इंग्लैंड में शैम्पू की शुरुआत किसने की थी?

शैम्पू के बारे में तो सब जानते हैं और अधिकतर सब इसको इस्तेमाल भी करते हैं चाहे वो भारत में हो या बाहर. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शैम्पू की इंग्लैंड में शुरुआत किसने की थी और कैसे. साथ ही जानेंगे शेख दीन मोहम्मद के बारे में जो कि अंग्रेजी भाषा में किताब लिखने वाले पहले भारतीय थे.
Jan 15, 2019 17:34 IST
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    ये हम सब जानते हैं कि शैम्पू आज के समय में रोजमर्रा ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है. इसका अधिकतर सब लोग इस्तेमाल करते हैं. परन्तु क्या आपने कभी सोचा है कि शैम्पू करने की तकनीक का विकास किसने किया, किसने इसकी खोज की और कैसे? इंग्लैंड में शैम्पू तकनीक को कौन लेके आया, किसने इसकी शुरुआत की. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

    क्या आप शेख दीन मोहम्मद को जानते हैं?

    शेख दीन मोहम्मद अपनी प्रतिभा के लिए काफी प्रसिद्ध थे. वह एक एंग्लो-इंडियन यात्री, सर्जन और उद्यमी थे. उनका जन्म 1759 में पटना (पहले बंगाल प्रेसीडेंसी) में हुआ था. वह ब्रिटिश सेना में पहले सर्जन थे और 1810 में लंदन में उन्होंने पहला भारतीय रेस्टोरेंट खोला था. इतना ही नहीं, वह पहले भारतीय लेखक थे, जिन्होंने अंग्रेजी भाषा में एक किताब लिखी थी. इन सबके अलावा भी उन्होंने कई और नई चीज़ों की शुरात की. यहीं हम आपको बता दें कि गूगल डूडल ने शेख दीन मोहम्मद जो कि एंग्लो-इंडियन ट्रैवलर थे की 260वीं जयंती भी मनाई है क्योंकि ये पहले भारतीय लेखक हैं जिन्होंने अंग्रेजी में एक पुस्तक प्रकाशित की और यूनाइटेड किंगडम (UK) में बहुत सारी सफलताएं हासिल की.

    शेख दीन मोहम्मद के जीवन के बारे में

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    Source: www.recipes4us.co.uk.com
    उनका जन्म 15 जनवरी, 1759 में पटना, भारत में हुआ था. मूल रूप से, वे बक्सर से थे. उनके पिता नाई थे और ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करते थे. वे विभिन्न प्रकार की तकनीकों को भी जानते थे. मोहम्मद ने छोटी उम्र में कुछ उत्पादों को बनाना सीख लिया था जैसे साबुन और शैंपू. वे 10 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया. फिर, उन्हें कैप्टन गॉडफ्रे इवान बेकर के विंग में शामिल कर लिया गया. इवान बेकर एक एंग्लो-आयरिश प्रोटेस्टैंट (विरोध करने वाले) ऑफिसर थे. बड़े होने के बाद, उन्हें एक प्रशिक्षु सर्जन के रूप में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में भर्ती किया गया. वे 1786 में अंग्रेजी पढ़ने के लिए आयरलैंड गए, जहां वे जेन देली नाम की एक आयरिश लड़की से मिले और शादी रचाई.

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    इंग्लैंड में शैम्पू की शुरुआत किसने की थी?

    काफी दिनों तक सेना में काम करने के बाद वे वर्ष 1782 में ब्रिटेन आ गए थे. लगभग 8 साल ब्रिटेन में बिताने के बाद उन्होंने वहां पर पहला भारतीय रेस्टोरेंट खोला. इस रेस्टोरेंट को "हिंदुस्तान कॉफी हाउस" के नाम से जाना जाता था. हालांकि उनका ये रेस्टोरेंट ज्यादा नही चल सका और दो साल के भीतर ही उनको बंद करना पड़ा.

