खर्राटे लेना एक आम बात है. अकसर आपने लोगों को खर्राटे लेते हुए सुना होगा. अधिकतर सबके घर में कोई न कोई खर्राटे लेता ही है. वैसे तो खर्राटे एक आम परेशानी है परन्तु हमें इसको लाईटली नहीं लेना चाहिए. क्योंकि इसको बीमारी बनते समय देर नहीं लगती. जो व्यक्ति खर्राटे लेता है उसके साथ सोया हुआ इंसान परेशान हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि खर्राटे होते क्या है, यह किन कारणों की वजह से आते है, क्या खर्राटे आने के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है, क्या यह एक बीमारी है आदि के बारे में इस लेख के माध्यम से अध्यन करेंगे.
खर्राटे क्या होते हैं?
सोते वक्त सांस लेने के साथ जब तेज आवाज और वाइब्रेशन होती है उसे खर्राटे कहते है. खर्राटे की आवाज तब पैदा होती है, जब हवा का बहाव गले की त्वचा में स्थित ऊतकों में कंपन पैदा कर देता है. खर्राटे सांस अंदर लेते समय आते हैं. नाक या मुंह किसी से भी खर्राटों की आवाज आ सकती है. क्या आप जानतें है कि खर्राटे हेल्थ संबंधी परेशानियों की और इशारा भी करते हैं. इसको हमें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार खर्राटों की आवाज हलकी होती है तो कई बार तेज़. अगर खर्राटों का इलाज सही समय पे ना किया जाए तो स्लीप एप्निया हो सकता है. स्लीप एप्निया एक सामान्य विकार है जिसमें नींद के दौरान सांस में एक या कई अवरोध होते हैं या सांसें उथली हो जाती हैं. यह दीर्घकालीन स्थिति है जो आपकी नींद में बाधा डालती है.
खर्राटे क्यों आते हैं?
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ऐसा कहा जाता है कि ज्यादा थकान होने के कारण खर्राटे आते है. परन्तु ऐसा है नहीं. सोते समय सांस में रुकावट का होना खर्राटे लेने का मुख्य कारण है. जब मुंह और नाक के अंदर से हवा निकलने के रास्ते में रुकावट होती है या निकलने वाली जगह कम हो जाती है तब खर्राटे की स्थिति उत्पन्न होने लगती है. हवा का बहाव कम होने के कई कारण हो सकते हैं:
- सर्दियों के दिनों में कुछ लोगो को खर्राटे ज्यादा आते है या फिर साइनस में संक्रमण के दौरान भी आते हैं. नाक के अंदर निकले छोटे-छोटे कणों के कारण भी वायुमार्ग में रुकावटें आ सकती हैं.
- जब नाक की हड्डी टेढ़ी हो जाती है और उसमें मांस बढ़ जाता है तब भी सांस लेने में प्रेशर लगाना पड़ता है. जिस वजह से सांस लेने के साथ आवाज आती है और उसे खर्राटे कहते है.
- जब गले और जीब की मांसपेशियां कमजोर होने के कारण लटकने लगती हैं तो रास्ते में रुकावट आ जाती है. ऐसा अधिक एल्कोहॉल या नींद की गोलियां लेने के कारण होता है. साथ ही उम्र के बढ़ने से भी मांसपेशियों पर फर्क पड़ता है.
- अकसर मोटापा बढ़ने से गले के ऊतकों का आकार बढ़ जाता है या गर्दन पर ज्यादा मांस लटकने लगता है. लेटते वक्त एक्स्ट्रा मांस के कारण सांस की नली दब जाती है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. जिस कारण खर्राटे आने लगते है.
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- बच्चों में जब टॉन्सिल (tonsils) या एंडीनोइड्स (adenoids) के आकार में वृद्धि होती है तो भी खर्राटे आने की परेशानी हो सकती है.
- हमारे गले के बीच में लटक रहे ऊतक को यूव्यूला टीश्यू कहते हैं. यूव्यूला या तलुए का आकार ज्यादा बढ़ने से नाक से गले में खुलने वाला रास्ता बंद हो सकता है. हवा के संपर्क में आकर यूव्यूला में थर्थराहट उत्पन्न होती हैं जिसे खर्राटे कहा जाता है.
- खर्राटे आने का कारण नीचे वाले जबड़े का छोटा होना भी हो सकता है. जब व्यक्ति का जबड़ा सामान्य से छोटा होता है तो लेटने पर उसकी जीभ पीछे की तरफ हो जाती है और सांस की नली को ब्लॉक कर देती है. ऐसे में सांस लेने और छोड़ने के लिए प्रेशर लगाना पड़ता है, जिस कारण वाइब्रेशन होता है और खर्राटे आते है.
- कई बार सांस लेने वाली नली संकरी और कमजोर हो जाती है, जिस कारण सांस लेते समय आसपास के टिश्यू वाइब्रेट होते हैं और सांस के साथ आवाज आने लगती है, जिसे खर्राटे कहते है.
- अगर किसी व्यक्ति की गर्दन छोटी होती है तब भी सोते समय सांस के साथ आवाज आती है.
खर्राटे होने के कई लक्षण हो सकते हैं
अकसर देखा गया है कि नींद अगर सही प्रकार से न हो तो खर्राटे आ सकते है. स्लीपिंग डिसऑर्डर को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया - ओएसए (obstructive sleep apnea - OSA) भी कहा जाता है. ये जरुरी नहीं की जो खर्राटे ले रहा हो उसे OSA ही हो. कुछ लक्षण इस प्रकार है:
- दिन में ज्यादा नींद आना.
- सुबह सिर में दर्द होना.
- सोने के दौरान नाक से आवाज आना.
- उच्च रक्तचाप
- नींद में बेचैनी
- रात के समय छाती में दर्द.
- रात को सोते समय दम घुटना या हांफना.
खर्राटे लेने से आप कैसे बच सकते हैं
- मोटापे को कम करें.
- नशीली चीजों का सेवन न करें.
- नींद पूरी करें.
- धुम्रपान न करें.
- नाक से सांस लेने में कोई परेशानी हो या किसी तरह की रुकावट हो तो इलाज करवाएं.
- नेजल स्ट्रिप का प्रयोग करें.
अर्थार्त ऐसा कहना गलत नहीं होगा की खर्राटे आने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं जिन पर हमें ध्यान देना चाहिए ताकि यह कोई गंभीर बिमारी न बनजाए.
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