजीकृत हुई हैं लेकिन बीते 3 साल में यह संख्या 60% तक बढ़ गई है. इसी तरह निवेश भी बढ़ा है. भारत में पेट्रोकेमिकल्स, इस्पात, उर्वरक आदि क्षेत्रों में सक्रिय कंपनियां यहां अपनी रुचि दिखा रही हैं और लगातार इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारियां ले रही हैं.

हालांकि अभी भारत के कारोबारी यह अंदाजा लगाने की कोशिश ज्यादा कर रहे हैं कि चाबहार में निवेश करने के लिए यह सही समय है या नहीं क्योंकि यूरोपीय बैंक अभी ईरान की किसी भी परियोजना में पैसे लगाने से हिचक रहे हैं. इस हिचक का सबसे बड़ा कारण ईरान पर अमेरिका सहित अन्य देशों द्वारा लगाये गए प्रतिबन्ध हैं.

अभी ख़बरों में यह सुनने में आ रहा है कि भारत इस प्रोजेक्ट पर बहुत ही धीमी गति से काम कर रहा है. ईरान ने कहा है कि यदि भारत और देर करता है तो वह अन्य देशों से निवेश माँग सकता है जिनमे चीन भी शामिल है, और वह इस प्रोजेक्ट में अपनी इच्छा भी जता चुका है. इसलिए समय की मांग यह है कि भारत सरकार को इसमें और देर नही करनी चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि प्रोजेक्ट तय समय सीमा के भीतर ही पूरा कर लिया जाये.

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