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    Source: www.bhuntold.co.uk.com

    क्या आप जानते हैं कि मोहम्मद ने रेस्टोरेंट के बंद होने के बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ी और एक बाथ सपा खोला. इसमें वह अपने ग्राहकों को हर्बल स्टीम बाथ देते थे. वे बाथ स्पा के साथ अपने ग्राहकों की चंपी यानी सिर की मालिश भी किया करते थे. इसको उन्होंने शैम्पू का नाम दे दिया था. यूरोप में 'शैम्पू बाथ' की शुरुआत करने वाले मोहम्मद पहले व्यक्ति बने. इस बाथहाउस का नाम 'मोहम्मद बाथ' रखा गया. यहीं आपको बता दें कि शेख मोहम्मद की चंपी पूरे ब्रिटेन और यूरोप में काफी प्रसिद्ध हो गई थी. यूरोप में 'शैम्पू बाथ' की शुरुआत करने वाले पहले व्यक्ति बने. मोहम्मद के ग्राहक में प्रिंस ऑफ वेल्स, जॉर्ज IV और बाद में विलियम IV भी शामिल हुए. वर्ष 1822 में किंग जार्ज IV ने उन्हें अपनी निजी चंपी के तौर पर नियुक्त कर लिया था. इससे उनके कारोबार में काफी बढ़ोतरी भी हुई. इंग्लैंड के ब्राइटन संग्रालय में आज भी शेक मोहम्मद की एक भव्य तस्वीर मौजूद है और उन्हें लोग दो देशों यानी भारत और इंग्लैंड की संस्कृति को जोड़ने के लिए याद करते हैं.

    शेख दीन मोहम्मद की पुस्तकें

    1794 में शेख दीन मोहम्मद ने अपनी पहली पुस्तक लोखी, जिसका नाम था "The travels of Dean Mahomed". इसमें उन्होंने कई भारतीय शहरों का उल्लेख किया और अपने अनुभवों और सैन्य संघर्षों के पहले गवाह और भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रिटेन की विजय का उल्लेख किया. इसमें स्थानीय राज्यों से सैन्य संघर्ष का भी विवरण दिया गया है. 1822 में, उन्होंने "Shampooing or Benefits Resulting from the use of Indian Medical Vapour Bath" नामक एक पुस्तक लिखी, जो एक बेस्टसेलर बन गई और 1800 के दशक की शुरुआत में भारतीय और ब्रिटिश संस्कृति को विलय करने का श्रेय दिया गया.

    कुछ रोचक तथ्य शेख दीन मोह्हमद के बारे में

    - शेख दीन मोहम्मद के हर्बल स्टीम बाथ और चंपी से इंग्लैंड के लोगों को काफी आराम मिलता था और इसलिए मोहम्मद वहां पर काफी प्रसिद्ध हुए.

    - 1810 में उन्होंने इंग्लैंड में पहला भारतीय व्यंजन परोसने वाला एक रेस्टोरेंट (हिन्दुस्तानी कॉफ़ी हाउस) खोला था. उनके रेस्टोरेंट में भारतीय व्यंजनों के साथ हुक्का भी मिलता था.

    - आज से 200 वर्ष से भी कुछ अधिक समय पहले स्थापित भारतीय रेस्टोरेंट के एक दुर्लभ मेन्यु कार्ड की नीलामी में 11,344 डॉलर यानी करीब साढ़े सात लाख रूपये की बोली लगाई गई. इस रेस्टोरेंट में परोसे जाने वाले पकवानों में 'पाइनेपल पुलाव' और 'चिकन करी' जैसे व्यंजनों के नाम शामिल हैं और ये ही इसकी खासियत भी थी.

    - वह पहले भारतीय लेखक थे जिनकी अंग्रेजी में 1794 में एक किताब छपी थी.

    - भारत और इंग्लैंड के बीच अच्छे संबंध स्थापित करने में उनका एक अहम योगदान रहा है.

    - 1822 में चौथे किंग जॉर्ज को शेख दीन मोहम्मद को अपना पर्सनल "शैंपूइंग सर्जन" रख लिया था.

    - उनके हर्बल स्टिम बाथ से लोगों की कई बीमारियां ठीक हुई और विभिन्न प्रकार के शारीरिक दर्द से भी राहत मिली. इससे वे डॉक्टर ब्राइटन के रूप मंश लोकप्रिय हुए.

    - शेख दीन मोहम्मद  की मृत्यु 1851 में 32 ग्रैंड परेड, ब्राइटन में हुई थी. उन्हें ब्राइटन के सैंट निकोलस चर्च, के ही एक कब्रिस्तान में दफनाया गया.

    - उन्होंने यूरों में भारतीय व्यंजनों और शैम्पू की शुरुआत की.

    तो अब आप जान गए होंगे की किसने इंग्लैंड में शैम्पू की शुरात की और किस प्रकार से मोहम्मद प्रसिद्ध हुए.

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