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UPPSC UPPCS मुख्य परीक्षा 2009 सामान्य हिंदी प्रश्न पत्र

Nov 28, 2016 16:48 IST
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UPPCS की तैयारी करने वाले अभियर्थियों के लिए सामान्य हिंदी का प्रश्न पत्र बहुत ही महत्त्वपूर्ण होता है क्योंकि इसके अंक अंतिम मेरिट में जुड़ते हैं जो की UPPCS में सफलता के लिए आवश्यक है।  UPPCS की मुख्य परीक्षा 2009 का प्रश्न पत्र निम्नलिखित है।

                                  U.P.P.C.S. (Main) Exam – 2009
                                               (Unsolved Question Paper)
                                                            सामान्य हिंदी
                                                        GENERAL HINDI

निर्धारित समय : 3 घंटे                                                            पूर्णाक : 150 अकं

नोट : (i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं (ii) प्रत्येक प्रश्न के अंक उसके अंत में अंकित हैं। (iii) पत्र अथवा प्राथना-पत्र आदि के अंत में अपना नाम अथवा अनुक्रमांक न लिखें आवश्यकता होने पर क, ख, ग अथवा x,y,z लिख सकते हैं।

1. शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्य-पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिंतन न दे,व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत,सभ्य,सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नही बना सकती,तो उसमें क्या लाभ ? सह्र्दय,सच्चा परंतु अनपढ़ मजदूर उस स्नातक से कहीं अच्छा है,जो निर्दय और चरित्रहीन है। संसार के सभी वैभव व सुख-साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नही बना सकते जब तक की मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो। हमारे कुछ अधिकार और दायित्व भी है। शिक्षित व्यक्ति को उतरदायित्व का उतना ही ध्यान रखना चाहिए जितना कि अधिकारों का।

(क)    उपर्युक्त ग्घ्द्याश का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए।    05

(ख)    उपर्युक्त ग्घ्द्याश के आधार पर अधिकार और दायित्व का विवेचन कीजिए    05

(ग)    उपर्युक्त ग्घ्द्याश के रेखांकित अंशो की व्याख्या कीजिए    20

2. सामाजिक जीवन में क्रोध न हो तो मनुष्य दूसरों के द्वारा पहुँचाए जाने वाला बहुत से कष्टों की चिरनिवृति का उपाय ही न कर सके।कोई मनुष्य किसी दुष्ट के दो-चार प्रहार नित्य सहता है। यदि उसमें क्रोध का विकास नही हुआ है तो वह केवल आह-ऊह करेगा जिसका उस दुष्ट पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा। उस दुष्ट के ह्र्दय में विवेक,दया आदि उत्पन्न करने में बहुत समय लगेगा।संसार किसी को इतना समय छोटे-छोटे कामों के लिए नही दे सकता। भयभीत होकर प्राणी अपनी रक्षा कभी-कभी कर लेता है,पर समाज में इस प्रकार प्राप्त दुख-निवृति चिरस्थायिनी नही होती।हमारे कहने का अभिप्राय यह नही है कि क्रोध करने वाले के मन में सदा भावी कष्ट से बचने का उद्देश्य रहा करता है,कहने का अभिप्राय केवल इतना ही है कि चेतन सृष्टि के भीतर क्रोध का विधान इसीलिए है।

(क) ऊपर लिखे गये ग्घ्द्याश का उचित शीर्षक लिखिए।    05

(ख) संक्षेपण,सरांश और भावार्थ में अन्तर बताते हुए उपर्युक्त अवतरण का संक्षेपण एक तिहाई शब्दों में कीजिए।    25

3. (क) उतर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष की ओर से पुलिस अधीक्षक को एक पत्र लिखिए,जिसमे परिवहन सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने का अनुरोध किया गया हो।    10

(ख)तार-लेखन से क्या अभिप्राय है ? इसका एक नमूना प्रस्तुत कीजिए।    10

4.(अ) (i) निमनलिखित शब्दों के उपसर्ग और मूल शब्द पृथक्-पृथक् दर्शाइए:    05

          समालोचन,सुसंगठित,अभिमुख,अभियान,अत्याचार।

(ii) मूल शब्द और प्रत्यय पृथक् करके दर्शाइए:    05
         मानवता,दार्शनिक,समझदार,ममेरा,पीड़ित।

(ब)निम्नाकित शब्दों के ‘विलोम’ शब्द लिखिए:    10
चुस्त, सुमति, ह्रास, अभिशाप, उपादेय, परमार्थ, स्थिर संयोग, वैभव, स्थावर।

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