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एसबीआई में कर्मचारियों व आश्रितों को मिलने वाली चिकित्सा लाभ

एसबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ उनके परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा लाभ देती है l  अधिवासीय उपचार के मामले में, जिसके लिए मान्यताप्राप्त किसी भी अस्पताल या नर्सिंग होम में इलाज की जरूरत होती है, कर्मचारी को चिकित्सा बिलों और अस्पताल के 100% खर्च की प्रतिपूर्ति की जाती है l   

Nov 9, 2017 12:14 IST
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Medical Benefits for SBI employees
Medical Benefits for SBI employees

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) देश का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक है जो बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों को बहुत सारी अतिरिक्त सुविधाएं मुहैया कराता है l  चिकित्सा लाभ उनमें से एक है l  देश में शाखाओं (ब्रांचेज) की व्यापक रेंज का प्रबंधन कुशल मानव संसाधन प्रबंधन टीम द्वारा किया जाता है l यह टीम उम्मीदवारों की जरूरतों और जिन परिस्थितियों में काम करते हैं, का ख्याल रखती है l  कर्मचारी के चिकित्सा सेवा में सभी चिकित्सीय आवश्यकताओं/ चिकित्सा जटिलताएं शामिल होती हैं l  इसमें बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों के न सिर्फ चिकित्सा बिलों को कवर किया जाता है बल्कि  कर्मचारियों पर पूर्ण रूप से आश्रित परिवार के सदस्यों के इलाज का खर्च और चिकित्सा बिलों के अधिकांश हिस्से की प्रतिपूर्ति भी की जाती है l  

कर्मचारियों के परिवार के लिए चिकित्सा लाभ

एसबीआई बैंक के कर्मचारी के साथ कर्मचारी के परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा लाभ प्रदान करता है l अधिवासीय उपचार के मामले में, जिसके लिए मान्यताप्राप्त किसी भी अस्पताल या नर्सिंग होम में इलाज की जरूरत होती है, कर्मचारी को चिकित्सा बिलों और अस्पताल के पूरे खर्च की प्रतिपूर्ति की जाती है l  कैंसर, ल्युकेमिया, थैलेसीमिया, ट्यूबरकुलोसिस, पारालिसिस, दिल की बीमारी, कुष्ठरोग, हेपेटाइटिस और रुमेटोयॉड अर्थराइटिस जैसी बीमारियों के मामले में कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों या आश्रितों को अस्पताल और दवा के कुल खर्च का 75% तक मिल सकता है l  

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ऐसे अधिवासीय उपचारों के मामले में दवा के बिल और पर्ची संबंधित अधिकारी के पास दवा दिए जाने की तिथि के 90 दिनों के भीतर जमा की जानी चाहिए l  पोलियो, स्ट्रोक की वजह से होने वाले पारालिसिस, गंभीर दुर्घटना से होने वाले हेमरेज, कूल्हा प्रतिस्थापन, लिथोट्रिप्सी, अंग प्रतिस्थापना और ऐसी ही अन्य गंभीर बीमारियों के मामले में बैंक कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के चिकित्सीय खर्चों को भी कवर करती है l  बीमारी के दौरान कराए जाने वाले विभिन्न रेडियोलॉजिकल और पैथोलॉजिकल टेस्ट के लिए बैंक आर्थिक मदद भी करता है l  

चिकित्सा योजना के दायरे में नहीं आने वाले टेस्ट के मामले में कर्मचारी और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को अन्य चिकित्सीय और पैथोलॉजिकल इकाईयों से दरों में रियायत मिलती है l आमतौर पर बैंक का देश भर में विभिन्न डायग्नॉस्टिक टेस्ट सेंटर और पैथलॉजिकल लैब्स के साथ टाई–अप होता है, जिनमें कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों का टेस्ट किया जा सकता है और उनके बिलों का भुगतान बैंक करती है l हालांकि कर्मचारियों को खुद एवं अपने आश्रितों के टेस्ट के लिए बैंक के चिकित्सा अधिकारी या बैंक के किसी अन्य अधिकृत चिकित्सक से रेफरल लेटर लेना होता है l  

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परिवार के कौन से सदस्य लाभ ले सकते हैं?

