ग्यासुद्दीन का असली नाम ग़ाज़ी मलिक था। वो अलाउद्दीन खिलजी का सेनानायक था। जब खुसरो ने दिल्ली की गद्दी पर कब्ज़ा किया तो गाज़ी मलिक अपने बेटे फख्र मलिक के साथ दिल्ली की ओर कूच किया । अगस्त 1321 ई मे खुसरो मारा गया और इसी के साथ ही चार माह तक चले उसके अन्याय के शासन का अंत हो गया । इसके बाद गाज़ी मलिक 1321 ई मे ग्यासुद्दीन तुगलक नाम रखकर दिल्ली की गद्दी पर बैठा। उसने चार वर्षो तक शासन किया उसके शासन काल मे सुख और शांति थी। ग्यासुद्दीन तुगलक ने बंगाल के खिलाफ जंगी मुहिम शुरु की औऱ दक्षिणी प्रांत को दोबारा हासिल किया ।
ग्यासुद्दीन की मौत 1325 मे उसके उपर एक छत के गिरने से हुई। उसकी मौत के बाद उसका पुत्र फख्र मलिक दिल्ली की गद्दी पर बैठा और उसने मौहम्मद बिन तुगलक नाम अपनाया। उसने शासनकाल 1351 तक चला। उसने 26 वर्षो तक शासन किया।
ग्यासुद्दीन तुगलक के शासनकाल की प्रमुख विशेषताएं:
1- ग्यासुद्दीन ने अलाउद्दीन खिलजी द्वारा शुरू किये गये खाद्य पदार्थो की बिक्री से संबधित कानूनो को दोबारा लागू किया।
2- उसने सेना से लेकर प्रशासन तक सभी आवश्यक क्षैत्रो मे सुधार के प्रयास किये ।
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