  • पति या पत्नी, पूरी तरह से आश्रित बच्चे, इसमें सौतेले बच्चे और कानूनी रूप से गोद लिए गए बच्चे भी शामिल हैं और कर्मचारी पर पूरी तरह से आश्रित माता– पिता एवं जो आमतौर पर कर्मचारी के साथ रहते हों, परिवार के ऐसे सदस्य हैं जो एसबीआई बैंक कर्मचारियों को मिलने वाले चिकित्सा का लाभ ले सकते हैं l  
  • 2550/- रु. मासिक से अधिक की आमदनी वाले परिवार के सदस्य आश्रित श्रेणी के तहत नहीं आते और इसलिए बैंक की सुविधाओं का लाभ उन्हें नहीं मिलेगा l  विवाहित महिला कर्मचारियों के मामले में, वे अपने प्राकृतिक माता– पिता या सास– श्वसुर को परिवार के आश्रित सदस्यों के तौर पर शामिल कर सकती हैं लेकिन चिकित्सा लाभ उठाने के लिए उनके माता–पिता/ सास– श्वसुर को उनके साथ ही रहना चाहिए l 

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एसबीआई कर्मचारियों के लिए चिकित्सा सुविधा योजना में प्रावधान

  • कर्मचारी या उनके परिवार के सदस्यों को खुद के लिए पूर्ण प्रतिपूर्ति और आश्रितों के लिए  75% प्रतिपूर्ति हेतु ट्रस्ट प्रबंधन के तहत आने वाले किसी सरकारी/ नगरपालिका अस्पताल या किसी भी निजी अस्पताल में भर्ती होना चाहिए l एसबीआई चिकित्सा योजना के तहत अस्पतालों की सूची में जिन प्राइवेट अस्पतालों का उल्लेख नहीं किया गया है, उनमें से किसी में कर्मचारियों के भर्ती होने पर उन्हें सरकारी अस्पताल या नर्सिंग होम के लिए बैंक द्वारा मंजूर प्रतिपूर्ति ही दी जाएगी l  
  • कर्मचारी या उनके आश्रितों के किसी भी बीमारी या रोग हेतु प्रतिपूर्ति प्रक्रिया के लिए अस्पताल में भर्ती होने के 30 दिनों के पहले और बाद में चिकित्सा बिलों पर विचार किया जाएगा l  बड़े ऑपरेशनों के मामले में बैंक द्वारा मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने के बाद  45 दिनों के भीतर बिल जमा करने की इजाजत होगी l  
  • नर्सों और मरीजों के लिए नियुक्त परिचरों के शुल्क की प्रतिपूर्ति बैंक द्वारा नहीं की जाएगी l हालांकि, विशेष मामलों में अस्पताल अधिकारियों द्वारा निर्धारित नर्सिंग शुल्क मरीज को दिया जाएगा l  
  • सीजेरियन शिशु के मामले में कर्मचारियों या उनकी पत्नी/ पति को ऑपरेशन प्रतिपूर्ति श्रेणी के तहत चिकित्सा लाभ दिया जाएगा l  
  • दवाएं बैंक द्वारा अनुमोदित केमिस्टों से ही खरीदनी होगी l  गलत बिल के मामले में बैंक मरीज के चिकित्सा बिलों का भुगतान रोक सकती है l  
  • एलोपैथिक उपचार के साथ, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी और नेचुरोपैथी इलाज के लिए भी चिकित्सा बिलों का भुगतान किया जाएगा l  

बैंक का एचआर विभाग कर्मचारियों के पारिवारिक आवश्यकताओं पर नजर रखती है ताकि वे खुद को और अपने परिवार को खुश और स्वस्थ रख सकें l  

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